पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास संदिग्ध हालत में घूम रहे 25 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है. इस पूरी कार्रवाई का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें गांववालों और BSF के जवानों की मौजूदगी में पकड़े गए लोगों को एक लाइन में खड़ा कर पूछताछ करते हुए देखा जा सकता है. सुरक्षा बल उनकी पहचान, दस्तावेज और भारत में आने से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं.मामला कुशमंडी थाना क्षेत्र के लोहागंज-पंचनगर इलाके का बताया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, 6 सितंबर की सुबह करीब 5 बजे कांकिपारा कदमतला क्रॉसिंग के पास स्थानीय लोगों ने बैग लेकर घूम रहे करीब 26 लोगों के एक समूह को देखा. समूह की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर ग्रामीणों ने उनकी पहचान और वहां मौजूद होने की वजह जानने की कोशिश की.
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पूछताछ से बचने के लिए धान के खेत में भागे
स्थानीय लोगों के सवाल करने पर समूह के कुछ लोग वहां से भागने लगे और पंचनगर की तरफ चले गए. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर पास के धान के खेत में छिपने की कोशिश की. ग्रामीणों ने उनका पीछा किया और समूह को घेर लिया. बाद में सभी लोगों को पंचनगर के पास स्थित आम के बाग वाले इलाके में लाया गया और BSF तथा पुलिस को इसकी सूचना दी गई. सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बल और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की.
25 ने खुद को बांग्लादेश के ठाकुरगांव का बताया
शुरुआती पूछताछ में 25 लोगों ने खुद को बांग्लादेश के ठाकुरगांव जिले का निवासी बताया है. वहीं, समूह में शामिल एक व्यक्ति भारतीय नागरिक बताया जा रहा है. अधिकारियों को संदेह है कि यह व्यक्ति कथित तौर पर समूह की सीमा पार आवाजाही में मदद करने वाला बिचौलिया हो सकता है. रिपोर्टों के मुताबिक, उसकी पहचान गंगारामपुर के काजलतोर इलाके के रहने वाले राजू रॉय के रूप में हुई है. हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच अभी जारी है.
कुछ लोगों के पास आधार कार्ड और बांग्लादेशी दस्तावेज
मामले में सबसे अहम पहलू इन लोगों के पास मिले पहचान पत्र हैं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कुछ लोगों के पास भारतीय आधार कार्ड के साथ-साथ बांग्लादेशी पहचान से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं. अब सुरक्षा एजेंसियां इन दस्तावेजों की जांच कर रही हैं कि वे वास्तविक हैं या फर्जी और अगर फर्जी हैं तो उन्हें किसने तैयार कराया. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन लोगों ने भारत में प्रवेश कैसे किया और भारत के अलग-अलग हिस्सों में रहने के दौरान वे किन लोगों के संपर्क में थे.
कश्मीर में दो साल रहने का दावा
पूछताछ के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर बताया कि वे पिछले करीब दो वर्षों से कश्मीर में रह रहे थे. अगर यह जानकारी जांच में सही साबित होती है, तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक और बड़ा सवाल खड़ा होगा कि बांग्लादेश से आने के बाद ये लोग कश्मीर कैसे पहुंचे और वहां उन्होंने किस तरह का काम किया. अब जांच एजेंसियां उनके कश्मीर में रहने, वहां उनके संपर्कों और फिर पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके तक पहुंचने की पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं.
हर व्यक्ति से ₹12 हजार लेने का आरोप
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पकड़े गए 1 भारतीय नागरिक पर आरोप है कि वह इन लोगों की सीमा पार आवाजाही में मदद कर रहा था. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कथित तौर पर प्रत्येक व्यक्ति से करीब 12 हजार रुपये लिए जा रहे थे.हालांकि, यह आरोप जांच का हिस्सा हैं और इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी. सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित बिचौलिया अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है.
वीडियो में लाइन में खड़े नजर आए संदिग्ध
सामने आए वीडियो में पकड़े गए लोगों को एक लाइन में खड़ा देखा जा सकता है. BSF के अधिकारी उनके सामने खड़े होकर उनसे सवाल-जवाब करते नजर आ रहे हैं. आसपास ग्रामीण भी मौजूद हैं. सुरक्षा बल इन लोगों की पहचान, उनके दस्तावेज और भारत में उनके आने की वजह से संबंधित जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है. बताया जा रहा है कि हिरासत में लिए गए लोगों को BSF की गैंग्लार बॉर्डर आउटपोस्ट पर रखा गया है. वहां उनके बयान रिकॉर्ड किए जा रहे हैं. इसके बाद BSF की 91वीं बटालियन के अधिकारियों द्वारा उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए कुशमंडी पुलिस स्टेशन को सौंपे जाने की प्रक्रिया की जा रही है.
अब जांच के घेरे में कथित नेटवर्क
इस पूरे मामले में अब जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल हैं. अगर ये लोग वास्तव में बांग्लादेश से आए थे तो उन्होंने भारत में प्रवेश कैसे किया? उनके पास भारतीय आधार कार्ड कैसे पहुंचे? कश्मीर में करीब दो साल रहने का उनका दावा कितना सही है? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सीमा पार आवाजाही के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है?
फिलहाल BSF और पुलिस मामले की जांच कर रही है. पकड़े गए लोगों के दस्तावेजों और बयानों की पुष्टि की जा रही है. जांच में सामने आने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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