सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मी एक शव यात्रा को आगे बढ़ने से रोकते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को लेकर उत्तर प्रदेश के कौशांबी से समाजवादी पार्टी के युवा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने एक ऐसा दावा कर दिया, जिससे मध्य प्रदेश की सियासत और सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया. लंदन से पढ़े-लिखे माननीय सांसद जी ने इस वीडियो को मध्य प्रदेश का बताते हुए इसे जातिवाद और दलित उत्पीड़न से जोड़ दिया. हालांकि, जब इस वीडियो का सच सामने आया, तो सांसद जी की भारी किरकिरी हो गई.
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सपा सांसद ने क्या दावा किया था?
लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी से अकाउंटिंग एंड मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले 2024 के सबसे युवा सांसदों में से एक, पुष्पेंद्र सरोज ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर यह वीडियो शेयर किया था. वीडियो साझा करते हुए उन्होंने लिखा:
"क्या अब धुएं की भी जात होगी? मध्य प्रदेश में दलित की चिता सिर्फ इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं ब्राह्मणों के श्मशान तक जा रहा था. जिंदा रहते भेदभाव, मरने के बाद भी अपमान. यह इंसानियत नहीं, जातिवाद का प्रकाश था."
सांसद जी के इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई. चूंकि मामला मध्य प्रदेश से जुड़ा बताया गया था, इसलिए हमारी सहयोगी वेबसाइट MP Tak ने इस वीडियो की बारीकी से पड़ताल और फैक्ट चेक (Fact Check) किया. छानबीन में जो सच सामने आया, उसने सांसद जी के दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी.
फैक्ट चेक में खुला राज
पड़ताल के दौरान पता चला कि इस वायरल वीडियो का मध्य प्रदेश से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है और न ही इसमें किसी ब्राह्मण या दलित श्मशान घाट का कोई विवाद है. यह वीडियो उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले का है.
उत्तर प्रदेश की अमेठी पुलिस द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह मामला अमेठी के जगदीशपुर थाने के अंतर्गत आने वाले हारीमऊ गांव का है. वहां के श्मशान स्थल पर केयरटेकर की नौकरी करने वाले मनोज सिंह उर्फ मक्खन सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. मनोज सिंह ने अपने ही कुछ साथियों के साथ शराब पी थी, जिसके बाद उनके बीच मारपीट हुई और इस झगड़े में मनोज की जान चली गई थी. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर जेल भेज दिया था.
फिर पुलिस ने अर्थी क्यों रोकी थी?
जब मृतक मनोज सिंह के परिजन और ग्रामीण उनके शव को लेकर जा रहे थे, तो वे आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर नेशनल हाईवे (National Highway) जाम करने के इरादे से आगे बढ़ रहे थे. कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसलिए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने शव यात्रा को हाईवे पर जाने से रोका था. वायरल वीडियो उसी समय का है, जिसे सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक दावों के साथ फैलाया गया.
सांसद जी ने चुपचाप डिलीट की पोस्ट
फैक्ट चेक में झूठ बेनकाब होने के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने बिना किसी सफाई या माफीनामे के चुपचाप अपनी इस विवादित पोस्ट को सोशल मीडिया से डिलीट कर दिया है. हालांकि, तब तक यह फेक न्यूज़ काफी वायरल हो चुकी थी और इंटरनेट पर उनकी जमकर फजीहत हो गई.
आपको बता दें कि पुष्पेंद्र सरोज सपा के कद्दावर नेता इंद्रजीत सरोज के बेटे हैं और उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में कौशांबी सीट से बीजेपी के विनोद सोनकर को हराया था. लेकिन इस बार लंदन रिटर्न नेताजी सोशल मीडिया की अफवाहों के जाल में फंस गए और बिना सोचे-समझे झूठी खबर शेयर कर बैठे.
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