कौन हैं महमूद प्राचा? उन्होंने EC से क्या मांग लिया कि चुनाव आयोग ने रूल्स बदल दिए

रूपक प्रियदर्शी

• 09:58 AM • 24 Dec 2024

चुनाव आयोग ने सरकार के साथ मिलकर नया खेल करके नियम ही बदल दिया. चुनाव आयोग ने नया नियम बना दिया कि पोलिंग बूथों के सीसीटीवी फुटेज बाहर नहीं आ सकते.

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Mahmood Pracha: जब लोकसभा चुनाव में सीटें डबल नहीं हुईं थी, बीजेपी बहुमत से नहीं चूकी थी तब भी कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष को ईवीएम, चुनाव आयोग की नीयत और नीति पर शक था. लोकसभा चुनाव के बाद देश की राजनीति पलट गई तब भी आरोप अपनी जगह पर बने हुए हैं. महाराष्ट्र चुनाव के बाद नए सिरे से चुनाव आयोग से विपक्ष की लड़ाई शुरू हुई है लेकिन चुनाव आयोग विपक्ष के सवालों को लेकर कठोर था, कठोर है और आगे कठोर बने रहने का प्रण लिया है. सरकार पूरी शह दे रही है.

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कौन है महमूद प्राचा?

देश के जाने-माने वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता महमूद प्राचा वही सवाल उठाते हैं जो कांग्रेस या पूरा विपक्ष उठाता है. फिर भी 2024 के चुनाव में महमूद प्राचा ने लोकसभा चुनाव लड़ने की ठानी तो निर्दलीय नामांकन भरा. कहा कि जीतने या हारने के लिए नहीं, ईवीएम की गड़बड़ी के सबूत जुटाने के लिए चुनाव में उतरे. रामपुर में सपा की जीत हुई, प्राचा की. फिर भी चुनाव आयोग से लड़ाई जारी रखे हुए हैं. 

हरियाणा विधानसभा चुनाव में गड़बड़ी की शिकायत लेकर महमूद प्राचा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट गए थे. उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव की वीडियोग्राफी, सीसीटीवी कैमरा फुटेज, फॉर्म 17 सी की मांग की थी. 9 दिसंबर को हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि विडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज और वोटों से जुड़े दस्तावेजों की कॉपी वकील प्राचा को दे. चुनाव आयोग ने कोर्ट में ही विरोध कर दिया.

चुनाव आयोग ने बदले नियम

चुनाव आयोग ने सरकार के साथ मिलकर नया खेल करके नियम ही बदल दिया. चुनाव आयोग ने नया नियम बना दिया कि पोलिंग बूथों के सीसीटीवी फुटेज बाहर नहीं आ सकते. चुनाव आयोग की सिफारिश के आधार पर कानून मंत्रालय ने चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 93(2)(ए) में संशोधन कर दिया. नियम में नई लाइन जोड़ दी कि पेपर्स की लिस्ट में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स शामिल नहीं होंगे. इससे पब्लिक स्क्रूटनी के लिए चुनाव में लगे सीसीटीवी कैमरे, वेबकास्टिंग फुटेज, उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग बाहर नहीं आ सकते. जनता का कोई एक्सेस नहीं होगा. कोई दुरुपयोग भी नहीं कर सकेगा. 

उम्मीदवारों के लिए रास्ता खुला है लेकिन इसके लिए भी कड़ी शर्ते लागू होंगी. उम्मीदवार चाहे तो कोर्ट के जरिए पहले की तरह सीसीटीवी कैमरों जैसा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मांग सकता है. इसमें क्लॉज ये है कि उम्मीदवार को भी केवल उसके चुनाव क्षेत्र का रिकॉर्ड ही मिल सकता है. नया रूल जनता जनार्दन, राजनीतिक पार्टियों पर लागू होता है जिनको कुछ नहीं मिल सकता. नियम से महमूच प्राचा हरियाणा चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे. वो जनता की कैटेगरी में आते हैं इसलिए उन्हें दस्तावेज नहीं मिल सकता. इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स का तो सवाल ही नहीं उठता. 

EC ने नियम बदलने पर क्या कहा?

चुनाव आयोग ने दलील है कि सीसीटीवी फुटेज देने से वोटर्स की जिंदगी पर संकट आ सकता है. जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील, नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के लिए चैलेंज बन सकता है. महमूद प्राचा को कागजी दस्तावेज मिल सकते हैं लेकिन सीसीटीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स नहीं मिल सकते. इसकी दलील ये है कि सीसीटीवी फुटेज के साथ एआई के जरिए छेड़छाड़ हो सकती है. वैसे भी पोलिंग बूथ की सीसीटीवी कवरेज और वेबकास्टिंग नहीं की जाती है.

चुनावी दस्तावेजों के लिए के लिए चुनाव आयोग का पुराना रूल है.  सेक्शन 93(2) के तहत जानकारी जनता मांग सकती थी.  बशर्ते कोर्ट का आदेश हो. चुनाव आयोग ने कहा कि जिस नियम के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांगा जा रहा था उस नियम में इलेक्ट्रॉनिक डेटा को लेकर कोई स्पष्ट लाइन नहीं लिखी है. ऐसा इसलिए कि नियम जब बने तब पोलिंग बूथ पर सीसीटीवी कैमरों, वेबकास्टिंग और वीडियोग्राफी करने जैसा कोई सिस्टम नहीं था. 

'रूल्स मतलब रूल्स-' बोलकर चुनाव आयोग ने सीसीटीवी, वीडियो एलीमेंट देने से कन्नी काटकर नया घमासान छेड़ दिया है. कांग्रेस और अग्रेसिव हो गई है. जयराम रमेश ने एलान कर दिया है कि चुनाव आयोग ने रूल्स में जो चेंज किए हैं उसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे. 

चुनाव आयोग पारदर्शिता से इतना डरता क्यों है? सीपीएम का कहना है कि रुल बदलने से पहले राजनीतिक पार्टियों से कोई चर्चा नहीं की गई. केजरीवाल कह रहे हैं कि कुछ तो बड़ी गड़बड़ है. तृणमूल कांग्रेस के सांसद जवाहर सरकार ने जैसे ही हाईकोर्ट ने में दखल दिया तो नियम कैसे बदल दिए?