Exit Poll Analysis: असम और केरल के एग्जिट पोल ने बढ़ाई हलचल, क्या कांग्रेस सिर्फ दक्षिण भारत की पार्टी बनकर रह जाएगी?

Exit Poll Analysis: असम और केरल के एग्जिट पोल ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. जहां केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ की वापसी के संकेत मिल रहे हैं, वहीं असम में बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटती दिख रही है. ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस का जनाधार अब दक्षिण भारत तक सिमटता जा रहा है? जानिए असम-केरल एग्जिट पोल का पूरा विश्लेषण.

Exit Poll Analysis
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न्यूज तक डेस्क

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चुनावी समर के बीच आए एग्जिट पोल के आंकड़ों ने देश की भावी राजनीतिक तस्वीर पेश करना शुरू कर दिया है. विशेष रूप से असम और केरल के रुझानों ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए बड़े संकेत दिए हैं. इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई के विश्लेषण के अनुसार, यदि ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. जहां बीजेपी का दबदबा उत्तर से लेकर पूर्व और पश्चिम तक बढ़ता दिख रहा है, वहीं कांग्रेस की उम्मीदें अब केवल दक्षिण भारत पर टिकी नजर आ रही हैं.

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केरल में कांग्रेस की वापसी और मुख्यमंत्री पद की रेस

राजदीप सरदेसाई के अनुसार, केरल से कांग्रेस के लिए अच्छी खबर आ रही है. एग्जिट पोल के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि 10 साल के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) गठबंधन राज्य में सत्ता में वापसी कर सकता है. केरल कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि राहुल गांधी यहां से सांसद रहे हैं और वर्तमान में प्रियंका गांधी वाड्रा भी यहीं से सांसद हैं. हालांकि, जीत की संभावनाओं के साथ ही पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. राज्य में केसी वेणुगोपाल, वी.डी. सतीशन और रमेश चेन्निथला जैसे कद्दावर नेता मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. यदि केरल में कांग्रेस जीतती है, तो तेलंगाना और कर्नाटक के बाद दक्षिण भारत में उसकी स्थिति और मजबूत हो जाएगी.

असम में बीजेपी की हैट्रिक और कांग्रेस का घटता आधार

असम की स्थिति केरल से बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है. एग्जिट पोल के रुझान बताते हैं कि असम में कांग्रेस वापसी करने में विफल रही है और बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की ओर अग्रसर है. एक समय था जब असम में तरुण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस ने लगातार तीन बार शासन किया था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. रुझानों के अनुसार, बीजेपी वहां तीन-चौथाई बहुमत के साथ सत्ता में लौट सकती है. राजदीप सरदेसाई का मानना है कि असम में बीजेपी की राजनीति अब पूरी तरह हावी हो चुकी है और यह राज्य कांग्रेस के हाथ से लगभग निकलता हुआ दिखाई दे रहा है.

मोदी युग में बीजेपी का बढ़ता दबदबा और इंदिरा गांधी का दौर

इस चुनावी विश्लेषण में एक बड़ी बात यह निकलकर सामने आई है कि बीजेपी अब देश की सबसे प्रमुख और डोमिनेंट पार्टी के रूप में स्थापित हो रही है. उत्तर, पश्चिम और अब पूर्वोत्तर में बंगाल और असम जैसे राज्यों में बढ़ती सक्रियता के बाद बीजेपी का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है. राजदीप सरदेसाई ने इसकी तुलना इंदिरा गांधी के दौर से की है, जब कांग्रेस का पूरे देश में दबदबा हुआ करता था. आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी उसी तरह की सर्वव्यापी पार्टी बनती दिख रही है. फिलहाल आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु जैसे कुछ ही राज्य ऐसे बचे हैं जहां बीजेपी मुख्य ताकत नहीं है, अन्यथा देश के अधिकांश हिस्सों में बीजेपी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है.

4 मई के नतीजों पर टिकी सबकी नजर

हालांकि ये तमाम दावे और विश्लेषण वर्तमान एग्जिट पोल के आंकड़ों पर आधारित हैं. राजदीप सरदेसाई ने स्पष्ट किया कि असली तस्वीर 4 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद ही साफ हो पाएगी. विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकारी मशीनरी और अन्य साधनों के कारण चुनाव प्रभावित हुए हैं, लेकिन लोकतंत्र में 'जो जीता वही सिकंदर' वाली कहावत चरितार्थ होती है. अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस दक्षिण भारत के अपने किलों को बचाकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी वापसी की नींव रख पाती है या बीजेपी का विजय रथ उसे सीमित दायरे में समेट देगा.

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