भारत की सीमाओं की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार अब ज्यादा एक्टिव हो गई है और वह केवल सैन्य निगरानी तक ही सीमित नहीं रहना चाहती है. गृह मंत्रालय ने देश की इंटरनेशनल बॉर्डर के जरिए घुसपैठ, नार्को-तस्करी, हवाला फडिंग, साइबर अपराध जैसी घटनाओं को देखते हुए एक बड़ी रणनीति 'मिशन बॉर्डर' पर काम करना शुरू कर दिया है. इसी रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए खुद गृह मंत्री फील्ड में उतर चुके है. राजस्थान के बीकानेर बॉर्डर के बाद अब अमित शाह गुजरात के हरामी नाला पहुंचे है.
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कहा जा रहा है कि उनका दौरान केवल सीमा चौकियों का निरीक्षण ही नहीं बल्कि आने वाले समय में केंद्र सरकार की नई सीमा सुरक्षा का संकेत माना जा रहा है. अमित शाह का यह दौरा उस वक्त हो रहा है जब केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा, जनसंख्या परिवर्तन और घुसपैठ पर लगातार शिकंजा कस रही है. आइए विस्तार से जानते है क्या है इनसाइड स्टोरी.
हरामी नाला क्यों है सेंसेटिव?
गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित हरामी नाला एक समुद्री और दलदली इलाका है, जो कि लगभग 22 किमी. लंबा ज्वारीय चैनल है. यह अरब सागर और सर क्रीक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, लेकिन इस इलाके की सबसे बड़ी चुनौती इसकी भौगोलिक बनावट है. दरअसल यहां पानी का बहाव, रास्ते के साथ ही गहराई लगातार बदलते रहते है और ज्वार-भाटा की वजह से सीमा की निगरानी कई बार काफी कठिन हो जाती है.
चारों ओर दलदली मैदान और समुद्री कीचड़ की वजह से यहां सुरक्षा व्यवस्था को कायम रखना काफी चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसका फायदा उठाकर पाकिस्तान समर्थित तस्कर और घुसपैठिए भारत में एंट्री करते है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इस रास्ते कई बार हथियार और नशीले पदार्थों को भारत में लाने की कोशिश की गई है. 26/11 हमले के बाद भी समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस इलाके की संवेदनशीलता पर ध्यान दिया गया था. हालांकि सीमा सुरक्षा बल और समुद्री एजेंसियां यहां लगातार गश्त करती है, लेकिन यहां के भौगोलिक बनावट काफी परेशान करती है.
अमित शाह का हरामी नाला पहुंचना क्यों अहम?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का लगातार कर रहे बॉर्डर इलाकों का दौरे के पीछे कई वजह है. उनके कार्यक्रमों में नई सीमा चौका का उद्घाटन, कंट्रोल रूम का निरीक्षण, आधुनिक सर्विलांस सिस्टम की समीक्षा, पानी के रास्ते हरामी नाला क्षेत्र का दौरा शामिल है, जिससे साफ होता है कि यह केवल औपचारिक दौरा नहीं है. वे सीमा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है. इस दौरे के दौरान अमित शाह सीमा चौकी G-7 का उद्घाटन करेंगे और जवानों से संवाद भी करेंगे.
सुरक्षा एजेंसियों ने लाख कठिनाइयों के बाद भी हरामी नाला इलाके में अत्याधुनिक कैमरे, सेंसर और रडार आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की है, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखा जा सकें. अमित शाह खुद जलमार्ग से इन सब व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे. इससे साफ दिखाई देता है कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है.
बीकानेर में अमित शाह ने दिया नया फॉर्मूला!
गुजरात दौरे से पहले अमित शाह ने राजस्थान के बीकानेर के भारत-पाक सीमा से जुड़े जिलों की एक हाई-लेवल सिक्योरिटी मीटिंग की थी. इस मीटिंग में सीएम, सीनियर ऑफिशियल, सीमावर्ती जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शामिल हुए थे. बैठक में नया फॉर्मूला '360 डिग्री बॉर्डर सिक्योरिटी मॉडल' दिया गया. यानी सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ BSF की नहीं बल्कि राज्य सरकार से लेकर स्थानीय लोगों की भी है और इसमें सबकी भूमिका तय की जाएगी.
अमित शाह ने बैठक में इंटरनेशनल बॉर्डर से 0-15 किमी. के क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस नीति' लागू करने के आदेश दिए. सरकार का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में इस तरह के अवैध निर्माणा घुसपैठ और तस्करी के सुरक्षित ठिकाने बन जाते है. इसके अलावा BSF, NCB, CBDT और स्टेट एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है ताकि संदिग्ध गतिविधियों को पूरी तरह से रोका जा सकें.
पश्चिम बंगाल से सीमांचल तक सरकार चला रही अभियान
केंद्र सरकार का बॉर्डर सिक्योरिटी को लेकर अभियान केवल पश्चिमी सीमा तक सीमित नहीं है. बिहार के सीमांचल में भी अमित शाह सिक्योरिटी को लेकर बैठक कर चुके है. अब पश्चिम बंगाल, असम और बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों पर भी फोकस बढ़ाया जा रहा है. हाल में ही पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने BSF को फेंसिग के लिए बड़ी मात्रा में जमीन उपलब्ध कराई है. केंद्र सरकार चाहती है कि जल्द से बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का काम पूरा हो. साथ ही घुसपैठ के मुद्दे पर भी सरकार सख्ती से काम कर रही है. राज्य में अवैध रूप से रह रहें लोग के लिए 3D(Detect, Delete, Deport) की नीति अपनाई गई है.
'अप्राकृतिक जनसंख्या परिवर्तन' भी चुनौती
केंद्र सरकार अब केवल सीमा पार गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि 'अप्राकृतिक जनसंख्या परिवर्तन' को भी सिक्योरिटी थ्रेट के रूप में देख रही है. इसी वजह से हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज का गठन किया गया है, जिसे एक साल के अंदर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है. इस समिति को देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे जनसंख्या संरचना में बदलाव, उनके कारण और संभावित प्रभावों के अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है. समिति यह भी देखेगी की अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और सीमा पार नेटवर्क कैसे जनसंख्या पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो इस विषय पर नए कानून की सिफारिश भी की जाएगी.
सीमा सुरक्षा के लिए लाया गया नया मॉडल
गृह मंत्रालय की नई रणनीति को देखकर साफ पता चलता है कि वह केवल तारबंदी या चौंकियों तक सीमित नहीं रहेगी. स्मार्ट बॉर्डर की नई नीति में कई लेवल सिक्योरिटी जांच की तैयारी की गई है, जिसमें तकनीकी निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, स्मार्ट फेंसिंग, साइबर ट्रैकिंग, वित्तीय निगरानी और स्थानीय प्रशासन की भागीदारी को जोड़ा जा रहा है. सीमावर्ती जिलों के डीएम और एसपी को भी इसके लिए नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. साथ ही '1930' साइबर हेल्पलाइन के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है.
हरामी नाला में क्या-कुछ हो सकता है बदलाव?
सुरक्षा एजेंसियां हरामी नाला क्षेत्र की सुरक्षा को और पुख्ता करने की काम करेगी. इसके लिए आधुनिक फेंसिंग, सेंसर बेस्ड मूवमेंट डिटेक्शन, हाई-रेंज कैमरे और समुद्री पेट्रोलिंग को बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है. माना जा रहा है कि समुद्री सीमा पर सर्विलांस के लिए मछुआरों और ग्रामीणों को भी सुरक्षा नेटवर्क में भी जोड़ा जा सकता है. सरकार की मंशा है कि दलदली क्षेत्र का फायदा कोई भी घुसपैठिया या तस्कर ना उठा सकें.
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