MP Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में महज 15 दिन का समय शेष है. ऐसे में सियासी बयानबाजी भी तेज हो चली है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच मनमुटाव की खबरों पर तंज कसा है. उन्होंने कहा, ‘यह जय-वीरू की जोड़ी लूट के माल के लिए लड़ रही है. जय-वीरू का झगड़ा लूट के माल के लिए है. इसी कारण दिल्ली से बुलावा आ रहा है.’
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दरअसल, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच मनमुटाव की खबरें पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में हैं. जिसको लेकर खुद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पहले ही सफाई दे चुके हैं. फिर भी इस एक बार फिर इनके मनमुनाव की खबरे तेज हो चली हैं. इसी बीच शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसा है, उन्होंने कहा, “ये जय और वीरू की जोड़ी है जिसे दिल्ली बुलाया गया. अब वो कहते हैं कि भाजपा भ्रम फैला रही है तो दिल्ली क्यों बुला रही है. कांग्रेस के जय और वीरू झगड़ रहे हैं आपस में ये लूट के माल के लिए लड़ रहे हैं. जय और वीरू तो लूटते ही थे, इनका झगड़ा लूट के माल के लिए है. पहले भी 2003 तक मिस्टर बंटाढार में पूरे प्रदेश को लूटा और बर्बाद कर दिया, सवा साल में श्री कमलनाथ जी ने भी लूट का अड्डा बना दिया था. अब दिल्ली भी पता नहीं इन पर किस मुद्दों पर चर्चा कर रही है. क्या दिल्ली भी इसमें शामिल है?”
दिल्ली में बैठक के बाद भोपाल पहुंचे दोनों नेता
मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में अनबन की खबरों के बीच आलाकमान एक्टिव हो गया है. जिसके चलते एमपी कांग्रेस के बड़े नेताओं को दिल्ली बुला लिया गया है. पीसीसी चीफ कमलनाथ, रणदीप सुरजेवाला और दिग्विजय सिंह दिल्ली रवाना हो गए हैं. बता दें टिकट वितरण के बाद से एमपी कांग्रेस के बड़े नेताओ के बीच मनमुटाव की खबरें सामने आ रही है, जिसे लेकर कल देर रात भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नेताओं के बीच बैठक हुई थी. इस बैठक में कांग्रेस संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल भी शामिल हुए थे.
कमलनाथ को सेठ कहने पर विवाद
कमलनाथ के बयान पर पलटवार करते हुए शिवराज ने कहा कि सोमवार को मैंने उन्हें सेठ कहा तो वो आपत्ति व्यक्त कर रहे हैं मैं सेठ हूं क्या… मैं उद्योगपति हूँ क्या..? कमलनाथ जी को मैं सेठ न कहूं तो क्या उन्हें मजदूर कहूं, फसल काटने वाला कहूं, गिट्टी-मिट्टी उठाने वाला कहूं. वो स्वयं कहते हैं. मैं निजी प्लेन में घूमता हूं. अब निजी प्लेन किसान के पास तो होता नहीं है. मजदूर के पास नहीं होता है. गरीब के पास नहीं होता है. उनका एक पैर देश में रहता है एक पैर विदेश में रहता है. सेठ को सेठ न कहें तो क्या कहें? सेठ को सेठ कहने में आपत्ति क्या है.
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