महाराष्ट्र के नासिक में अभी अशोक खरात मामले की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि पुणे से एक और शर्मनाक वाकया सामने आया है. खुद को भगवान शिव का परम भक्त बताने वाले एक ढोंगी बाबा, ऋषिकेश वैद्य का असली चेहरा अब दुनिया के सामने आ गया है. सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाला यह आरोपी, पुलिस से लुका-छिपी खेलने के बाद आखिरकार पिंपरी से दबोच लिया गया है.
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सोशल मीडिया पर 'भक्ति' और लॉज में 'दरिंदगी'
मामले की शुरुआत साल 2023 में हुई थी. उस वक्त ऋषिकेश की पहचान एक 35 साल की महिला से फेसबुक या इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी. आरोपी ने बड़ी ही चालाकी से महिला को यह विश्वास दिलाया कि वह महादेव का बहुत बड़ा भक्त है. उसने महिला को खास पूजा सिखाने का झांसा दिया और उसका भरोसा जीत लिया.
भरोसे का फायदा उठाकर वह महिला को पुणे के मांजरी इलाके में स्थित एक लॉज में ले गया. आरोप है कि वहां उसने महिला को नशीला पदार्थ पिलाया और बेहोशी की हालत में उसके साथ रेप किया.
वसई से पुणे तक पहुंचा मामला
जब पीड़िता को इस तथाकथित बाबा की असलियत का पता चला तो उसने हिम्मत दिखाते हुए वसई के मानिकपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. क्योंकि वारदात पुणे की थी, इसलिए जीरो एफआईआर के बाद केस को पुणे के हडपसर पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया.
पुलिस का जाल और गिरफ्तारी
जैसे ही पुलिस ने जांच शुरू की ऋषिकेश वैद्य फरार हो गया और अपनी पहचान छिपाने लगा. हालांकि, पुलिस की पैनी नजर उस पर बनी हुई थी. क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस को पक्की सूचना मिली कि आरोपी पिंपरी इलाके में छिपा हुआ है. पुलिस की टीम ने घेराबंदी की और इस ढोंगी बाबा को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.
यह मामला एक बार फिर समाज के लिए चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले अज्ञात गुरुओं या भक्तों पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है.
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