ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. खबर है कि यमन के हूती विद्रोहियों ने 'बाब अल-मंडेब' (Bab el-Mandeb) समुद्री रास्ते को बंद करने की धमकी दी है. अगर ऐसा होता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में तेल, गैस और जरूरी सामानों की कीमतें आसमान छू सकती हैं.
ADVERTISEMENT
क्या है हूतियों की योजना?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ईरान की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. इसके तीन चरण बताए जा रहे हैं, पहले चरण में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर दबाव बनाना, दूसरे में इजरायल को गाजा और लेबनान के मोर्चों पर उलझाना और तीसरे चरण में हूतियों के जरिए 'बाब अल-मंडेब' को ब्लॉक करना. हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने साफ कहा है कि उनके लड़ाके हमले के लिए तैयार हैं.
क्यों खास है यह रास्ता?
'बाब अल-मंडेब' को 'आंसुओं का द्वार' भी कहा जाता है. यह रास्ता लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है. एशिया से यूरोप जाने वाले हर जहाज को इसी पतले रास्ते से गुजरना पड़ता है. दुनिया का करीब 30% समुद्री तेल और हर दिन लगभग 88 लाख बैरल कच्चा तेल यहीं से निकलता है.
आम आदमी पर क्या होगा असर?
अगर यह रास्ता बंद हुआ तो जहाजों को अफ्रीका के नीचे से घूमकर जाना होगा. इससे चक्कर लंबा हो जाएगा और सामान पहुंचने में 15 दिन की देरी होगी. खर्च बढ़ने के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम 100 डॉलर के पार जा सकते हैं. मर्सक (Maersk) जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने तो अपने जहाजों को वहां भेजने से पहले ही रोक दिया है.
इजरायल का पलटवार
बदलते हालात को देखते हुए इजरायल ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है. इजरायल अब सोमालीलैंड में अपना सैन्य बेस बनाने की योजना बना रहा है ताकि हूतियों पर नजर रखी जा सके. कुल मिलाकर, यह समुद्री तनाव अब एक बड़े वैश्विक आर्थिक संकट में बदल सकता है.
इतिहास के बड़े समुद्री संकट का खतरा
ईरान के नेतृत्व में माने जाने वाले "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" में हमास, हिजबुल्ला और हूती जैसे संगठन सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं. अगर बाब अल-मंडेब को बंद कर दिया गया तो यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े समुद्री व्यापार संकटों में से एक बन सकता है.
ADVERTISEMENT


