दिल्ली के जंतर-मंतर एक बवंडर अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल ने उठाया था जिसने कांग्रेस की नींव हिला दी थी. 15 साल बाद एक और सियासी बवंडर बड़ा हो रहा है जिसके निशाने पर बीजेपी है. कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया के मीम पेजों से निकलकर सीधे देश की संसद के सामने दस्तक दी हुई है. इस बंवडर का नायक बना है अभिजीत दीपके नाम का एक नौजवान जो अमेरिका की आलीशान जिंदगी छोड़कर जंतर-मंतर की सड़कों पर जून की गर्मी में खुद को जलाने आ गया. अभिजीत दीपके, उस लड़के का नाम है जो राजनीति में आते रातोंरात स्टार बनकर चर्चित चेहरा बना और उनके एक जुनून ने देश की राजनीति और सरकार हिला दी है. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.
ADVERTISEMENT
रातोंरात स्टार बने दीपके की कहानी!
15 मई को सुबह तक अभिजीत दीपके को कोई नहीं जानता था. उसी दिन चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अदालत में कुछ ऐसा बोला गया जहां से अभिजीत दीपके की नई जिंदगी शुरू हुई. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले 30 साल के अभिजीत दीपके के जीवन में कोई कष्ट नहीं था. उन्होंने पुणे से जनर्लिज्म की पढ़ाई की. फिर हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर डिग्री हासिल की.
उससे पहले उन्होंने राजनीति में भी दस्तक दे दी थी. पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेनिंग टीम का हिस्सा रहे. जहां उन्होंने मीम-बेस्ड पॉलिटिकल कम्युनिकेशन में डिजिटल नैरेटिव और मीम-मार्केटिंग के मास्टरी हासिल कर ली थी. लेकिन उन्हें शायद कुछ और करना था जिसके लिए वो आगे पढ़ने अमेरिका गए.
अभिजीत दीपके मिडिल क्लास फैमिली से आते हैं. पिता भगवानराव दीपके और मां अनिता दीपके का राजनीति से कोई नाता नहीं है. अभिजीत की शादी भी नहीं हुई. अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से बैंक से 'एजुकेशन लोन' लेकर पढ़ाई की. सोशल मीडिया पर संपत्ति और विदेशी फंडिंग होने की खबरें आने लगीं तो उन्होंने सफाई दी कि ऐसा होता वो एजुकेशन लोन चुका चुके होते. भारत आने पर दीपके की गिरफ्तारी की हलचल होने लगी तो परिवार डरकर घर छोड़कर अज्ञात जगह पर शिफ्ट हो गया. परिवार ने कहा उन्हें राजनीति में नहीं आना चाहिए.
कैसे शुरू हुआ कॉकरोच विवाद?
15 मई को जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अदालतों में बेरोजगारों को कॉकरोच, पैरासाइट पुकारा गया तब अभिजीत अमेरिका में ही थे. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें अपने प्रोफेशन में कोई काम या रोजगार नहीं मिलता. उनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और पूरे सिस्टम पर हमला करना शुरू कर देते हैं. हल्ला मचा तो चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सफाई दी लेकिन उनकी सफाई हंगामे के शोर में दब गई. चीफ जस्टिस ने विवादित बयान में बोला तो पैरासाइट भी था लेकिन पकड़ा गया सिर्फ कॉकरोच.
अमेरिका में बैठे अभिजीत न तो बेरोजगार थे, न ऐसी कोई परीक्षा थी जिसका पेपर लीक हुआ. न जाने क्या सोचकर सूर्यकांत की कॉकरोच कहे जाने पर दिपके हिल गए. सोशल मीडिया तो बेरोजगारों को कॉकरोच कहे जाने से सुलह ही रहा था. अमेरिका में बैठे-बैठे दिपके सुलगते आक्रोश की ब्रैंडिंग कर दी. तब लड़ाई सीधे मोदी सरकार या बीजेपी या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नहीं थी.
बिना एक रुपया खर्च किए, बिना कोई रैली किए, एक साधारण लड़के ने इंटरनेट पर एक ऐसी कॉकरोच सेना खड़ी कर दी, जिसने देश की सबसे शक्तिशाली पार्टी, बीजेपी के सोशल मीडिया साम्राज्य को घुटनों पर ला दिया. कहानी किसी पावरफुल नेता या वीआईपी की नहीं है. ये कहानी है इंटरनेट के सबसे चर्चित चेहरा अभिजीत दीपके की जो शान से कह रहा है, 'मैं भी कॉकरोच'. हमने सीधे सत्ता के सिंहासन को हिलाकर रख दिया.
डिजिटल आंदोलन की शुरुआत!
अभिजीत दीपके ने सिस्टम पर तीखा व्यंग्य यानी सटार कसने के लिए एक डिजिटल आंदोलन खड़ा किया, जिसे नाम दिया-'कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP'. अभिजीत दीपके ने एआई टूल्स की मदद से फटाक से जिस कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया पेज तैयार किया, उसने इंटरनेट के सारे एल्गोरिदम तोड़ दिए थे. इस सटायर पार्टी ने सदस्य बनने के लिए बेरोजगार और आलसी होने जैसी अनोखी शर्तें रखीं.
मेनिफेस्टो बनाया सीधे बीजेपी, सरकार पर चोट करने वाला. कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत भले चीफ जस्टिस सूर्यकांत के कमेंट के खिलाफ गुस्से से हुई थी, लेकिन आंदोलन महज कुछ घंटों में एंटी-बीजेपी आंदोलन बन गया. देखते ही देखते कुछ ही हफ्तों में इसके इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए और 3.5 लाख से अधिक युवाओं ने रजिस्ट्रेशन करा लिया. कॉकरोच को एक ऐसे जीव के प्रतीक के रूप में चुना गया, जो हर विपरीत परिस्थिति में टिक जाता है, डरता नहीं और कभी मरता नहीं.
शुरू-शुरू में लगा ये हंसी मजाक से ज्यादा कुछ नहीं लेकिन सरकार ने हंसी मजाक को सीरियसली ले लिया. सोशल मीडिया पर कॉकरोचों के मीम आंदोलन से सरकार के हाथ-पांव फूल गए. फिर शुरू हुआ आंदोलन को कुचलने का सिलसिला. खुफिया एजेंसियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए सोशल मीडिया हैंडल्स को ब्लॉक करा दिए. पेज डिलीट हो गए. एक झटके में कॉकरोच जनता पार्टी को फॉलो कर रहे करोड़ों फॉलोअर्स गायब हो गए.
जब दीपके को मिला सोनम वांगचुक का सपोर्ट
अभिजीत दीपके का सोशल मीडिया बेस खत्म हो चुका था. फिर भी वो भारत लौटे. कॉकरोच जनता पार्टी को राजनीतिक पार्टी बनाना चाहते थे लेकिन कॉकरोच नाम से पार्टी की इजाजत नहीं मिली. कुछ शहरों में विरोध प्रदर्शन करने के बाद उन्होंने जंतर मंतर पर बैठने का ऐलान किया. तब शायद सरकार ने मान लिया था कि ये कॉकरोच क्या ही कर लेंगे. आसानी से विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर मंतर पर मंच दे दिया लेकिन जब लद्दाख से सोनम वांगचुक आकर अनशन पर बैठे तो चीजें बदलनी लगी. देश ने इसी जंतर मंतर से अन्ना हजारे का आंदोलन देखा था. कॉकरोच का प्रदर्शन अन्ना आंदोलन जैसा तो नहीं हुआ लेकिन जब वही सारे चेहरे जंतर मंतर के आसपास मंडराने लगे तो माहौल मिनी अन्ना आंदोलन जैसा बनने लगा है. सोनम वांगचुक ने खुद अन्न त्याग करके दिपके के आंदोलन को संजीवनी दे दी.
अभिजीत ने राहुल गांधी पर कसा था तंज, वायरल हो रहा पोस्ट!
राजनीति का चक्र घूमता है, तो पुरानी बातें भी इतिहास के पन्नों से बाहर आ जाती हैं. अभिजीत दीपके का साल 2022 का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट इस समय तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का मजाक उड़ाया था. 8 सितंबर 2022 को, जब राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी, तब अभिजीत दीपके ने मजाक उड़ाया था-राहुल गांधी की #BharatJodoYatra का अंत एक 'ट्रैवल व्लॉग' (Travel Vlog) से ज्यादा कुछ नहीं होगा. आगे भी लिखते रहे- राहुल गांधी को किसी बाहरी दुश्मन की जरूरत नहीं है, वह खुद ही अपने सबसे बड़े दुश्मन हैं. अभिजीत दीपके ने आंदोलन के शुरुआती दिनों में ये शेखी भी दिखाई थी कि मंच किसी भी राजनीतिक दल के लिए नहीं है. अगर विपक्ष में बैठे नेताओं ने पहले अपना काम ढंग से किया होता, तो आज देश के युवाओं को सड़कों पर उतरने की नौबत ही नहीं आती.
तब अभिजीत दीपके को ये सब नॉन सीरियस टाइप लगता होगा. उन्होंने यात्रा के दौरान राहुल के नारियल पीने पर भी तंज कसा और यात्रा के आउट कम पर भी शक किया. आज कौन नहीं जानता कि उसी भारत जोड़ो यात्रा ने राहुल की राजनीतिक तस्वीर और 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की तकदीर बदली.
दीपके को क्यों पड़ी राहुल की जरूरत?
आज वक्त बदल चुका है. जंतर-मंतर पर नीट 2026 पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन सोनम वांगचुक के 20 दिनों के अनशन से गंभीर तो बना लेकिन आंदोलन को पुश करने के लिए, सरकार को झुकाने के लिए दीपके एंड टीम की ताकत कम पड़ रही है. अभिजीत दीपके को विपक्ष की मदद की जरूरत पड़ी है. विपक्ष के नेता आ भी रहे हैं लेकिन अब तक राहुल गांधी के जंतर मंतर पर नहीं आने, सोशल मीडिया पर दो शब्द नहीं लिखने से सब आधा-अधूरा लग रहा है.
अभिजीत दीपके को इस समय अगर सबसे ज्यादा किसी के समर्थन की जरूरत है तो राहुल गांधी की. उन्होंने राहुल गांधी समेत तमाम बड़े नेताओं को आने का निमंत्रण भी भेजा है. राहुल गांधी भी बीजेपी से लड़ रहे हैं. अभिजीत दीपके भी वही कर रहे हैं लेकिन न जाने क्यों संसद से लेकर सड़क तक युवाओं और पेपर लीक के मुद्दों पर लगातार मुखर होने के बाद भी सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके के आंदोलन पर साइलेंट हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि राहुल ऐसे किसी भी संगठन या चेहरे के साथ सीधे मंच साझा करने को लेकर सतर्क हैं, जिसका अतीत में कांग्रेस-विरोधी रुख रहा हो या जिसकी विचारधारा स्पष्ट न हो. ये सवाल भी है कि अगर दीपके की कॉल पर जंतर मंतर पहुंचे तो बीजेपी से लड़ाई के हीरो राहुल नहीं, दीपके बनेंगे.
आज जब कॉकरोच जनता पार्टी और सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं और राहुल गांधी का इंतजार कर रहे हैं तब नेटिजन्स और राहुल समर्थकों ने दीपके के पुराने करीब 13 ट्वीट्स निकालकर उन्हें सोशल मीडिया पर री पोस्ट कर दिया. दीपके को उलाहना दिया जा रहा है कि जब राहुल गांधी छात्रों और युवाओं के हक के लिए 3,700 किलोमीटर पैदल चल रहे थे, तब तो आपने उनका मजाक उड़ाया था, और आज आपको उन्हीं के समर्थन की जरूरत पड़ गई है.
कहना-सुनना, सुनना-सुनाना अपनी जगह. राहुल गांधी दिपक के मामले में भले साइलेंट हों लेकिन काम उनका ही हो रहा है. राहुल गांधी की भी राजनीति के सेंटर युवाओं की चिंता, नौकरी, बेरोजगारी, पेपर लीक जैसे मुद्दे हैं. उनके लिए कॉकरोच जनता पार्टी बिना मेहनत की कमाई जैसी है. जो एंटी-बीजेपी माहौल देश में देखना चाहते हैं वो काम उनसे कहीं ज्यादा जंतर मंतर से अभिजीत दिपके कर रहे हैं.
ADVERTISEMENT


