हो सकता है जिनकी पत्नियों के नाम पूजा या पूनम होते होंगे, उनके पति घर में प्यार से पू पुकारा करते होंगे. जिनके नाम रश्मि हैं, उनके पति रेशू और जिनके नाम वंदना हैं, वो वंदू पुकारते होंगे. अब पता चला कि देश के ताकतवर नेताओं में से एक चंद्रबाबू नायडू अपनी पत्नी भुवनेश्वरी को प्यार से ‘भू’ यानी Bhu पुकारते हैं. जो पुकार घर में सुनी जाती है, उसी नाम से सारे जमाने के सामने चंद्रबाबू नायडू ने भुवनेश्वरी को पुकार दिया. हर सेकंड दुनिया जहां की खबरों से भरे X पर प्यार से भरे दो पोस्ट नजर आए. पहली पोस्ट नारा भुवनेश्वरी ने लिखी. दूसरी पोस्ट उसी के जवाब में चंद्रबाबू नायडू ने लिखी. शादी की 45वीं एनिवर्सरी सेलिब्रेट करने चंद्रबाबू और भुवनेश्वरी कपल X पर आए.
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भुवनेश्वरी ने मांगा नया वादा, नायडू ने दिया प्यार भरा जवाब
पति चंद्रबाबू नायडू को लव इमोजी के साथ और पेयर फोटो के साथ टैग करते हुए भुवनेश्वरी ने लिखा- @ncbn गारू को शादी की 45वीं वर्षगांठ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. इतने सालों के साथ, दोस्ती और खूबसूरत यादों के लिए आपकी आभारी हूं. इस साल एनिवर्सरी पर कोई वादा?
चंद्रबाबू ने भी लव इमोजी के साथ प्यार भरा जवाब दिया- हैप्पी एनिवर्सरी, भु. ❤️ लोग मुझे मुख्यमंत्री या पार्टी अध्यक्ष बुला सकते हैं... लेकिन मुझे वह पद देने के लिए धन्यवाद, जिसे मैं सबसे ज्यादा संजोकर रखता हूं - पति. इतने वर्षों में एक वादा बिल्कुल नहीं बदला है - तुम्हारे साथ इस सफर पर हमेशा चलते रहना!
सोशल मीडिया पर छा गया कपल का प्यार
इन दोनों के इस डिजिटल एक्सप्रेशन ऑफ द लव ने इंटरनेट तोड़ दिया है. नायडू का अपनी पत्नी के लिए सम्मान और भुवनेश्वरी का नया वादा मांगने का मजाकिया अंदाज लोगों का दिल जीत रहा है. तो चलिए शादी की 45वीं एनिवर्सरी पर सुनाते हैं चंद्रबाबू और भुवनेश्वरी की वो लव स्टोरी, जिसने हमेशा के लिए आंध्र प्रदेश की राजनीति बदल दी.
शादी ने बदली चंद्रबाबू नायडू की राजनीतिक तकदीर
राजनीति में पार्टियां बदलती हैं, सरकारें बदलती हैं और बदलती हैं नेताओं की तकदीरें. लेकिन चंद्रबाबू और भुवनेश्वरी की लव स्टोरी ने न सिर्फ दो दिलों को मिलाया, बल्कि आंध्र की राजनीति हमेशा-हमेशा के लिए बदल दी. भुवनेश्वरी से शादी के बाद चंद्रबाबू नायडू की राजनीतिक तकदीर ने ऐसी करवट ली कि वो आज 50 साल बाद भी देश के सबसे बड़े किंगमेकर बने हैं.
NTR की बेटी हैं नारा भुवनेश्वरी
नारा भुवनेश्वरी बड़े घर की बेटी हैं, जिनका संबंध आंध्र के सबसे ताकतवर राजनीतिक घराने से है. तेलुगु सिनेमा के महानायक, सुपरस्टार और बाद में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने एनटी रामाराव की बेटी हैं. एनटीआर जब राजनीति में नहीं थे, तब भी बड़े आदमी थे, क्योंकि तेलुगू फिल्मों के सबसे बड़े स्टार हुआ करते थे. भगवान की तरह पूजे जाते थे. उसी स्टारडम से राजनीति में उनका रास्ता बना.
भुवनेश्वरी से अलग ही दुनिया से आए थे चंद्रबाबू नायडू. चित्तूर जिले के साधारण किसान परिवार में जन्मे चंद्रबाबू के पास ऐसी कोई विरासत नहीं थी, जिसके दम पर आगे बढ़ते.
छात्र राजनीति से विधायक बनने तक का सफर
तिरुपति यूनिवर्सिटी से छात्र राजनीति करते हुए राजनीति में आए. कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की. राजनीति में उन्होंने तेजी से कदम बढ़ाए. 28 साल की उम्र में 1978 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधायक बन गए. आगे कांग्रेस की टी. अंजैया सरकार में सिनेमाटोग्राफी मंत्री बने. उनकी राजनीति को पंख लगे थे, लेकिन वो उड़ान शुरू नहीं हुई थी, जो आगे होने वाली थी. चंद्रबाबू नायडू जब सिनेमा मंत्री थे, तब उनका काम के सिलसिले में एनटी रामाराव से लगातार मिलना-जुलना होता था.
चंद्रबाबू के लिए NTR की तरफ से आया शादी का प्रस्ताव
अक्सर लोग सोचते हैं कि यह कोई फिल्मी लव स्टोरी होगी, जहां चंद्रबाबू ने भुवनेश्वरी को प्रपोज किया होगा. कहानी ये है कि प्रपोजल चंद्रबाबू की तरफ से नहीं, बल्कि खुद सुपरस्टार एनटीआर की तरफ से आया था. एनटीआर की फिल्म अनुरागा देवथा के सेट पर हुई पहली मुलाकात के बाद एनटीआर के मन में चंद्रबाबू नायडू बैठ चुके थे. उन्होंने ऐसा काबिल दामाद चाहिए था, जो भुवनेश्वरी को खुश रख सके.
एनटीआर के 8 बेटे और 4 बेटियां हैं. बेटियों में तीसरे नंबर पर हैं भुवनेश्वरी. उनसे बड़ी बहन पुरंदेश्वरी बीजेपी की बड़ी नेता हैं.
जयकृष्ण ने चंद्रबाबू तक पहुंचाया शादी का प्रस्ताव
बात को आगे बढ़ाने के लिए एनटीआर ने सीधे बात नहीं की. उन्होंने अपने बड़े बेटे जयकृष्ण को चंद्रबाबू नायडू के पास भेजा. जयकृष्ण ने कहा, पिताजी अपनी बेटी भुवनेश्वरी की शादी आपसे कराना चाहते हैं. किसान परिवार के आम लड़के के लिए ये एक शॉक था. चंद्रबाबू नायडू ने तुरंत हां नहीं कहा, लेकिन आगे हां भी कह दिया. परिवारों की रजामंदी से चंद्रबाबू और भुवनेश्वरी की शादी 10 सितंबर 1981 को मद्रास के कलाइवानार अरंगम में हुई.
शादी के बाद TDP में शामिल हुए चंद्रबाबू
शादी के बाद ही चंद्रबाबू नायडू की जिंदगी में बड़ा राजनीतिक यू-टर्न आया. एनटीआर के दामाद बनकर भी कांग्रेस में ही रहे, लेकिन जब 1983 के विधानसभा चुनाव में ससुर एनटीआर की नई पार्टी तेलुगु देशम पार्टी की प्रचंड लहर में खुद चुनाव हार गए. 1983 में नारा लोकेश के जन्म के बाद अगस्त 1983 में चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस छोड़कर टीडीपी ज्वाइन कर ली.
एनटीआर की राजनीति और टीडीपी के लिए चंद्रबाबू बड़े असेट साबित हुए. पार्टी बढ़ती गई. टीडीपी के पुराने नेताओं को पीछे छोड़ते हुए चंद्रबाबू एनटीआर के राजनीतिक उत्तराधिकारी मान लिए गए. भुवनेश्वरी न पहले राजनीति में थीं, न आगे राजनीति में आईं. हालांकि चंद्रबाबू की बनाई हेरिटेड फूड्स नाम की कंपनी संभालते हुए वो करीब हजार करोड़ की संपत्ति की मालकिन बनी हैं.
जनसंख्या नियंत्रण की नीति और परिवार की मिसाल
1980 और 1990 के दशक में देश में जनसंख्या नियंत्रण और 'फैमिली प्लानिंग' का बहुत जोर था. चंद्रबाबू नायडू जब 1995 में मुख्यमंत्री बने, तो वे जनसंख्या नियंत्रण के सबसे बड़े सपोर्टर बनकर उभरे. उनकी सरकार ने कड़ा कानून बना दिया कि जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे होंगे, वो स्थानीय निकायों के चुनाव नहीं लड़ सकते. समाज की मैसेजिंग के लिए चंद्रबाबू और भुवनेश्वरी ने खुद भी 'एक संतान' के सिद्धांत को अपनाया.
इंटरेस्टिंग है कि आज 2026 में आकर चंद्रबाबू नायडू ने अपनी इस पुरानी नीति को पूरी तरह बदल दिया है. गिरती जन्म दर को देखते हुए अब लोगों से अपील कर रहे हैं कि वो 3 या 4 बच्चे पैदा करें, जिसके लिए उनकी सरकार आर्थिक मदद भी दे रही है.
2023 में पहली बार राजनीति की सड़क पर उतरीं भुवनेश्वरी
भुवनेश्वरी हमेशा लाइमलाइट और मीडिया से दूर रहने वाली महिला रही हैं. लेकिन साल 2023 में जब चंद्रबाबू नायडू को जगन रेड्डी की सरकार ने गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, तो भुवनेश्वरी ने पहली बार 'घर की दहलीज' लांघकर सीधे सड़क पर उतरीं. उन्होंने 'निजाम कोसम' (सच के लिए) यात्रा शुरू की. उनकी उसी मेहनत से 2024 में चंद्रबाबू नायडू और टीडीपी धमाकेदार वापसी कर पाए.
NTR की दूसरी शादी से परिवार में बढ़ा विवाद
एनटी रामाराव की पहली पत्नी और भुवनेश्वरी की मां बसवतारकम 1985 में चल बसीं. अपने एकाकीपन को दूर करने एनटीआर ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 70 साल की उम्र में 1993 में कॉलेज लेक्चरर और लेखिका लक्ष्मी पार्वती से दूसरी शादी कर ली. भारी विवाद हुआ. फिर भी 1994 में एनटी रामाराव प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, लेकिन तब पार्टी और परिवार के भीतर एक नया तूफान खड़ा हो चुका था.
लक्ष्मी पार्वती का बढ़ता दखल बना चिंता की वजह
लक्ष्मी पार्वती की दखल सरकार और टीडीपी में तेजी से बढ़ी. दखल इस कदर बढ़ गया था कि टीडीपी के मंत्रियों और विधायकों को मुख्यमंत्री एनटीआर से सीधे मिलने के बजाय पहले लक्ष्मी पार्वती की मंजूरी लेनी पड़ती थी. दामाद चंद्रबाबू समेत सब डरे कि एनटीआर अपना सब कुछ लक्ष्मी पार्वती को सौंप देंगे, लेकिन किसी ने कुछ करने की हिम्मत नहीं की.
वायसराय होटल में हुई विधायकों की किलेबंदी
पार्टी को टूटने से बचाने और एनटीआर की राजनीतिक विरासत बचाने के लिए चंद्रबाबू नायडू ने बड़ा ऑपरेशन लीड किया, जो एनटीआर के खिलाफ बगावत थी. एक-एक कर पार्टी के असंतुष्ट विधायकों को एकजुट किया और हैदराबाद के मशहूर 'वायसराय होटल' में करीब 150 से अधिक विधायकों की किलेबंदी कर दी. एनटीआर को जागने में बहुत समय लगा.
NTR के खिलाफ हुआ तख्तापलट
नंदामूरी परिवार, NTR के बेटों और पत्नी नारा भुवनेश्वरी के मजबूत पारिवारिक समर्थन के दम पर चंद्रबाबू ने तख्तापलट कर दिया. बहुमत चंद्रबाबू के पास था. एनटीआर को सत्ता छोड़नी पड़ी. 1995 में चंद्रबाबू बिना चुनावी जनादेश के आंध्र के सीएम बन गए. ससुर की खड़ी की हुई पूरी पार्टी चंद्रबाबू नायडू के पीछे हो ली. इतिहास में उस घटना को फैमिली कूप या तख्तापलट के रूप में देखा गया, लेकिन इसके बाद चंद्रबाबू ने जो किया, उसने किसी को कुछ कहने का मौका नहीं दिया.
TDP को राष्ट्रीय स्तर पर किंगमेकर बनाया
टीडीपी (TDP) में ऐतिहासिक विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ. बगावत के महज कुछ ही महीनों बाद, जनवरी 1996 में टीडीपी के संस्थापक एनटी रामाराव का दिल का दौरा पड़ने से दुखद निधन हो गया. उनके निधन के बाद, उनकी दूसरी पत्नी लक्ष्मी पार्वती ने एनटीआर की विरासत और सहानुभूति का दावा करते हुए अपनी नई पार्टी "NTR टीडीपी (लक्ष्मी पार्वती)" बनाई, लेकिन चंद्रबाबू के दबदबे के कारण बेअसर रहीं.
चंद्रबाबू नायडू ने न केवल खुद को टीडीपी का निर्विवाद नेता साबित किया, बल्कि राजनीतिक सूझबूझ के दम पर उन्होंने 1999 के विधानसभा चुनावों में टीडीपी को एक और प्रचंड बहुमत दिलाया. इस जीत के साथ लक्ष्मी पार्वती धीरे-धीरे राजनीति के हाशिये पर चली गईं और चंद्रबाबू नायडू ने टीडीपी को मॉडर्न, फास्ट ग्रोइंग और नेशनल लेवल की 'किंगमेकर' पार्टी के रूप में स्थापित कर दिया.
फिर सामने आई वही NTR वाली शादी की कहानी
अक्सर लोग सोचते हैं कि यह कोई फिल्मी लव स्टोरी होगी, जहां चंद्रबाबू ने भुवनेश्वरी को प्रपोज किया होगा. कहानी ये है कि प्रपोजल चंद्रबाबू की तरफ से नहीं, बल्कि खुद सुपरस्टार एनटीआर की तरफ से आया था. एनटीआर की फिल्म अनुरागा देवथा के सेट पर हुई पहली मुलाकात के बाद एनटीआर के मन में चंद्रबाबू नायडू बैठ चुके थे. उन्होंने ऐसा काबिल दामाद चाहिए था, जो भुवनेश्वरी को खुश रख सके. एनटीआर के 8 बेटे और 4 बेटियां हैं. बेटियों में तीसरे नंबर पर हैं भुवनेश्वरी. उनसे बड़ी बहन पुरंदेश्वरी बीजेपी की बड़ी नेता हैं.
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