Twisha Sharma Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित त्रिशा शर्मा मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बेहद अहम सुनवाई हुई है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में हाईकोर्ट के भीतर आज क्या-क्या कानूनी दलीलें दी गईं और शासन का क्या रुख रहा, इसको लेकर हमारी सहयोगी वेबसाइट MP Tak ने राज्य के एडवोकेट जेनरल प्रशांत सिंह से खास बातचीत की.
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मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य शासन की तरफ से देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और खुद एडवोकेट प्रशांत सिंह ने कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष रखा. हाईकोर्ट में आज त्रिशा शर्मा मामले से जुड़ी तीन अलग-अलग अहम याचिकाओं पर विस्तार से सुनवाई हुई, जिसमें आरोपियों की घेराबंदी से लेकर मृतका के परिजनों की मांगों पर बड़े फैसले सामने आए हैं.
सुनवाई के दौरान क्या क्या हुआ
सुनवाई के दौरान सबसे पहला और बड़ा घटनाक्रम मुख्य आरोपी समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bell) याचिका को लेकर रहा. भोपाल की जिला अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद आरोपी समर सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन आज जब सुनवाई शुरू हुई तो चौतरफा दबाव के बीच समर्थ सिंह के वकील ने कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस लेने की मांग की.
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि आरोपी समर सिंह अब कोर्ट के सामने सरेंडर करने के लिए तैयार है. हाई कोर्ट ने आरोपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह या तो मामले की जांच कर रहे इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) के सामने आत्मसमर्पण करे या फिर सीधे भोपाल जिला न्यायालय के समक्ष जाकर सरेंडर करे, जिसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर क्या हुआ
इसके अलावा, मामले में दूसरा सबसे संवेदनशील मुद्दा ट्विशा शर्मा के परिजनों द्वारा शव के दोबारा पोस्टमार्टम (Second Post-Mortem) कराने की मांग का था. इस पर राज्य सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कोर्ट में अपनी मंजूरी दे दी है. महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा, एम्स (AIIMS) भोपाल हमारे राज्य का एक बेहद प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान है और वहां के डॉक्टरों की योग्यता पर हमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन परिवारवालों की संतुष्टि सर्वोपरि है. हमारा मानना है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए." इसी के मद्देनजर हाईकोर्ट ने अब दिल्ली एम्स के डायरेक्टर को डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया है. टीम के गठन की सूचना मिलते ही राज्य सरकार लॉजिस्टिक्स और आवश्यक संसाधन मुहैया कराएगी ताकि दिल्ली एम्स की देखरेख में दोबारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो सके.
तीसरी याचिका बालाजी की जमानत रद्द
तीसरी बड़ी याचिका मामले के एक अन्य आरोपी बालाजी की जमानत रद्द (Bail Cancellation) करने को लेकर थी, जिस पर राज्य शासन ने कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट के सामने सरकार की तरफ से दलील दी गई कि आरोपी बालाजी को अगर बाहर रहने दिया गया, तो वह मामले से जुड़े अहम साक्ष्यों और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है. इसके साथ ही सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि आरोपी द्वारा जांच टीम (Investigating Team) को आवश्यक सहयोग भी नहीं दिया जा रहा है. इन तर्कों के आधार पर प्रदेश शासन ने आरोपी की जमानत को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की जोरदार वकालत की है.
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने साफ किया कि मध्य प्रदेश सरकार और राज्य की पुलिस बेहद सक्षम है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष व गहन विवेचना एक योग्य अधिकारियों की टीम कर रही है. कोर्ट में सरकार की इस मजबूत और दबंग पैरवी से यह साफ संदेश गया है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा. फिलहाल, परिजनों की मांग के अनुसार शव को सुरक्षित और डीकंपोज होने से बचाने के लिए राज्य के पास उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ डीप-फ्रीजिंग और मेडिकल संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि दोबारा होने वाले पोस्टमार्टम में मौत के सही कारणों का सटीक खुलासा हो सके.
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