Charchit Chehra: राहुल गांधी ने जताया भरोसा तो दिग्विजय सिंह भी हो गए थे मुरीद...जानिए मीनाक्षी नटराजन की पूरी कहानी!

Meenakshi Natarajan Biography: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन एक बार फिर सुर्खियों में हैं. राज्यसभा चुनाव 2026 में उनका नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. जानिए राहुल गांधी की भरोसेमंद सहयोगी, दिग्विजय सिंह के '100 टंच माल' बयान और मीनाक्षी नटराजन के सादगीभरे राजनीतिक सफर की पूरी कहानी.

Congress Leader Meenakshi Natarajan
Congress Leader Meenakshi Natarajan

रूपक प्रियदर्शी

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जिस महिला कांग्रेस कार्यकर्ता की बेदाग राजनीतिक इमेज, ईमानदारी, फकीरी देखकर कभी मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने सौ टंच माल यानी शुद्ध सोना कहा था उन्हीं दिग्विजय सिंह ने अपनी राज्यसभा सीट पर दावेदारी छोड़ दी. यह कोई और नहीं बल्कि मीनाक्षी नटराजन है जिनके राजनीतिक करियर में भयंकर हादसा सा हुआ है. मीनाक्षी के साथ हुए हादसे पर जब बीजेपी नेता जश्न मना रहे हैं तब राजनीतिक साजिश, विश्वासघात के एंगल भी जुड़ रहे हैं. 18 जून को राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हो गया. मीनाक्षी नटराजन ने सचमुच भूल की या साजिश की शिकार हुईं या अपने किसी ने विश्वासघात किया? चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में आज जानिए 52 साल की फकीर, फक्कड़ कांग्रेस कार्यकर्ता मीनाक्षी नटराजन की पूरी कहानी.

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दक्षिण भारत से आकर मध्य प्रदेश में बसा परिवार

अक्सर मन में उठने वाला है कि सवाल है कि मध्य प्रदेश की बड़ी नेता होने के बाद भी उनका नाम में साउथ का सरनेम नटराजन क्यों है. मीनाक्षी नटराजन का जन्म 23 जुलाई 1973 को मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के औद्योगिक शहर नागदा में हुआ. उनके पिता का नाम ए.आर. नटराजन और माता का नाम उमा नटराजन है. उनका परिवार दक्षिण भारत का है. पिता काम के सिलसिले में कभी मध्य प्रदेश आए तो फिर वहीं के होकर रह गए. मीनाक्षी की परवरिश, पढ़ाई-लिखाई और अब राजनीति सब तक मध्य प्रदेश से सीमित हो गई. उन्होंने इंदौर के होल्कर साइंस कॉलेज से बायोकेमिस्ट्री में M.Sc और LLB की डिग्री ली. 

NSUI से कांग्रेस पार्टी तक का सफर

बायोकेमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन (M.Sc) कर रही थीं, तब कॉलेज परिसर की समस्याओं और छात्र हितों को लेकर वे अक्सर मुखर रहती थीं. इसी दौरान वे कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के संपर्क में आईं और उन्होंने  छात्र राजनीति में कदम रख दिया. कॉलेज कैंपस से शुरू हुआ उनका यह सफर इतना प्रभावी रहा कि दिल्ली में पार्टी हाईकमान की नजरों में आ गईं. 1999 में पढ़ाई पूरी होते ही सीधे NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त कर दिया, जो उनके लिए राष्ट्रीय राजनीति के दरवाजे खुलने का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. 

अब ये अलग है कि कांग्रेस में सब कुछ मिलने और होने के बाद भी मीनाक्षी नटराजन की राजनीति वैसी नहीं चमकी जैसे औरों की चमकी. राजनीति में सबसे जरूरी होती है जीत. अगर आप जीत सकते हैं तो कोई सवाल नहीं पूछेगा लेकिन मीनाक्षी की ट्रेजडी ये कि दो बार लोकसभा हार गईं. राज्यसभा चुनाव से ऐसे ही रिजेक्ट हो गईं. न जाने क्यों उन्होंने कभी कोई विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा.

खुद के बल बूते पर बनाया अपना नाम!

मीनाक्षी नटराजन के आसपास कुछ राजनीतिक नहीं था. मीनाक्षी नटराजन आज जिस मुकाम पर हैं तो बिना किसी राजनीतिक रसूख के. कॉलेज ईयर्स में उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से राजनीति में कदम रखा. सोनिया गांधी के समय तक उनकी राजनीतिक पहचान बनी तो  NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं. दिल्ली में रहकर आगे जगह बनाने के वक्त वो मध्य प्रदेश लौट गई. एमपी यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं. उस दौर में कांग्रेस सरकार में भी थी और संगठन भी मजबूत था. मीनाक्षी जमीन पर कांग्रेस की मजबूत आवाज बनकर उभरीं.

2007 में जब यूथ कांग्रेस-NSUI के महासचिव बने तो उन्होंने पार्टी के पॉलिटिकल सिस्टम को बदलने की ठानी. एक ऐसी यूथ ब्रिगेड तैयार करने में जुटे जो राहुल गांधी की OG  Original Gangsters) टीम कहलाने लगी. उस टीम से कई नए नेताओं की राजनीति में एंट्री हुई. मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन उस टीम की प्रॉमिनेंट और भरोसेमंद फेस बनी. 

2009 की वन टाइम विक्ट्री की कहानी!

2009 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी उम्मीदवार चुनने वालों में शामिल थे. उन्होंने मीनाक्षी को मंदसौर लोकसभा सीट से उतार दिया. मंदसौर सीट पर 1971 से बीजेपी के दिग्गज नेता लक्ष्मी नारायण पांडेय का दबदबा था. राहुल के कॉन्फिडेंस और सपोर्ट से मीनाक्षी ने सबको चौंकाते हुए 8 बार के विजेता लक्ष्मी नारायण पांडे को 30 हजार से अधिक वोटों से हराकर संसद में एंट्री ली. मीनाक्षी नटराजन पर राहुल गांधी का भरोसा और बढ़ गया. 

मीनाक्षी नटराजन के लिए 2009 की जीत वन टाइम विक्ट्री बनकर रह गई. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर में लगातार बीजेपी से हारना पड़ा. चुनावों में हार ने कांग्रेस में मीनाक्षी को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत किया. ये दोनों ऐसे चुनाव थे जहां कांग्रेस ने खुद बहुत खराब प्रदर्शन किया. पार्टी लेवल पर उन्हें तेलंगाना जैसे मजबूत कांग्रेस राज्य में संगठन के काम दिए गए. 

सादगी बनी मीनाक्षी की पहचान

उनकी गिनती कांग्रेस में गांधीवादी नेताओं में होती है. सामान्य परिवार की मीनाक्षी नटराजन ने राजनीति में अपने लिए फकीर, फक्कड़ वाली लाइफ चुनी. छात्र राजनीति के जमाने से आज तक हफ्ते में एक दिन मौन व्रत रखती हैं. हमेशा खादी के साधारण कपड़ों में दिखती हैं. उनके पास कार नहीं, घर नहीं. वो फ्लाइट से नहीं, ट्रेन से सफर करती हैं. पूर्व सांसद होने के बावजूद न खुद का मकान, न एक इंच खेती की जमीन. लोकल कहीं जाना है तो ऑटो में भी बैठ जाती है. 

मीनाक्षी का ईमानदारी का किस्सा!

मीनाक्षी नटराजन की राजनीतिक ईमानदारी का किस्सा मिसाल बना है. कहा जाता है कि 2024 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए 5 करोड़ का फंड दिया था. जब चुनाव खत्म हुआ तो उन्होंने 4 करोड़ पार्टी फंड में लौटा दिए. जायज और जरूरी खर्च के अलावा अपने पास कुछ नहीं रखा. 52 साल की मीनाक्षी नटराजन ने शादी नहीं की. पूरा जीवन देश, समाज, की सेवा, साहित्य और कांग्रेस संगठन के लिए समर्पित कर दिया है. उनके इस फैसले में उनके परिवार का पूरा समर्थन रहा. चुनावों में दाखिल होने वाले हलफनामों में पति यानी Spouse वाले कॉलम में हमेशा 'नॉट एप्लिकेबल' (NA) या 'शून्य' लिखती रहीं मीनाक्षी.

जब दिग्विजय सिंह ने कहा था टंच माल...

मीनाक्षी नटराजन जब मध्य प्रदेश में रहकर राजनीति में किसी मुकाम बनाने की कोशिश में थी तब भी दिग्विजय सिंह का कद बहुत बड़ा था. बड़े मुरीद रहे मीनाक्षी के. 2013 में तारीफ में उन्हें सौ टंच माल कह दिया तो बड़ा हंगामा मचा. मीनाक्षी खुद कुछ नहीं बोलीं. महिला विरोधी और आपत्तिजनक करारते हुए जो बोलना, हंगामा करना था, वो बीजेपी ने किया. दिग्विजय को इतना बैकफुट पर ला दिया कि उन्होंने खेद जता दिया लेकिन ये समझाते हुए कि मालवी और बुंदेलखंडी बोली और सराफा की बोलचाल में टंच माल का मतलब 100 परसेंट खरा सोना होता है, जिसका कोई गलत अर्थ नहीं होता, उन्होंने तो मीनाक्षी की 100% ईमानदारी की तारीफ की थी. 

मीनाक्षी का नामांकन रद्द!

2026 के राज्यसभा की सीट दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा होने से खाली हुई. उन्होंने दोबारा टिकट नहीं मांगा. कमलनाथ की बड़ी नजर थी सीट पर लेकिन राहुल गांधी ने कमलनाथ से कहीं जूनियर मीनाक्षी नटराजन को उनकी तपस्या का इनाम दिया. स्क्रूटनी के दौरान उनका नामांकन रद्द कर दिया गया. कांग्रेस के हाथ से एक संसद सीट और मीनाक्षी के फिर संसद जाने को झटका लगा. अब नामांकन रद्द होने को लेकर कई विवाद तरह के हैं. 

चल रहा आरोप-प्रत्यारोप का दौर

बीजेपी ने शिकायत की कि मीनाक्षी नटराजन ने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक मामले की जानकारी छुपाई. कांग्रेस और मीनाक्षी का दावा है कि मामला ऐसा था ही नहीं जिसे हलफनामे में डाला जाए. मामला सिर्फ लीगल नोटिस दिए जाने का था. चुनाव आयोग का नियम है कि फॉर्म 26 में एफआईआर या चार्जशीट हो तो जानकारी देनी होती है. कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी.

जो हुआ उसे मीनाक्षी नटराजन ने बीजेपी की चाल बताई है. कहती हैं जो काम अब तक वोट चोरी तक सीमित था, वह अब सीट सीट डकैती बन चुका है. बीजेपी के पास नंबर नहीं थे. फिर भी उन्होंने तीसरी सीट पर उम्मीदवार महेश केवट को  उतारा. जब कांग्रेस के विधायक तोड़ नहीं पाए तो कानूनी नोटिस को ढाल बनाकर पर्चा खारिज करवा दिया.  

कौन हैं विभीषण?

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी थ्योरी चल रही है कि तेलंगाना के एक बेहद गुप्त और छोटे से अदालती नोटिस की जानकारी मध्य प्रदेश बीजेपी तक आखिर पहुंची कैसे?  बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि हमें मीनाक्षी नटराजन के अदालती मामलों के दस्तावेज किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि खुद तेलंगाना कांग्रेस के ही कुछ नेताओं ने मुहैया कराए हैं. 

इस थ्योरी के पीछे की वजह ये बताई जा रही है कि मीनाक्षी नटराजन फरवरी 2025 से तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी थीं. संगठन में जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों और हैदराबाद यूनिवर्सिटी की जमीन नीलामी के मुद्दे पर सीएम रेवंत रेड्डी सरकार के खिलाफ जाने की वजह से  कांग्रेस का एक गुट नाराज चल रहा था. चर्चा है कि तेलंगाना कांग्रेस के उसी विरोधी गुट ने मीनाक्षी को राज्यसभा जाने से रोकने के लिए जानबूझकर हैदराबाद की चौथी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत लंबित उस 'प्राइवेट कंप्लेंट के कागजात मध्य प्रदेश बीजेपी के नेताओं को लीक किए और चुनाव खत्म कराया. 

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने से राज्यसभा सीट पर मुकाबला खत्म हो चुका है. महेश केवट का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है. हालांकि, कांग्रेस हार मानने को तैयार नहीं है. अभिषेक मनु सिंघवी केस बना रहे हैं हाईकोर्ट या सुप्रीम जाने का. कांग्रेस चुनाव आयोग से लड़ रही लेकिन जो होना था वो हो चुका.आगे कुछ होना होगा तो शायद सुप्रीम कोर्ट में कोई करिश्मा होने पर हो.

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कौन हैं अरविंद शर्मा, जिनके एक फैसले से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, दिल्ली से भोपाल तक मचा बवाल

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