विदिशा में शर्मसार करने वाली तस्वीर, जिला अस्पताल के गेट पर ही महिला ने बच्चे को दिया जन्म, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

विदिशा जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर एक गर्भवती महिला द्वारा बच्चे को जन्म देने का वीडियो सामने आने के बाद मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. विपक्ष के हमलों के बाद सिविल सर्जन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है.

विदिशा में आया शर्माशार करने वाला मामला
विदिशा में आया शर्माशार करने वाला मामला
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मध्य प्रदेश के विदिशा जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को शर्मसार करने वाली एक बेहद गंभीर तस्वीर सामने आई है. यहां सिरोंज से रेफर होकर आई एक गर्भवती महिला को अस्पताल परिसर में न तो समय पर डॉक्टर मिले और न ही स्ट्रेचर या नर्स. प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला ने आखिरकार जिला अस्पताल के मुख्य गेट (मेन गेट) पर ही बच्चे को जन्म दे दिया.

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यह घटना इसलिए भी बड़े सवाल खड़े करती है क्योंकि विदिशा देश के केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह क्षेत्र माना जाता है. विकास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच अस्पताल के गेट का ही डिलीवरी रूम बन जाना, पूरे सिस्टम की पोल खोल रहा है.

25 मिनट तक तड़पती रही मां और नवजात

पीड़ित महिला के परिजनों का आरोप है कि वे दोपहर करीब 1 बजे अस्पताल आ गए थे. महिला दर्द से तड़प रही थी, लेकिन स्टाफ या डॉक्टरों की तरफ से कोई मुस्तैदी नहीं दिखाई गई. जब परिजनों ने स्थिति जाननी चाही या मदद मांगी, तो अस्पताल का स्टाफ और सुरक्षा गार्ड उल्टा उन पर ही केस लगवाने की धमकी देने लगे. परिजनों के अनुसार, अस्पताल के गेट पर प्रसव होने के बाद भी करीब 25 मिनट तक मां और नवजात बच्चे को कोई तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी.

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में भारी गुस्सा है. मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी तरह विफलता बताते हुए प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है.

अस्पताल प्रबंधन की सफाई और जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ने के बाद विदिशा जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर अनूप वर्मा ने बताया कि महिला सिरोंज से रेफर होकर आई थी. उसका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था और ब्लीडिंग की शिकायत थी, जिसके लिए उसे भर्ती कर शुरुआती इलाज और दवाइयां दी जा रही थीं. गेट पर हुई डिलीवरी के मामले को लेकर उन्होंने एक जांच समिति (जांच दल) गठित कर दी है. सिविल सर्जन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी, यहां तक कि जरूरत पड़ने पर सेवा से निष्कासित करने के लिए भी पत्र लिखा जाएगा.