मध्य प्रदेश के शिवपुरी में इन दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. मामला बुधवार का है, जहां ओबीसी महासभा की तरफ से 27 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया था. इस प्रदर्शन के दौरान माहौल उस वक्त पूरी तरह गर्मा गया जब स्थानीय बीजेपी विधायक देवेंद्र जैन और एक प्रदर्शनकारी युवक के बीच आमने-सामने की तीखी बहस हो गई.
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गुस्से में तपे युवक ने विधायक से दो टूक कह डाला, "आप गधे हो, मैं ग्रेजुएट हूं!" युवक के इस बेबाक अंदाज और तीखे तंज पर वहां मौजूद भीड़ ने जमकर तालियां बजाईं. इस माहौल को भांपते हुए विधायक वहां से खिसक लेने में ही भलाई समझी.
क्यों हो रहा था यह प्रदर्शन?
शिवपुरी कलेक्ट्रेट पर इकट्ठा हुए ओबीसी महासभा के कार्यकर्ताओं और युवाओं की मुख्य मांग थी कि मध्य प्रदेश में तुरंत 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू किया जाए. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि वे भी देश के सम्मानित नागरिक हैं और अपनी बात रखना उनका हक है.
इस दौरान भीड़ में बैठे युवाओं का गुस्सा सिर्फ आरक्षण तक सीमित नहीं था, बल्कि वे इस बात से भी बुरी तरह खफा थे कि कलेक्ट्रेट के बड़े अधिकारी खुद बाहर आकर उनका ज्ञापन लेने नहीं आए. प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन, कलेक्टर, स्थानीय नेताओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की गई. युवाओं का आरोप था कि इस अहम मुद्दे पर उन्हें अदालतों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, इसलिए सरकार अध्यादेश लाकर महज सात दिन के भीतर इसे लागू करे.
जब विधायक और युवक में हो गई बहस
कलेक्टर परिसर में चल रहे इस हंगामे के बीच शिवपुरी से बीजेपी विधायक देवेंद्र जैन वहां पहुंचे. हालात का जायजा लेते ही भीड़ में से एक युवक उनके सामने आ डटा. बातचीत के दौरान जब आरक्षण के कानूनी पहलुओं पर बात उठी, तो विधायक की बात पर पलटवार करते हुए युवक ने तेवर दिखाए.
जब विधायक ने कुछ ऐसा कहा जिससे युवक का पारा चढ़ गया, तो उसने बिना डरे विधायक को सीधे तौर पर कह दिया कि आप गधे हैं और वह खुद एक ग्रेजुएट युवा है. युवक के इस अंदाज ने वहां मौजूद बाकी प्रदर्शनकारियों में जोश भर दिया और सबने तालियां बजाकर उसका समर्थन किया. स्थिति को बिगड़ता देख विधायक मौके से चुपचाप निकल गए.
प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप
प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे लोगों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के ओबीसी नेताओं की गैरमौजूदगी पर कड़े सवाल उठाए. उनका कहना था कि यह किसी एक राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं है, बल्कि हक की आर-पार की लड़ाई है.
इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे किसी पार्टी विशेष के इशारे पर काम कर रहे हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि अगर प्रशासन वाकई निष्पक्ष है, तो कलेक्टर को खुद बाहर आकर उनका ज्ञापन लेना चाहिए था. इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ भी तीखे नारे गूंजते रहे और काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा.
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