आदिवासियों के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर 'शिवराज' ने किसको दे दी चेतावनी ?

गौरव जगताप

• 01:10 PM • 12 Oct 2026

MP News: सीहोर के कोसमी गांव में बुलडोजर कार्रवाई पर शिवराज सिंह चौहान अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे. आदिवासी परिवारों को घर दिलाने का भरोसा, कांग्रेस ने मोहन सरकार को घेरा.

Shivraj Singh Chouhan Meets Tribal Families in Kosmi Village
कौसमी गांव में बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात करते शिवराज सिंह चौहान।
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मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में वन विभाग की बुलडोजर कार्रवाई ने प्रदेश की सियासत गरमा दी है. आदिवासी परिवारों के घरों और फसलों को नुकसान पहुंचने से नाराज केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए.  शिवराज के इस रुख ने बीजेपी सरकार के भीतर टकराव की चर्चाओं को हवा दे दी है. वहीं, कांग्रेस ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर निशाना साधा है. 

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शिवराज को मौके पर नहीं मिले अधिकारी तो भड़के  


कोसमी गांव में हुई कार्रवाई का निरीक्षण करने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान उस समय नाराज हो गए, जब मौके पर वन विभाग और जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं मिला. केंद्रीय मंत्री ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और घटनास्थल से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी. शिवराज ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी फोन पर चर्चा कर स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री मोहन यादव से व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग करेंगे.

शिवराज ने दिया उजड़े परिवारों को घर भरोसा

शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के आशियाने उजड़े हैं, उनके लिए नए घर बनवाए जाएंगे. जब तक स्थायी आवास की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने का इंतजाम किया जाएगा. कोसमी गांव में बरेला समुदाय के कई परिवार लंबे समय से रह रहे हैं. कार्रवाई के दौरान मकानों को तोड़े जाने और फसलों के नष्ट होने से प्रभावित परिवारों के सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. 


एक साल पहले भी शिवराज ने दिए थे निर्देश

कोसमी गांव शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है. जानकारी के मुताबिक, करीब एक साल पहले शिवराज ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से चर्चा कर आदिवासियों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे. उनकी शिकायत के बाद सीहोर के तत्कालीन डीएफओ मगन सिंह डाबर को भी पद से हटाया गया था. इसके बावजूद रविवार को वन विकास निगम की ओर से कार्रवाई की गई। घर नहीं तोड़ने के निर्देशों से जुड़ा शिवराज का बयान वर्ष 2025 का बताया जा रहा है. ऐसे में पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं. 

बीजेपी के भीतर टकराव की कीमत चुका रहे आदिवासी- कांग्रेस

पूरे  मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है.  मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान के पहले से रोकने के निर्देश के बावजूद मोहन यादव सरकार ने कार्रवाई की.  उन्होंने इसे भाजपा के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच टकराव का मामला बताते हुए कहा कि इसकी कीमत गरीब आदिवासी परिवारों को नहीं चुकानी चाहिए. पटवारी ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी अधिकारों की लड़ाई जमीन पर लड़ेगी और मोहन सरकार को इस कार्रवाई का जवाब देना होगा. वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच आपसी खींचतान का आरोप लगाया.  उन्होंने कहा कि सत्ता के भीतर टकराव के कारण गरीब आदिवासी परिवारों के घर उजड़ रहे हैं और उनकी फसलें नष्ट हो रही हैं. सिंघार ने सवाल उठाया कि आखिर आदिवासियों का कसूर क्या है और सत्ता की खींचतान की सजा गरीब परिवार क्यों भुगतें ? उन्होंने सरकार से प्रभावित परिवारों को न्याय और सुरक्षा देने की मांग की. 

वन विभाग ने क्या दी कार्रवाई की वजह ?

दूसरी ओर, वन विभाग का कहना है कि कार्रवाई सीहोर के वन कक्ष क्रमांक 426 में की गई है. विभाग के मुताबिक, यहां वर्ष 2021 के प्लांटेशन को नुकसान पहुंचाकर अवैध कब्जे किए गए थे. विभाग का यह भी दावा है कि संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे. हालांकि, वन विभाग की इस दलील के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का विरोध और प्रभावित परिवारों को घर दिलाने का ऐलान मामले को और संवेदनशील बना रहा है. फिलहाल कोसमी गांव की कार्रवाई ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर वन विभाग इसे अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों के साथ खड़े होकर अपनी ही सरकार से जवाब मांग रहे हैं.  अब सबकी नजर मुख्यमंत्री मोहन यादव के रुख और प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर है. 

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