झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों के आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अभिजीत दीपके ने गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है. उन्होंने इस घटनाक्रम की तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 तारीख को हुए वाकये से करते हुए कहा कि वहां छात्रों के ऊपर जिस तरह से टियर गैस के गोले दागे गए और लाठियां बरसाई गईं, वह बेहद चिंताजनक है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक पार्टियां प्रदर्शन करती हैं, तब पुलिस लाठीचार्ज या आंसू गैस का इस्तेमाल क्यों नहीं करती? यह कार्रवाई हमेशा छात्रों पर ही क्यों की जाती है. दीपके ने कहा कि देश की तमाम सरकारों को यह सोचना चाहिए कि छात्रों पर इस तरह के अत्याचार से उन्हें क्या मिल रहा है, क्योंकि छात्र किसी वोट बैंक के लिए नहीं बल्कि अपने हक और भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं.
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9 दिनों से अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो पर लाठीचार्ज की निंदा
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र महतो की स्थिति पर बात करते हुए अभिजीत दीपके ने बताया कि देवेंद्र पिछले 9 दिनों से अनशन पर थे. इसके बावजूद पुलिस ने उन पर लाठियां चलाईं और उन्हें मारा-पीटा. इस बर्बरता के बाद देवेंद्र महतो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है. दीपके ने बताया कि उनकी टीम लगातार देवेंद्र महतो और उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उनकी टीम रात भर अस्पताल में देवेंद्र महतो के साथ मौजूद रही.
छात्रों की सभी मांगों को पूर्ण समर्थन
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि वे और उनकी टीम छात्रों की सभी मांगों का पूरी तरह से समर्थन करती है. उन्होंने कहा कि देवेंद्र महतो ने 9 दिनों तक अनशन करके एक बड़ा त्याग किया है, इसलिए इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व देवेंद्र महतो के हाथों में ही होना चाहिए और यह आंदोलन उन्हीं के चेहरे पर आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन और देवेंद्र महतो को मजबूत करने के लिए जो भी मदद या कदम उठाने की जरूरत होगी, वे उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
'चेहरा चमकाना नहीं, आंदोलन को मजबूत करना प्राथमिकता'
रांची जाने और आंदोलन में शामिल होने के सवाल पर अभिजीत दीपके ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी. उन्होंने बताया कि उनकी टीम पहले ही झारखंड पहुंच चुकी है और धरातल पर लगातार काम कर रही है. जब देवेंद्र महतो आगे बढ़ रहे थे, तब भी टीम उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही थी. दीपके ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से वहां जाकर मुख्य नेता देवेंद्र महतो से ध्यान नहीं भटकाना चाहते. उनका लक्ष्य वहां जाकर अपना चेहरा चमकाना नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे से भी आंदोलन और देवेंद्र महतो को पूरी ताकत और मजबूती प्रदान करना है.
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