दुनिया भर में रॉकस्टार सिंगर, एक्टर, स्पोर्ट्समैन, सेलिब्रिटी हुआ करते हैं, लेकिन रॉकस्टार टीचर के बारे में न कभी किसी ने सोचा, न जाना. बायजू रवींद्रन के सपने भी रॉकस्टार बनने वाले नहीं थे लेकिन तकदीर जब अपना रंग दिखाती है तब पता नहीं कौन कहां पहुंच जाएं. रंक को राजा और राजा से रंक तकदीर तो बना सकती है लेकिन उससे पहले काम करता है अपना गुणाभाग.
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बायजू रवींद्रन ऐसा टीचर रहे जिसे मैथ्स से इश्क था. उन्होंने पढ़ाने के लिए क्लास रूम नहीं, स्टेडियम बुक किए, पढ़ाने के लिए फीस नहीं ली. उनसे पढ़ने के लिए स्टेडियम के टिकट बुक हुआ करते थे. एक छोटे से कमरे से निकलकर स्टेडियम पहुंचे और फिर देखते ही देखते 1 लाख 84 हजार करोड़ का कॉर्पोरेट साम्राज्य खड़ा कर दिया. जब कॉमन मैन से कॉरपोरेट बने रवींद्रन तब भी देश के चर्चित चेहरा थे. जब कॉरपोरेट किंग से खाक हुए तब भी चर्चित चेहरा बने. लेकिन आज इंडिया के एडटेक किंग रहे बायजू रवींद्रन को सिंगापुर कोर्ट ने 6 महीने की जेल की सजा सुना दी है, जिसके बाद एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई है. चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानेंगे बायजू रवींद्रन की पूरी कहानी.
जेल जा रहे रवींद्रन
अगर किसी ने बायजू रवींद्रन को देखा होगा तो शायद ये भी नोटिस किया होगा कि वो हमेशा ब्लैक पोलो टी-शर्ट और जींस में ही नजर आए. इसके पीछे मार्क जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स जैसी ही एक बिजनेस फिलॉसफी थी. रवींद्रन ने भी लाइफ प्रिंसिपल बनाया कि सुबह उठकर आज क्या पहनना है ये सोचने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. उसी लाइफ प्रिंसिपल से रवींद्रन का वार्डरोब भर गया ब्लैक पोलो टीशर्ट्स से.
ऑफिस से लेकर इंटरनेशनल सम्मिट्स तक रवींद्रन ने इसी लुक को स्टाइल, सिगनेचर, आदत बना ली. अब वक्त ऐसे बदला कि आज क्या पहनना है सोचने के लिए रवींद्रन के ढेरों समय तो है लेकिन टी-शर्ट की जगह सिंगापुर जेल की कैदियों वाली यूनिफॉर्म पहननी पड़ सकती है. 6 महीने के लिए जेल जा रहे हैं रवींद्रन. इसी खबर के साथ याद आ गया रवींद्रन का गांव वाला बचपन और अमेरिका जैसे देशों वाली लाइफ स्टाइल.
चलती ट्रेन से गिन दिए थे इलेक्ट्रिक पोल्स
बायजू रवींद्रन जाने जाते हैं देश की सबसे तेजी से बढ़ी एजुकेशन कंपनी बायजूस के मालिक के तौर पर लेकिन मालिक के पीछे था तो एक मैथेमेटिक्स का होनहार स्टूडेंट जो आगे चलकर मैथ्स विजार्ड और विशाल बिजनेस एंपायर का मालिक बना. मैथ्स विजार्ड बनना कोई इत्तेफाक नहीं था, बल्कि इसकी शुरुआत बचपन में एक खेल से हुई थी.
रवींद्रन में अद्भभुत कला थी. चलती ट्रेन में बैठे-बैठे इलेक्ट्रिक पोल्स की काउंटिंग कर लिया करता था. ये तक बता देता कि दो पोल्स को क्रॉस करने में ट्रेन को कितना समय लगता है. बिना किसी स्पीडोमीटर के चलती हुई ट्रेन की सटीक स्पीड बताना भी आ गया. ऐसी अनोखी आदतों ने बचपन में ही दिमाग को एक सुपर कंप्यूटर बना दिया. उसी ने बुनियाद रखी मैथ विजार्ड के देश के रॉकस्टार टीचर और सबसे यंग अरबपति बिजनेसमैन की.
कैसे बने मैथ्स किंग?
केरल के गांव में जन्मे रवींद्रन का मन पढ़ने-लिखने में लगता नहीं था. खेलकूद के लिए क्लास बंक करने के आदी थे. पैरेंट्स ने न जाने क्यों, रवींद्रन जैसा था वैसा रहने दिया. उस डिस्काउंट के बदले सिर्फ घर पर सेल्फ-लर्निंग करनी होती थी. उसी सेल्फ-लर्निंग ने किताबी थ्योरी को विजुअल्स में बदलना सिखाया, जो आगे चलकर बायजूस ऐप का बैकबोन बना.
मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक के बाद भी रवींद्रन ने खुद के लिए कभी कुछ सोचा नहीं था. दोस्तों के साथ मैनेजमेंट की सबसे कठिन परीक्षा CAT में बिना तैयारी के बैठ गए. रिजल्ट आया तो रवींद्रन ने टॉप किया. खुद पर विश्वास नहीं हुआ तो दोबारा कैट में बैठे और फिर 100 परसेंटाइल स्कोर किया. इस एक्सपीरियंस ने रवींद्रन के भीतर बैठे मैथ्स विजार्ड को जगाया. उन्होंने मैथ पढ़ाना शुरू किया.
क्लासरूम पड़े छोटे तो बुक किया स्टेडियम
शुरुआत में जब बेंगलुरु की छतों, कैफे और छोटे कमरों में बच्चों को कैट की तैयारी कराते थे. पढ़ाने की 'शॉर्टकट ट्रिक्स' इतनी मशहूर हुईं कि क्लासरूम छोटे पड़ने लगे. रवींद्रन सर के चर्चे होने लगे. कुछ दिनों छात्रों की संख्या 40 से बढ़कर हजार के पार हो गई. जब हॉल या ऑडिटोरियम भी छोटा पड़ने लगा तब रवींद्रन कुछ यूनिक सोचा. देश में पहली बार पढ़ाई के लिए बेंगलुरु का कंतूरवा स्टेडियम बुक करना शुरू कर किए.
20 से 25 हजार छात्र हाथ में नोटबुक लिए किसी सेलिब्रिटी या रॉकस्टार की तरह स्टेज पर एंट्री मारने वाले बायजू सर को सुनने के लिए टिकटें खरीदकर बैठते थे. रवींद्रन ने पढ़ाई को कॉन्सर्ट बना दिया. ऐसे देश के पहले सेलिब्रिटी टीचर बन रहे थे रवींद्रन.
जब बायजूस कोई मोबाइल ऐप नहीं था, रवींद्रन रोबोट बनकर लगातार तीन साल तक हफ्ते के सातों दिन, अलग-अलग बड़े शहरों में जाकर क्लास लेने लगे. रात में ट्रेन या फ्लाइट में सोते, सुबह किसी नए शहर में उतरकर स्टेडियम में हजारों बच्चों को पढ़ाते और शाम को अगली फ्लाइट से एक और शहर पहुंच जाते. बेतहाशा मेहनत ने ही रवींद्रन को मेडल दिया बच्चों के बायजू सर का.
पढ़ने आई थी दिव्या, लेकिन कर बैठे प्यार!
छत से स्टेडियम के बीच रवींद्रन के क्लास रूम में बजा इश्क वाला गिटार. बायजू रवींद्रन के इस विशाल साम्राज्य की नींव में एक बेहद खूबसूरत लव स्टोरी भी छिपी है. 2008 में दिव्या गोकुलनाथ को बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई जाने विदेश जाना था. तैयारी के लिए बायजू रवींद्रन की जीमैट (GMAT) की क्लास में छात्रा बनकर पहुंचीं. पढ़ाते हुए बायजू ने नोटिस किया कि दिव्या में कुछ तो स्पेशल है. उन्होंने दिव्या को पढ़ने के लिए नहीं, पढ़ाने का ऑफर दिया.
इस भरोसे ने दिव्या और बायजू की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. विदेश जाना कैंसल कर दिव्या बायजू की कोर-टीम में शामिल हो गईं. साथ काम करते-करते दोनों गहरे प्यार में डूबते गए. 2009 में शादी कर ली. फिर 2011 में पावर-कपल ने थिंक एंड लर्न नाम से कंपनी बनाई, जो आगे चलकर BYJU'S बनी.
कोरोना काल में मारी बंपर जम्प
2011 में दोनों ने रवींद्रन का विजन था- पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि विजुअल गेम बनाना है. जब 2020 में कोरोना महामारी आई, तो कंपनी एक गोल्ड माइन बन गई. घर बैठे बच्चों के लिए बायजूस एकमात्र सहारा बना. इतना बड़ा ब्रैंड बना कि कंपनी का लोगो टीम इंडिया की जर्सी पर लगा दिया. स्पॉन्सरशिप से कंपनी ने शोहरत पाई लेकिन उसी के 158 करोड़ के बकाया पेमेंट नहीं करने पर कंपनी दिवालिया होने लगी.
BYJU'S के बढ़ने की खबर भारत से बाहर भी पहुंची. मोजाइक, कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी समेत मार्क जुकरबर्ग ने भी कंपनी में अरबों डॉलर पानी की तरह बहाए. 2022 तक बायजूस की वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई और बायजू रवींद्रन देश के सबसे युवा अरबपतियों में शुमार हो गए.
अचानक कैसे कंगाल हुए रवींद्रन?
रवींद्रन और दिव्या ने बस ये गलती की कि सक्सेस अफोर्ड नहीं कर पाए. और ज्यादा सक्सेस और ज्यादा पैसों की हवस ने बायजूस को बनते ही बर्बादी की कगार पर धकेल दिया. पहला डिजास्टर था आकाश एजुकेशन को करीब 8300 करोड़ का कर्ज लेकर खरीदना. दूसरा डिजास्टर तब हुआ जब आरोप लगने कि उनके सेल्स एजेंट पेरेंट्स डराकर कर्ज के जाल में फंसाकर जबरन कोर्स बेच रहे हैं.
सोशल मीडिया पर कंपनी की छवि विलेन जैसी हो गई. फिर अकाउंट्स में हेराफेरी का खुलासा हुआ. एक दिन ईडी ने FEMA के तहत रवींद्रन को घेर लिया और पतन शुरू हो गया. आज की तारीख में इतिहास के सबसे बड़े एडटेक साम्राज्य का राजा पूरी तरह कंगाल हो चुका है. अरबों के मालिक बायजू रवींद्रन की पर्सनल नेटवर्थ अब जीरो है.
जेल तक पहुंच गई बात
सबसे अमीर महिला स्टार्टअप आंत्रप्रेन्योर्स में शुमार दिव्या गोकुलनाथ की पर्सनल नेटवर्थ साढ़े चार हजार प्लस हुई, जो अब तबाह होकर जीरो हो चुकी है. परिवार ने पर्सनल वेल्थ बेचकर भी कंपनी बचाने की कोशिश की लेकिन बहुत देर हो चुकी थी. हम क्लासरूम के लोग हैं, कोर्टरूम के नहीं...ऐसा कहने वाली दिव्या गोकुलनाथ रवींद्रन के साथ दुनिया भर की अदालतों के चक्कर काट रही हैं लेकिन चीजें और खराब होते-होते जेल तक पहुंच गई. दिव्या ने विदेशी कर्जदाताओं को Vulture Lenders बोलकर आरोप लगाया कि उनके पूरे परिवार को डराने और बायजू रवींद्रन को अकेला करने की साजिश रची गई है. रवींद्रन कहीं साबित नहीं कर पा रहे कि जो पैसे उन्होंने बिजनेस एक्सपेंशन के लिए वो गए कहां.
बचपन में चलती ट्रेन के खंभे गिनकर उसकी रफ्तार बताने वाला ये 'मैथ्स विजार्ड ने एक दिन कैलकुलेशन से अरबों का बिजनेस एंपायर तो खड़ा कर दिया लेकिन अपने ही बिजनेस की तबाही की रफ्तार को नहीं भांप पाया? एजुकेशन सिस्टम का भविष्य कहा जाने वाला ये शख्स आज बिजनेस जगत की सबसे बड़ी चेतावनी और बर्बादी की केस स्टडी बन चुका है.
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