सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासियों के घरों पर प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद सियासत गरमा गई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद अब उनके बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी पीड़ितों के समर्थन में मैदान में उतर गए हैं. सोमवार रात कार्तिकेय कोसमी गांव पहुंचे, जहां वे पीड़ितों के साथ रातभर धरने पर बैठे रहे और जमीन पर बैठकर उनके साथ खाना खाया. इस दौरान उनके साथ बुधनी के स्थानीय विधायक रामाकांत भार्गव भी मौजूद रहे.
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कार्तिकेय सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि वे सरकार के खिलाफ मोर्चा नहीं खोल रहे हैं, लेकिन यह उनके वो वोटर्स हैं जिनकी वजह से मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के साथ अमानवीयता करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. कार्तिकेय ने यह भी बताया कि एक आदिवासी परिवार के बच्चे का जन्मदिन और उसकी जमीन ली गई थी, लेकिन वे उसका जन्मदिन भी मनाएंगे और यह प्रण लेंगे कि उसके सिर पर पक्की छत भी हो.
क्या है पूरा मामला?
सीहोर के कोसमी गांव में वन विकास निगम और जिला प्रशासन के अमले ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करते हुए बरेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों की झोपड़ियों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया था. आरोप है कि इस दौरान खेतों में खड़ी मक्का और तुअर की फसलों को ट्रैक्टर से रौंद दिया गया और पीने के पानी के कुएं को पाट दिया गया.प्रशासन का तर्क है कि यह जमीन आरक्षित वन भूमि के अंतर्गत आती है और इन लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था, इसलिए नोटिस देकर यह कार्रवाई की गई.
शिवराज सिंह चौहान ने जताई थी कड़ी नाराजगी
इस अमानवीय कार्रवाई के विरोध में सबसे पहले रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मौके पर पहुंचे थे. मलबे के ढेर के बीच खड़े होकर उन्होंने इस कार्रवाई को जुल्म की पराकाष्ठा करार दिया था. उन्होंने मौके से ही मुख्य सचिव और प्रदेश अध्यक्ष को फोन लगाकर कड़ी नाराजगी जताई थी और प्रभावित परिवारों को पक्के मकान तथा जब तक व्यवस्था न हो, तब तक खाने-पीने का पूरा इंतजाम करने के निर्देश दिए थे.मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार रात कार्तिकेय सिंह चौहान भी कोसमी गांव पहुंचे और कार्रवाई की निंदा करते हुए सख्त कदम उठाने की बात कही. उन्होंने कहा कि सभी मिलकर बैठक करेंगे. इसके तहत मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा गया है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास भी जाया जा रहा है. साथ ही, केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर अपनी असहमति जताई है.फिलहाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की बात कही है. प्रशासन ने आगामी कार्रवाई रोक दी है, जबकि प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे हुए हैं.
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