मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने साइबर फ्रॉड के लिए फर्जी APK फाइल तैयार करने वाले 36 साल आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी B.Tech ड्रॉपआउट है और इंदौर में रहकर APK फाइल बनाने का काम करता था। पुलिस के मुताबिक, उसकी बनाई APK फाइलों का इस्तेमाल देशभर में बड़े पैमाने पर साइबर ठगी के लिए किया गया. शुरुआती जांच में इन फाइलों के जरिए 150 करोड़ रुपये से ज्यादा के फ्रॉड का पता चला है.
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सीनियर सिटीजन को भेजी थी फर्जी फाइल
मामले की जांच 13 अगस्त को मुंबई के बायकुला में सामने आए एक साइबर फ्रॉड के बाद शुरू हुई. इस मामले में एक सीनियर सिटीजन को SPK/APK फाइल भेजकर उसे क्लिक करने के लिए कहा गया था. जैसे ही पीड़ित ने फाइल खोली, उसके बैंक अकाउंट से 5.62 लाख रुपये निकल गए. शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने तकनीकी जांच शुरू की. जांच के दौरान पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंची, जो साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाली APK फाइलें तैयार करता था.
अब तक 2805 APK फाइलें तैयार कीं
मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अब तक करीब 2805 APK फाइलें तैयार की थीं. इन फाइलों के नाम इस तरह रखे जाते थे कि लोगों को वे सरकारी या जरूरी सेवाओं से जुड़ी हुई लगें. इनमें पेंशन कार्ड वेरिफिकेशन, लाइफ सर्टिफिकेट, सीनियर सिटीजन APK, RTO चालान, क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन और अपडेट जैसी फाइलें शामिल थीं. आरोपी इन फाइलों को साइबर फ्रॉड करने वालों को उपलब्ध कराता था. इसके लिए उसने सर्वर भी किराए पर ले रखा था.
- पुलिस जांच में 1930 हेल्पलाइन पर दर्ज जानकारी के आधार पर अब तक 9673 ऐसे पीड़ितों का पता चला है, जिनके मामलों में APK फाइल का इस्तेमाल सामने आया है. महाराष्ट्र में ऐसी 1074 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी है. मुंबई में भी APK फाइल से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि अब तक सामने आए मामलों में साइबर फ्रॉड की रकम 150 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है. जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है.
कॉल और मैसेज से बनाते थे भरोसा
साइबर ठगी करने वाले लोगों को पहले कॉल या मैसेज के जरिए संपर्क करते थे. खासतौर पर सीनियर सिटीजन को निशाना बनाया जाता था. उन्हें सीनियर सिटीजन कार्ड, पेंशन, लाइफ सर्टिफिकेट या किसी अन्य सरकारी दस्तावेज के वेरिफिकेशन के नाम पर APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता था. फाइल इंस्टॉल होने के बाद ठग पीड़ित के साथ आगे की प्रक्रिया के नाम पर संपर्क बनाए रखते थे और इसी दौरान उसके बैंक अकाउंट से रकम निकालने की कोशिश की जाती थी.
फ्रॉड करने वालों को तकनीकी मदद देता था
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी खुद सीधे लोगों को ठगने के बजाय साइबर फ्रॉड करने वाले लोगों को तकनीकी सहायता देता था. वह उनके लिए जरूरत के मुताबिक APK फाइल तैयार करता और उन्हें बेचता था. पुलिस को आशंका है कि आरोपी से APK फाइल खरीदने वाले कई साइबर अपराधी देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं. आरोपी से पूछताछ कर पुलिस अब उन लोगों की जानकारी जुटा रही है, जिन्होंने उससे ये APK फाइलें खरीदी थीं। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं. जांच में सामने आया है कि आरोपी ने शुरुआत में ऐप डेवलपमेंट और वेबसाइट डेवलपमेंट से जुड़ी कंपनी शुरू की थी. इसी दौरान उसे एक साइबर फ्रॉड करने वाले व्यक्ति का फोन आया. उसने आरोपी से APK फाइल तैयार करने की बात कही और अपनी सेवाएं देने का प्रस्ताव रखा. इसके बाद आरोपी धीरे-धीरे देशभर में सक्रिय साइबर फ्रॉड करने वालों के संपर्क में आया और उनके लिए APK फाइल तैयार कर उन्हें बेचने लगा. पुलिस अब इस नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की तलाश में जुटी है.
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