टॉयलेट में बैठकर पढ़ रहे 22 बच्चे, जर्जर स्कूल भवन ने बढ़ाई मुश्किलें; MP के धार का VIDEO वायरल

न्यूज तक डेस्क

• 03:38 PM • 12 Sep 2026

धार के टाणा गांव में जर्जर स्कूल भवन के कारण 22 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है. बच्चे कभी मंदिर तो कभी बालिका शौचालय में बैठकर पढ़ने को मजबूर हुए. शौचालय में बच्चों की तस्वीर वायरल होने पर शिक्षा विभाग के अधिकारी पहुंचे. नया स्कूल भवन निर्माणाधीन है. मामले की विभागीय जांच जारी है.

Google CTA

मध्य प्रदेश के धार जिले से सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है. कुक्षी विधानसभा क्षेत्र के टाणा गांव में 22 बच्चों की पढ़ाई के लिए कभी मंदिर तो कभी स्कूल परिसर में बने बालिका शौचालय का सहारा लिया जा रहा है. बच्चों के शौचालय में बैठकर पढ़ने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे.

Read more!

जर्जर हो चुका है स्कूल का पुराना भवन

टाणा गांव का सरकारी प्राथमिक स्कूल लंबे समय से भवन की समस्या से जूझ रहा है. स्कूल की पुरानी इमारत इतनी खराब स्थिति में पहुंच गई थी कि उसमें बच्चों को बैठाना सुरक्षित नहीं माना गया. बताया गया कि भवन को हटाने का आदेश करीब दो साल पहले ही जारी हो चुका था. नया भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक जगह तलाशनी पड़ी. फिलहाल मंदिर के हॉल में बच्चों की कक्षा लगाई जा रही है.

कभी मंदिर तो कभी शौचालय में बैठाए गए बच्चे

ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल में बच्चों को बैठाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण परेशानी बनी हुई है. करीब छह महीने पहले स्कूल परिसर में नया बालिका शौचालय बनाया गया था. फिलहाल उसका नियमित इस्तेमाल नहीं हो रहा था. इसी वजह से कुछ समय के लिए बच्चों को वहां बैठाया गया.

ग्रामीण राधेश्याम मुजाल्दा ने बताया कि गांव में स्कूल के लिए फिलहाल उचित भवन नहीं है. उनका कहना है कि अगर शौचालय का नियमित इस्तेमाल शुरू हो जाता तो बच्चों के बैठने की समस्या और बढ़ जाती.

वीडियो सामने आया तो मौके पर पहुंचे अधिकारी

बच्चों के शौचालय में बैठने की तस्वीर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ. ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हीरालाल निगवाल और बीआरसी विजय कुमार शुक्ला टाणा गांव पहुंचे. अधिकारियों ने मौके की स्थिति देखी और पंचनामा तैयार कराया. मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने की बात कही गई है. विभागीय स्तर पर अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चों को शौचालय में क्यों बैठाया गया और उस समय वहां वास्तव में क्या स्थिति थी.

अधिकारी बोले- बच्चों को शौचालय में बैठाना गलत

बीईओ हीरालाल निगवाल ने बताया कि जर्जर स्कूल भवन को हटाने के लिए पहले ही आदेश जारी किया जा चुका था. बीआरसी के इंजीनियर ने भवन की स्थिति का आकलन कर जिला कार्यालय को रिपोर्ट भेजी थी. इसके बाद भवन को डिस्मेंटल करने के निर्देश दिए गए थे.अधिकारी के अनुसार, स्कूल के संस्था प्रमुख और शिक्षक ने बताया कि जिस दिन बच्चों की तस्वीर सामने आई, उस दिन तेज धूप थी. मंदिर के हॉल में धूप आने के कारण 7-8 बच्चों को कुछ समय के लिए शौचालय में बैठाया गया था. हालांकि, बीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों को इस तरह शौचालय में बैठाकर पढ़ाना सही नहीं है.

नया स्कूल भवन बन रहा, लेकिन काम अभी अधूरा

बीआरसी विजय कुमार शुक्ला के मुताबिक, जब वह मौके पर पहुंचे तो बच्चों की कक्षा मंदिर के हॉल में चल रही थी. उन्होंने बताया कि पुराने भवन को हटाने के बाद नए प्राथमिक स्कूल भवन का निर्माण कराया जा रहा है. नए भवन का काम अभी पूरा नहीं हुआ है. विभाग का कहना है कि निर्माण पूरा होते ही बच्चों को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा. तब तक पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है.

बच्चों ने बताई फोटो खींचने की पूरी बात

बीआरसी ने बच्चों से भी जानकारी ली. बच्चों के मुताबिक, एक जीप स्कूल के पास आई थी. उसमें दो लोग सवार थे. बच्चों ने बताया कि उन लोगों ने उन्हें शौचालय में बैठाया और दरवाजा खोलकर फोटो खींची. इसके बाद दोनों वहां से चले गए. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बच्चों से पूछताछ में यही जानकारी सामने आई है. पूरे मामले की जांच की जा रही है.

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

धार के टाणा गांव में सामने आए इस मामले ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ पुराना भवन जर्जर होने के कारण बच्चों के लिए खतरा था, वहीं दूसरी तरफ नया भवन अब तक तैयार नहीं हो पाया है.

फिलहाल बच्चों की पढ़ाई मंदिर और अन्य वैकल्पिक व्यवस्था में जारी है. शिक्षा विभाग ने मामले का पंचनामा तैयार कर लिया है. जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी. नए स्कूल भवन का काम पूरा होने के बाद बच्चों को स्थायी जगह मिलने की उम्मीद है.