आतंकवाद की फैक्टरी चलाकर खुद उसी आग में झुलस रहा पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी लाचारी और बौखलाहट खुलेआम बयां करने लगा है. ताजा मामला लंदन का है, जहां पाकिस्तान की परमाणु निगरानी संस्था 'नेशनल कमांड अथॉरिटी' के वरिष्ठ सलाहकार और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल मजहर जमील ने एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक के सेमिनार में भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला है. पाकिस्तानी अधिकारी ने लंदन में स्वीकार किया कि भारत की 'डोभाल डॉक्ट्रिन' और मजबूत होती परमाणु ताकत ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है.
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लंदन के मंच पर पाकिस्तान का रोना
लंदन के 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज' में बोलते हुए पाकिस्तानी सलाहकार मजहर जमील ने दावा किया कि भारत अब रक्षात्मक (Defensive) नहीं, बल्कि आक्रामक रक्षा (Offensive Defense) की नीति पर काम कर रहा है. उन्होंने बेबुनियाद आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान के भीतर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे विद्रोही संगठनों को भारत की तरफ से सामरिक और आर्थिक मदद मिल रही है. अपनी इन नाकामियों को छुपाने के लिए उन्होंने 1971 के बांग्लादेश और श्रीलंका के पुराने संदर्भों को भी बीच में घसीटने की कोशिश की है.
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क्या है 'डोभाल डॉक्ट्रिन'?
पाकिस्तानी हुक्मरानों की घबराहट की मुख्य वजह भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की सामरिक सोच यानी 'डोभाल डॉक्ट्रिन' है. इस सिद्धांत का मूल मंत्र 'डिफेंसिव ऑफेंस' (Defensive Offense) है. इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि कोई पड़ोसी देश भारत के खिलाफ छद्म युद्ध या सीमा पार आतंकवाद का सहारा लेगा, तो भारत चुपचाप सीमा पर गोलियां नहीं गिनेगा, बल्कि दुश्मन के घर में घुसकर उसकी कमजोरियों पर सटीक प्रहार करेगा. सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान अच्छी तरह समझ चुका है कि भारत की रणनीति अब पूरी तरह बदल चुकी है.
परमाणु क्षमता पर भी रोया पाकिस्तान
पाकिस्तानी सलाहकार ने स्वीडिश थिंक टैंक 'सिपरी' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी दावा किया कि भारत तेजी से 'फर्स्ट स्ट्राइक' की क्षमता विकसित कर रहा है. उन्होंने कहा कि भारत ने परमाणु पनडुब्बियों से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और न्यूक्लियर वॉरहेड्स को इंटीग्रेट कर लिया है, जिससे समुद्र के भीतर से भी तत्काल जवाबी हमला करने की भारत की ताकत कई गुना बढ़ गई है. इसके चलते पाकिस्तान का तथाकथित 'टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन' का ब्लैकमेल अब पूरी तरह बेअसर हो चुका है.
वहीं, संयुक्त राष्ट्र में भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है और 'नो फर्स्ट यूज़' (No First Use) की अपनी नीति पर पूरी तरह अडिग है. भारत केवल आत्मरक्षा और दुश्मन के परमाणु हमलों के खिलाफ विनाशकारी जवाबी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है.
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पाकिस्तान क्यों कर रहा है ऐसा प्रोपेगेंडा?
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य तंत्र को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर ऐसा रोना क्यों रोना पड़ रहा है, इसके तीन मुख्य कारण हैं-
1- घरेलू मोर्चे पर विफलता: पाकिस्तान सेना टीटीपी और बलूच विद्रोहियों के हमलों को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है.
2- आर्थिक बदहाली: देश में महंगाई और भूखमरी चरम पर है, जिससे जनता का ध्यान भटकाने के लिए हमेशा 'भारतीय खतरे' का हौवा खड़ा किया जाता है.
3- वैश्विक अलगाव: दुनिया अब आतंकवाद पर पाकिस्तान के झूठे बयानों को गंभीरता से नहीं लेती, और एफएटीएफ से लेकर यूएन तक उसके आतंकी नेटवर्क की पोल खुल चुकी है.
लंदन में पाकिस्तान का यह बयान साफ दिखाता है कि आज का नया भारत सामरिक और रणनीतिक रूप से कितना मजबूत हो चुका है. परमाणु हथियारों की गीदड़ भभकियां देकर भारत को दबाने का पाकिस्तान का पुराना दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है.
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