होर्मुज संकट के बीच शारजाह का भारत से 3 अरब डॉलर निवेश जुटाने का लक्ष्य

आयुष मिश्रा

• 05:26 PM • 09 Oct 2026

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच शारजाह ने 2026-27 में भारत से 3 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा है. जानें खोरफक्कन पोर्ट विस्तार, सप्लाई चेन सुरक्षा और भारतीय कंपनियों के लिए संभावित अवसर.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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होर्मुज संकट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित

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शारजाह का भारत से 3 अरब डॉलर निवेश लक्ष्य

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खोरफक्कन पोर्ट की क्षमता बढ़ाने की तैयारी

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भारतीय कंपनियों को लॉजिस्टिक्स और व्यापार में अवसर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में क्षेत्रीय तनाव और जहाजों पर हमलों के कारण वाणिज्यिक यातायात बहुत कम हो गया है। शिपिंग डेटा के अनुसार दैनिक पारगमन कई दिनों में एकल अंकों में दर्ज हो रहा है, जबकि सामान्य समय में रोजाना 80 से अधिक जहाज गुजरते थे। एआईएस-दृश्यमान यातायात सामान्य का करीब 10 प्रतिशत रह गया है। समुद्री बीमा प्रीमियम में तेज वृद्धि हुई है और कई कंपनियों ने मार्ग रद्द कर दिए हैं या वैकल्पिक रास्ते अपनाए हैं। कई जहाज ट्रांसपोंडर बंद करके यात्रा कर रहे हैं। यह स्थिति खाड़ी देशों और भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का बड़ा हिस्सा तेल आयात और कई निर्यात इसी मार्ग से जुड़े रहे हैं।

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शारजाह का भारत को 3 अरब डॉलर का निवेश प्रस्ताव

शारजाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी भारत से 2026 और 2027 में कुल 3 अरब डॉलर का निवेश जुटाने का लक्ष्य रख रही है। इसमें इस वर्ष करीब 1.5 अरब डॉलर और अगले वर्ष समान राशि शामिल है। यह निवेश मुख्य रूप से खोरफक्कन पोर्ट के विस्तार और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं पर केंद्रित होगा। पोर्ट गल्फ ऑफ ओमान में स्थित है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर पड़ता है।

पोर्ट की रणनीतिक स्थिति

भारतीय बंदरगाहों से जहाज होर्मुज में प्रवेश किए बिना सीधे खोरफक्कन पहुंच सकते हैं। गल्फटेनर पोर्ट विस्तार पर करीब 2 अरब डॉलर लगा रहा है। वर्तमान क्षमता 3.5 मिलियन टीईयू से बढ़ाकर 5 मिलियन और फिर 10 मिलियन टीईयू से अधिक करने का लक्ष्य है। भारत-यूएई सीईपीए समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर पार कर चुका है। भारतीय कंपनियां फ्री ट्रेड जोन में वेयरहाउस और वितरण केंद्र बना सकती हैं।

क्षेत्रीय गेटवे बनने की संभावना

शारजाह अधिकारियों का कहना है कि खोरफक्कन क्षेत्रीय व्यापार का गेटवे बन सकता है और भारतीय कंपनियां इसे मध्य पूर्व बाजारों तक पहुंच के लिए इस्तेमाल करेंगी। खोरफक्कन को रेजिलिएंस पोर्ट माना जा रहा है जो संकट के समय भी संचालन जारी रख सकता है। यह जेबेल अली का विकल्प नहीं बल्कि बैकअप है।

भारतीय कंपनियों के संभावित लाभ

सप्लाई चेन सुरक्षा, बीमा लागत में बचत और मध्य पूर्व-उत्तरी अफ्रीका बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रमुख लाभ हो सकते हैं। कोई भी मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। गल्फ ऑफ ओमान क्षेत्र में भी अतीत में घटनाएं हुई हैं।

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