शिवराज के बेटे कार्तिकेय के सियासत में एंट्री का मैदान तैयार, क्या इस तरह से राजनीति में आएंगे कार्तिकेय ?

आशुतोष शुक्ला

• 08:14 PM • 12 Oct 2026

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान मध्य प्रदेश वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष चुने गए हैं. जानिए कैसे सिंधिया राजघराने की तरह अब मध्य प्रदेश के दिग्गज नेताओं के बेटे खेल प्रशासन के जरिए राजनीति की पिच तैयार कर रहे हैं ?

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कार्तिकेय सिंह बनें एमपी वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष
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भोपाल: केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने चुनावी राजनीति से पहले खेल प्रशासन के मैदान में कदम रख दिया है. कार्तिकेय सिंह चौहान को मध्य प्रदेश वॉलीबॉल संघ का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है. भोपाल में आयोजित चुनाव में 33 जिला संघों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्हें वर्ष 2026 से 2030 के कार्यकाल के लिए यह जिम्मेदारी सौंपी गई. 

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अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद कार्तिकेय ने राज्य में खेल के विकास के लिए 'मध्यप्रदेश वॉलीबॉल खेल नीति 2026' का प्रारूप जल्द तैयार करने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य वॉलीबॉल को प्रदेश के हर गांव और युवा तक पहुंचाना है, जिसके लिए हर जिले के लिए अलग रोडमैप बनाया जाएगा. 

सिंधिया राजघराने की परिपाटी की राह पर शिवराज का परिवार? 

मध्य प्रदेश की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है जब किसी बड़े नेता के बेटे ने राजनीति के मुख्य मंच पर उतरने से पहले खेल संघों का रुख किया हो.  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया भी मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ (MPCA) में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

सिंधिया राजघराने में यह एक पुरानी परिपाटी रही है कि राजकुमारों को सीधे चुनावी राजनीति में उतारने के बजाय पहले सामाजिक, प्रशासनिक और खेल संगठनों के जरिए सक्रिय किया जाता है. दिवंगत माधवराव सिंधिया और खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी राजनीति में कदम रखने से पहले MPCA की जिम्मेदारी संभाली थी. अब शिवराज सिंह चौहान का परिवार भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ता दिख रहा है. 

सीधे टिकट मिलना नामुमकिन, तो खेल के जरिए युवाओं से कनेक्ट की तैयारी ?

राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जेपी नड्डा के नेतृत्व वाली बीजेपी में अब परिवारवाद को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया जाता है. यही वजह है कि दिग्गज नेता भी अपने बेटों को सीधे विधानसभा या लोकसभा का टिकट नहीं दिलवा सकते. 

ऐसे में खेल संघ एक ऐसा मजबूत प्लेटफॉर्म बनकर उभरे हैं जहां से नेताओं की अगली पीढ़ी: 

  1. अपनी पहचान बना सकती है: पिता के प्रभाव से बाहर निकलकर खुद की प्रशासनिक क्षमता और लीडरशिप साबित करने का मौका मिलता है.
  2. प्रदेशव्यापी नेटवर्क: केवल पिता के विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रहने के बजाय पूरे प्रदेश के युवाओं और खेल प्रतिनिधियों से सीधा जुड़ाव बनता है.
  3. हाईकमान को रिपोर्ट कार्ड: शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी सक्रियता और जनसेवा का एक ठोस रिपोर्ट कार्ड पेश किया जा सकता है.
  4. कार्तिकेय चौहान, महाआर्यमन सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे—ये सभी युवा नेता अब खेल संगठनों के माध्यम से अपनी राजनीतिक पिच तैयार कर रहे हैं.  

बुधनी से ग्वालियर तक: पहले से ही सक्रिय हैं कार्तिकेय और महाआर्यमन 

कार्तिकेय सिंह चौहान अपने पिता के मुख्यमंत्री रहते हुए भी सीहोर की बुधनी विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार और युवा संवाद का जिम्मा संभालते रहे हैं. वहीं महाआर्यमन सिंधिया अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल की सियासत में लगातार एक्टिव दिख रहे हैं. दोनों ही युवा चेहरे अब सार्वजनिक मंचों और कार्यक्रमों में नियमित रूप से नजर आ रहे हैं. 

वॉलीबॉल संघ का अध्यक्ष बनने के बाद कार्तिकेय के इस नए सफर को मध्य प्रदेश की भावी राजनीति में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है.