बलिया: पुलिस की पिटाई से आदिवासी शख्स के मौत का आरोप, चंद्रशेखर आजाद ने खोल दिया मोर्चा

बलिया के गायघाट गांव में पूछताछ के लिए थाने ले जाए गए आदिवासी शख्स कामजी गोंड की संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर बेरहमी से पिटाई का आरोप लगाया है.

पुलिस कस्टडी में बेरहमी से पिटाई का आरोप
पुलिस कस्टडी में बेरहमी से पिटाई का आरोप
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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रेवती थाना क्षेत्र स्थित गायघाट गांव से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां पूछताछ के लिए थाने ले जाए गए एक आदिवासी समाज के शख्स कामजी गोंड की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. मृतक के परिजनों ने पुलिस पर कस्टडी में बेरहमी से थर्ड डिग्री टॉर्चर देने और पिटाई करने का गंभीर आरोप लगाया है. इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश है और मामले की गूंज अब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई देने लगी है. भीम आर्मी चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस मामले को लेकर यूपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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बच्चों के मामूली विवाद से शुरू हुआ था पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, घटना की शुरुआत 7 जुलाई को बच्चों के बीच मुर्गे की दुकान पर हुई एक मामूली कहासुनी और हाथापाई से हुई थी. इसके अगले दिन यानी 8 जुलाई को पुलिस आरोपी युवक के पिता कामजी गोंड को पूछताछ के लिए थाने ले गई. परिजनों का आरोप है कि थाने के भीतर पुलिसकर्मियों ने कामजी गोंड के साथ बुरी तरह मारपीट की, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई.

आरोप है कि हालत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें गांव के प्रधान लालू सिंह और कुछ अन्य लोगों के सुपुर्द कर दिया. परिजनों के अनुसार, ग्राम प्रधान उन्हें एक मटिया (सुनसान जगह) पर बदहाल और घायल स्थिति में छोड़कर चले गए. बाद में गांव के बच्चों ने जब कामजी गोंड को इस हालत में देखा तो परिवार को सूचना दी. उन्हें तुरंत जिला अस्पताल और फिर वहां से नाजुक हालत में वाराणसी (BHU ट्रामा सेंटर) रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

शव गांव पहुंचते ही चक्काजाम, पुलिस के खिलाफ नारेबाजी

जैसे ही कामजी गोंड की मौत की खबर और उनका शव गांव पहुंचा, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए परिजनों और ग्रामीणों ने बलिया-रेवती मार्ग पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग की.

सांसद चंद्रशेखर आजाद की एंट्री, खोला मोर्चा

इस पूरे मामले पर सियासत भी गरमा गई है. नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा करते हुए सरकार को घेरा. उन्होंने लिखा- "बलिया जनपद के रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट लाल टोला निवासी आदिवासी समाज के कामजी गोंड की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद और चिंताजनक है. परिजनों का आरोप है कि पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान की गई पिटाई से उनकी हालत बिगड़ गई और बाद में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई. हम उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए. दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए."

दारोगा और सिपाही सस्पेंड, हत्या का मुकदमा दर्ज

मामले को तूल पकड़ता देख और घटना की गंभीरता को समझते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया. बलिया पुलिस के आला अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर रेवती थाने के एक उपनिरीक्षक (हल्के के दारोगा), एक सिपाही, ग्राम प्रधान लालू सिंह समेत कुल छह लोगों के खिलाफ हत्या (IPC/BNS की संबंधित धाराएं) और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर आरोपी दरोगा और सिपाही को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है. मृतक का पोस्टमार्टम वाराणसी के बीएचयू ट्रामा सेंटर में कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का खुलासा होगा. फिलहाल पुलिस मामले की कानूनी जांच में जुटी है.