शिवराज सिंह की नाराजगी पर सीएम मोहन का बड़ा एक्शन: सीहोर के कोसमी बुलडोजर कांड पर दिए जांच के आदेश

प्राची अवस्थी

• 01:14 PM • 13 Oct 2026

सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई पर सीएम मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए हैं.केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कार्तिकेय सिंह चौहान के विरोध के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी नोटिस जारी किया है.

एक्शन में सीएम मोहन यादव
CM Mohan Yadav
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मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने के मामले में आखिरकार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है.केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान के कड़े विरोध के बाद अब मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में दखल दिया है.सीएम ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं और अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है.

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सीएम मोहन यादव का बयान

इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जानकारी हमारे पास आ गई है और सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है.संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है और मुख्य सचिव को भी अवगत करा दिया गया है.

मुख्यमंत्री ने आगे कहा,

अगर हमारे किसी सीनियर लीडर ने भी सवाल उठाए हैं, तो जांच कराने में कोई हर्ज नहीं है.जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, हमारी सरकार बेहद संवेदनशील है

क्या है पूरा मामला?

कोसमी गांव में वन विकास निगम और जिला प्रशासन के अमले ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर 12 आदिवासी परिवारों की झोपड़ियों को जमींदोज कर दिया था.आरोप है कि इस दौरान न सिर्फ घर तोड़े गए, बल्कि खेतों में खड़ी फसलें रौंद दी गईं और पानी के कुएं को भी पाट दिया गया.इस अमानवीय कार्रवाई के विरोध में सबसे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद मौके पर पहुंचे थे.उन्होंने इसे जुल्म की पराकाष्ठा बताते हुए अधिकारियों को आड़े हाथों लिया था और इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी.

कार्तिकेय सिंह चौहान का प्रदर्शन और आयोग का नोटिस

शिवराज सिंह चौहान के बाद उनके बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने कोसमी पहुंचकर पीड़ित आदिवासियों से मुलाकात की.कार्तिकेय पीड़ितों के बीच पहुंचकर रातभर उनके साथ धरने पर बैठे और आदिवासियों के साथ जमीन पर खाना भी खाया.उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि ये हमारे वही वोटर्स हैं जिनकी बदौलत मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी है, और आदिवासियों के साथ बदसलूकी करने वाले दोषी अधिकारियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा.वहीं, मुख्यमंत्री के बयान और शिवराज परिवार के विरोध के बीच राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लिया है.आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार, मुख्य सचिव, डीजीपी, वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर कलेक्टर और एसपी को नोटिस जारी कर 3 दिन के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है.दूसरी ओर, वन विभाग का तर्क है कि यह जमीन आरक्षित वन भूमि के अंतर्गत आती है और अवैध कब्जे पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है.हालांकि, सीएम मोहन यादव के जांच के ऐलान और राष्ट्रीय आयोग के कड़े रुख के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है.