Datia By-Election: कौन हैं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह, जिनकी एंट्री से दतिया उपचुनाव में बढ़ी BJP और कांग्रेस की टेंशन

न्यूज तक डेस्क

• 05:46 PM • 20 Jul 2026

Datia By Election: मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर और राज्य की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी रहीं संजना सिंह की एंट्री ने मुकाबले को रोचक बना दिया है. सरकारी नौकरी छोड़ राजनीति में आईं संजना अब भारतीय गणवार्ता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं, जिससे सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं.

कौन हैं संजना सिंह, जिनकी एंट्री ने दतिया उपचुनाव हुआ रोचक 
कौन हैं संजना सिंह, जिनकी एंट्री ने दतिया उपचुनाव हुआ रोचक 
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Datia By Election Sanjana Singh Transgender Candidate: मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव अब एक बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय मोड़ पर पहुंच चुका है. इस चुनावी समर में अब तक मुकाबला मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा था, लेकिन अब मैदान में एक ऐसे चेहरे की एंट्री हुई है जिसने दोनों ही प्रमुख दलों के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से उलझा दिया है. किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर और मध्य प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी रह चुकीं संजना सिंह ने चुनावी रण में उतरने का बड़ा फैसला किया है. वे भारतीय गणवार्ता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं कौन हैं संजना सिंह जिन्होंने दतिया उपचुनाव को और रोचक बना दिया है.

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पहले जानिए कौन हैं संजना सिंह?

मूल रूप से भोपाल की रहने वाली संजना सिंह का अब तक का जीवन सफर बेहद प्रेरणादायी और संघर्षों से भरा रहा है. वह मध्य प्रदेश की पहली ऐसी ट्रांसजेंडर हैं जिन्होंने सरकारी सेवा में कदम रखा था. संजना ने राज्य के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी थीं. इसके अलावा, सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान के कारण उन्हें 'स्वच्छ भारत मिशन' और 'राज्य निर्वाचन आयोग' की स्टेट आइकॉन के रूप में भी नियुक्त किया गया था.

करीब दो साल पहले, उन्होंने प्रशासनिक सुरक्षा को त्यागते हुए सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया. उनका मानना था कि एक सरकारी पद उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा तो दे सकता है, लेकिन समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गों की बुलंद आवाज बनने और नीतिगत स्तर पर बड़ा बदलाव लाने के लिए सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में उतरना बेहद जरूरी है. इसके बाद वे किन्नर अखाड़े से जुड़ीं, जहां उन्हें महामंडलेश्वर की सम्मानित उपाधि से नवाजा गया.

राजनीति में क्यों की एंट्री?

अपने चुनावी अभियान का आगाज करते हुए संजना सिंह ने कहा कि मां पीतांबरा की असीम कृपा से ही उन्हें दतिया की पावन भूमि और यहां की जनता की सेवा करने का यह सौभाग्यशाली अवसर प्राप्त हुआ है. समाज में किन्नर वर्ग की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा समाज सदियों से उपेक्षित रहा है और उसने समाज से तिरस्कार, त्याग तथा भेदभाव के गहरे दंश को झेला है. धर्म के क्षेत्र में तो किन्नर समाज का आगाज प्रभावशाली तरीके से हो चुका है और कई धर्मगुरु उच्च पदों पर आसीन हैं, लेकिन व्यवस्था में व्यापक और वास्तविक सुधार के लिए अब राजनीति में भी किन्नरों का आना अत्यंत आवश्यक हो गया है.

उन्होंने पूर्ववर्ती उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की राजनीति में पहले भी शबनम मौसी और सागर से मेयर रहीं कमला बुआ जैसे चेहरे आए, जिन्होंने बेहद ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाई और उन पर कभी भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं लगा. संजना ने साफ किया कि किन्नर समाज अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाना जानता है. उन्होंने दावा किया कि वे दतिया की जनता के बीच एक भयमुक्त वातावरण तैयार करने की प्राथमिकता के साथ आई हैं, ताकि हर नागरिक बिना किसी दबाव के स्वतंत्र जी सके. इस अभियान में उनके समर्थन के लिए देशभर से किन्नर अखाड़ों के संत, महामंडलेश्वर और उस्ताद दतिया पहुंचने वाले हैं.

दतिया का चुनावी समीकरण हुआ बेहद रोचक

संजना सिंह की इस धमाकेदार एंट्री ने दतिया के राजनीतिक दिग्गजों की चिंता बढ़ा दी है. इस सीट पर एक तरफ भारतीय जनता पार्टी की ओर से आशुतोष तिवारी मैदान में डटे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर दांव खेला है. वहीं, आजाद समाज पार्टी की तरफ से दामोदर यादव भी ताल ठोक रहे हैं. अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दतिया के मतदाता पारंपरिक राजनीतिक दलों के अनुभवी दिग्गजों पर ही अपना भरोसा बनाए रखते हैं या फिर बदलाव और सामाजिक स्वीकार्यता का झंडा बुलंद करने वाली महामंडलेश्वर संजना सिंह को अपना जनसमर्थन सौंपते हैं.

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