'तुमसे मिलने को दिल करता है रे बाबा' दतिया उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने का ये अंदाज हो रहा Viral

न्यूज तक डेस्क

• 01:26 PM • 28 Jul 2026

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दतिया के बसई में बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के समर्थन में जनसभा की, जहां डकैत-मुक्त मध्य प्रदेश का जिक्र करते हुए जनता से मिले स्नेह का जवाब अपने 'मामा' वाले अनोखे अंदाज़ में दिया.

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मध्य प्रदेश की राजनीति में अगर किसी नेता का जनता से सीधा और आत्मीय जुड़ाव देखने को मिलता है तो वह हैं पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान. राजनीति की बिसात पर नेता अक्सर बयानों के तीर चलाते नजर आते हैं लेकिन रविवार को जब शिवराज दतिया पहुंचे तो चुनावी मंच पर सियासत कम और दिलों का रिश्ता ज्यादा नजर आया. मौका था बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में आयोजित चुनावी जनसभा का, जहां 'मामा' के नाम से मशहूर शिवराज सिंह चौहान को देखते ही जनता का उत्साह चरम पर पहुंच गया.

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दतिया के बसई में जैसे ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच संभाला, वहां मौजूद लोगों में गजब की ऊर्जा दिखाई दी. भाषण के बीच ही भीड़ से एक समर्थक ने ज़ोर से चिल्लाकर कहा- "आई लव यू, मामा!" इस अचानक मिले प्यार पर शिवराज भी खुद को रोक न सके. उन्होंने मुस्कुराते हुए तुरंत जवाब दिया- "आई लव यू टू... बहुत दिनों से आपकी याद आ रही थी. तुमसे मिलने को दिल करता है रे बाबा!"

इतना ही नहीं अपने चिर-परिचित अंदाज में शिवराज ने जनता का अभिवादन करते हुए मंच से ही फ्लाइंग किस भी दिया. उनके इस दिलकश और अनौपचारिक अंदाज ने पूरी जनसभा का माहौल ही बदल दिया. तालियों की गड़गड़ाहट और नारों से पूरा बसई इलाका गूंज उठा.

बसई मेरे दिल में बसता है

जनता से सीधे संवाद के इस दौर के बाद शिवराज ने बसई के लोगों के प्रति अपना विशेष स्नेह जाहिर किया. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि बसई केवल एक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह सीधे उनके दिल से जुड़ा हुआ है.

उन्होंने कहा, "बसई मेरे दिल में बसता है और यहां के लोगों का यह निस्वार्थ प्रेम ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है." शिवराज ने अपने संबोधन में यह साफ किया कि भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीति कोई कुर्सी हासिल करने या सत्ता का मलाई खाने का जरिया नहीं है. पार्टी के लिए राजनीति का असली अर्थ केवल और केवल जनता की निस्वार्थ सेवा करना और राष्ट्र निर्माण के बड़े संकल्प को पूरा करना है.

ग्वालियर-चंबल से डकैतों के सफाए की कहानी

चुनावी सभा में केंद्रीय मंत्री ने ग्वालियर-चंबल अंचल के पुराने दिनों को याद करते हुए प्रदेश के अतीत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि साल 2003 से पहले ग्वालियर और चंबल की पहचान डकैतों के आतंक और खौफ से हुआ करती थी. उस दौर में अपहरण, रंगदारी, हत्याएं और डर का साया यहां के आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था.

शाम ढलते ही लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर थे. शिवराज ने याद दिलाया कि जब मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी, तब उन्होंने प्रदेश को अपराधमुक्त करने का कड़ा संकल्प लिया था. उन्होंने सख्त लहजे में फैसला किया था- "या तो मध्य प्रदेश की धरती पर डाकू रहेंगे या फिर शिवराज सिंह चौहान... दोनों का एक साथ रहना नामुमकिन है."

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