भारतीय नौसेना अपनी समुद्री सुरक्षा और युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है. नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने नई दिल्ली में आयोजित ‘स्वावलंबन 2026’ की प्रेस वार्ता में बताया कि 42 नौसैनिक प्लेटफॉर्म पहले से ऑर्डर पर हैं. इसके अतिरिक्त 78 अन्य प्लेटफॉर्म और 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट के लिए लगभग 2.41 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को आवश्यकता की स्वीकृति मिल चुकी है. इन परियोजनाओं की खरीद प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है.
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स्वावलंबन 2026: आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक पर जोर
भारतीय नौसेना का प्रमुख नवाचार एवं स्वदेशीकरण कार्यक्रम ‘स्वावलंबन 2026’ 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जाना है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय उद्योग, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, शिक्षण संस्थानों और रक्षा बलों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि स्वदेशी तकनीकों को वास्तविक सैन्य क्षमताओं में बदला जा सके.
2.41 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं में क्या-क्या शामिल है?
नौसेना के आधुनिकीकरण से जुड़ी घोषित योजना के तीन प्रमुख आंकड़े हैं. 42 प्लेटफॉर्म पहले से ऑर्डर पर, 78 अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट. यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: 42 प्लेटफॉर्म पहले से ऑर्डर पर हैं, जबकि 78 प्लेटफॉर्म और 120 इंटरसेप्टर क्राफ्ट को AoN मिला है. AoN का अर्थ खरीद की आवश्यकता को सैद्धांतिक मंजूरी मिलना है; इसे अंतिम खरीद अनुबंध या सभी जहाजों के निर्माण की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए.
120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट से तटीय सुरक्षा को मजबूती
फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट छोटी और तेज नौकाएं होती हैं, जिनका इस्तेमाल तटीय निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों पर प्रतिक्रिया और समुद्री सुरक्षा अभियानों में किया जा सकता है. भारत की लंबी तटरेखा, द्वीपीय क्षेत्रों और महत्वपूर्ण समुद्री प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिहाज से ऐसे प्लेटफॉर्म उपयोगी हैं. हालांकि, इन 120 क्राफ्ट की सटीक तकनीकी विशेषताओं, हथियारों और परिचालन क्षमताओं के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी के बिना किसी खास गति या उपकरण को निश्चित रूप से इनका हिस्सा बताना उचित नहीं होगा.
चार लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक के लिए RFP जारी
भारतीय नौसेना की योजना में चार लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक की खरीद भी एक अहम कदम है. वाइस एडमिरल अजय कोचर के अनुसार, इन जहाजों के लिए चुने गए शिपयार्डों को प्रस्ताव अनुरोध जारी किया गया है. नेक्स्ट-जेनरेशन फ्रिगेट कार्यक्रम के लिए भी RFP जारी की जा चुकी है और संबंधित प्रस्तावों पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है.
स्वदेशी डीजल इंजन और 24-28 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन
नौसेना के आधुनिकीकरण में स्वदेशी प्रणोदन तकनीक यानी जहाजों को चलाने वाली प्रणाली पर भी जोर दिया जा रहा है. वाइस एडमिरल कोचर ने बताया कि स्वदेशी डीजल इंजन के विकास के लिए ‘मेक’ श्रेणी के तहत कार्यक्रम शुरू किए गए हैं. साथ ही, 24-28 मेगावाट क्षमता वाली मरीन गैस टर्बाइन और उससे संबंधित गैस टर्बाइन जनरेटर के विकास के लिए भी AoN प्राप्त हुआ है. यह पहल भविष्य में महत्वपूर्ण नौसैनिक प्रणालियों के स्वदेशी विकास और रखरखाव क्षमता को मजबूत करने की दिशा में कदम है.
AI, ड्रोन और क्वांटम तकनीक पर नौसेना का फोकस
नौसेना अब पारंपरिक युद्धपोतों के साथ आधुनिक तकनीकों को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बना रही है. वाइस एडमिरल कोचर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, उन्नत निगरानी प्रणालियों, उन्नत प्रणोदन और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में काम का उल्लेख किया. इन तकनीकों का उद्देश्य समुद्री परिस्थितियों की बेहतर निगरानी, तेजी से निर्णय लेने और विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्मों के बीच सुरक्षित एवं प्रभावी समन्वय स्थापित करना है.
‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के दावे पर क्या ध्यान रखें?
प्रेस वार्ता से संबंधित उपलब्ध रिपोर्टों में नौसेना के आधुनिकीकरण, नई तकनीकों और खरीद परियोजनाओं का उल्लेख है. हालांकि, 1.7 अरब डॉलर के ऊर्जा कार्गो को ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकालने के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध संदर्भों में नहीं मिली. इसलिए नौसेना या रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति, ऑपरेशन की तारीख, जहाजों की पहचान और कार्गो संबंधी जानकारी की पुष्टि किए बिना इस घटना को स्थापित तथ्य के रूप में प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए.
भारतीय नौसेना के लिए आगे क्या मायने हैं?
42 प्लेटफॉर्म के ऑर्डर, 78 अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट से जुड़ी मंजूरियां, चार LPD की खरीद प्रक्रिया तथा स्वदेशी इंजन तकनीक पर काम.ये सभी भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की व्यापक दिशा को दर्शाते हैं. इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं की समयसीमा, लागत, स्वदेशी तकनीक की सफलता और प्लेटफॉर्मों के नौसेना में शामिल होने पर निर्भर करेगा. इसलिए भारत की समुद्री शक्ति में संभावित वृद्धि का आकलन करते समय घोषणाओं के साथ-साथ उनके कार्यान्वयन की प्रगति पर भी नजर रखना जरूरी है.
भारतीय नौसेना का घोषित आधुनिकीकरण कार्यक्रम समुद्री सुरक्षा, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है. हालांकि, ₹2.41 लाख करोड़ की परियोजनाओं को पूरी तरह तैयार सैन्य क्षमता के रूप में देखना जल्दबाजी होगी. खरीद प्रक्रिया, निर्माण, परीक्षण और नौसेना में तैनाती के बाद ही इन योजनाओं की वास्तविक परिचालन क्षमता स्पष्ट होगी.
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