मंत्री तोमर की सीट पर दोबारा वोटिंग कराने पर क्यों अड़े कांग्रेस प्रत्याशी, दे डाली हाईकोर्ट की धमकी!

एमपी तक

22 Nov 2023 (अपडेटेड: Nov 23 2023 12:29 PM)

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की सीट Dimani में कांग्रेस प्रत्याशी रवींद्र तोमर वोटिंग के बाद पहली बार सामने आए और उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी नरेंद्र तोमर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बड़ी डिमांड करते हुए दिमनी विधानसभा का चुनाव रद्द करने की मांग की है.

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MP Election 2023: केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की सीट Dimani में कांग्रेस प्रत्याशी रवींद्र तोमर वोटिंग के बाद पहली बार सामने आए और उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी नरेंद्र तोमर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बड़ी डिमांड करते हुए दिमनी विधानसभा का चुनाव रद्द करने की मांग की है. उन्होंने बोला कि कोई नहीं साबित कर सकता है कि मैं बेइमान हूं.

रवींद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद पर लगे सभी आरोपों की सफाई दी. रविंद्र सिंह तोमर ने बीजेपी प्रत्याशी नरेंद्र सिंह तोमर के साथ मिलीभगत कर ली थी. इसलिए वे वोटिंग के दिन इतने हंगामे के बाद भी न तो वे मौके पर दिखाई दिए और न ही उनके कार्यकर्ता दिखे. रविंद्र सिंह तोमर पर आरोप लगे कि पोलिंग बूथ पर उनके कार्यकर्ता मौके से ही गायब थे, जबकि नाबालिग बच्चों काे लाकर भी बीजेपी के पक्ष में वोटिंग कराई जा रही थी. रविंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ये सभी आरोप गलत हैं. उनके कार्यकर्ता हर पोलिंग बूथ पर मौजूद थे.

ये अफवाहें हैं कि मैंने सरेंडर कर दिया: तोमर

रविंद्र तोमर ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और नरेंद्र सिंह तोमर और उनके लोग ही ये अफवाह फैला रहे हैं कि रविंद्र बीजेपी प्रत्याशी के आगे सरेंडर हो गया. जिसको भी संदेह हो मेरा मोबाइल रख ले और कॉल डिटेल निकलवा ले, खुद जांच कर लें कि मैं किस से बात कर रहा था और किस से नहीं. हंगामे की हर खबर वोटिंग के दिन विवेक तन्खा और कमलनाथ को दी गई थी.

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अगर री-पोल नहीं हुआ तो हाईकोर्ट जाऊंगा- कांग्रेस प्रत्याशी

रविंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकतंत्र की हत्या करके जिस तरह से दिमनी का चुनाव कराया है, वैसा कभी नहीं हुआ. ये लोकतंत्र नहीं है. दिमनी के चुनाव में भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या की है. भाजपा ने अपराधियों को सहारा देकर कमजोर और दलित वर्ग के लोगों को वोट डालने से रोका. इस पूरे मामले में कलेक्टर, एसपी और निर्वाचन आयोग मूकदर्शक बनकर देखते रहे. 97 पोलिंग बूथ को संवदेनशील बोलकर सुरक्षा मांगी थी लेकिन नहीं मिली और एक सिपाही के भरोसे ये पोलिंग बूथ छोड़ दिए गए. अब अगर यहां पर री-पोल नहीं हुआ तो हम हाई कोर्ट जाएंगे.