ये थोड़ा पुराना टाइप परसेप्शन है कि जो लोग यूट्यूब या सोशल मीडिया पर न्यूज कंटेस्ट या वीडियो बनाते हैं, वो मेनस्ट्रीम मीडिया नहीं हैं. मेनस्ट्रीम मीडिया का मतलब न्यूज चैनल, न्यूज पेपर या मैगजीन माना जाता रहा. नया परसेप्शन कुछ ऐसा बना कि सोशल मीडिया क्रिएटर्स का जमीनी असर मेनस्ट्रीम मीडिया से कहीं ज्यादा बारीक, गहरा बन रहा है. मेनस्ट्रीम मीडिया पर सरकार और बीजेपी की भक्ति करने के आरोप लगते रहे हैं. सोशल मीडिया क्रिएटर्स को मान लिया गया है कि वो खुलकर बोलते हैं जो देखते हैं और सोचते हैं.
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ध्रुव राठी सोशल मीडिया क्रिएटर्स की भीड़ से निकला ऐसा ही एक सुपर स्टार है जिनकी चर्चा अचानक इसलिए और तेज हो गई कि उन्होंने सरकार की नींद उड़ाने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को जॉइन कर दिया. खासकर जर्मनी से बेंगलुरु आकर सीजेपी के शो में भाषण देकर ध्रुव राठी ने भारत में अपनी पहली पॉलिटिकल फॉर्मल एंट्री कराई है. ध्रुव राठी चर्चा में थे. अब चर्चित चेहरा भी हैं क्योंकि कहानी शुरू हुई हरियाणा के रोहतक से जो वाया बर्लिन होते हुए बेंगलुरू के फ्रीडम पार्क और फाइनली दिल्ली के जंतर मंतर तक पहुंच गई. हालांकि उन्हें प्रोटेस्ट से पहले ही डिटेन कर लिया गया. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.
बेंगलुरु में CJP के मंच से ध्रुव राठी ने किया बड़ा ऐलान!
अब तक मोबाइल स्क्रीन पर ही दिखने वाले ध्रुव राठी अचानक जर्मनी से भारत आकर सबको चौंका दिया. बेरोजगारों को कॉकरोच पुकारे जाने, पेपर लीक के बाद सीजेपी अब वोटर लिस्ट की धांधली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल गांधी के शुरू किए आंदोलन के साथ है. ध्रुव राठी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल हुए. बेंगलुरु की भारी भीड़ के सामने ध्रुव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और वोट चोर, गद्दी छोड़ के नारे लगवाए. हालांकि मंच से उन्होंने साफ कहा कि वे किसी रेजीम चेंज यानी सत्ता बदलने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र बचाने के लिए आए हैं.
CJP ने पहली बार दी ध्रुव राठी को मान्यता!
ध्रुव राठी की सिंगल लाइन स्टोरी ये है कि वो जब जर्मनी के बर्लिन में बैठकर अपना कैमरा और माइक ऑन करते हैं तो भारत का राजनीतिक तापमान बढ़ जाता है. वन मैन शो ध्रुव राठी यूट्यूब पर 4 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइवर्स और फॉलोवर्स के साथ सरकार और प्रो-सरकार कैंप की ईंट से ईंट बजाते हैं. ध्रुव राठी इंटरनेट के उस हिस्से के लाडले हैं जिसे देश की मौजूदा सरकार और बीजेपी-आरएसएस से लाख शिकायतें हैं. ऐसे सबकी बैंड बजाने के कारण ध्रुव राठी के बड़े फैन हैं लेकिन ये भी एक सच है कि ग्राउंड पर सरकार-बीजेपी से लड़ने वाले राहुल गांधी या कांग्रेस ने अभी तक उन्हें अपना नहीं बनाया. पहली बार सीजेपी और अभिजीत दिपके ने ध्रुव राठी को अपना मंच देकर मान्यता दी है.
एक इंजीनियर जो फोटोग्राफी व्लॉगर बना, और आज देश की राजनीति को हिलाने वाला सबसे बड़ा डिजिटल एक्टिविस्ट बन चुका है. ध्रुव राठी की विचारधारा से कोई सहमत हो सकता है या असहमत, लेकिन इस सच से आंखें नहीं मूंद सकता कि आज बिना किसी राजनीतिक दल या पद के भी, वो देश की राजनीति के सबसे बड़े नैरेटिव सेटर्स में से एक बन चुके हैं.
कौन हैं ध्रुव राठी?
ध्रुव राठी का जन्म 1994 में हरियाणा के रोहतक में पढ़े-लिखे हिंदू जाट परिवार में हुआ. पिता महावीर राठी, मां उर्मिला राठी एक स्कूल टीचर रहीं. नाना इंडियन आर्मी में रहे जो उनके साथ ध्रुव ने देश में खूब सैर भी की, देश के हालात-मिजाज को समझा भी. 2002 में उनका परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया. पिता को मलेशिया के कुआलालंपुर में नौकरी मिल गई. इसी शिक्षित और कामकाजी पारिवारिक बैकग्राउंड ने ध्रुव को पढ़ाई में आगे बढ़ने और जर्मनी जाकर हायर एजुकेशन हासिल करने का मजबूत आधार दिया.
ध्रुव राठी ने जर्मनी के प्रतिष्ठित Karlsruhe Institute of Technology (KIT) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर्स और रिन्यूएबल एनर्जी में मास्टर्स डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात जर्मन लड़की जूली ल्वर से हुई, जिसके साथ उनके लाइफ लॉन्ग रिलेशनशिप बनी. ध्रुव ने भारत लौटने का इरादा छोड़ दिया. परमानेंटली पत्नी, बच्चे के साथ बर्लिन में बस चुके हैं.
ध्रुव राठी और जूली ल्वर की लव-स्टोरी!
राजनीतिक बवंडरों के बीच ध्रुव राठी के निजी जीवन को स्थिरता देने वाला सबसे बड़ा नाम है उनकी पत्नी जूली ल्वर (Juli Lbr). जर्मनी के बिजनेसमैन फैमिली की लड़की जूली मेडिकल स्टूडेंट रहीं. मेडिकल फील्ड में करियर बनाते हुए क्रिएटिव भी रहीं. शौक से फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी करती रहीं. जब ध्रुव ने ट्रैवल व्लॉगिंग की शुरुआत की थी, तब जूली कैमरे के पीछे रहकर उनके वीडियो शूट करने में मदद करती थीं. धीरे-धीरे खुद कैमरे के सामने आईं और आज खुद भी एक पॉपुलर सोशल मीडिया पर्सनैलिटी और व्लॉगर हैं, जो ध्रुव के इंटरनेशनल ट्रैवल व्लॉग्स का मेन अट्रैक्शन मानी जाती हैं.
2014 में जर्मनी में पढ़ाई के दौरान ध्रुव और जूली किसी ट्राम में ट्रैवल करते हुए मिले. दोनों बाली उम्र के थे 19-19 साल के. कॉलेज जाने के दौरान रोज ट्राम में ट्रैवल करते मिलने लगे. पहले दोस्ती हुई, फिर प्यार होने लगा. करीब 5 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद, 2019 के वैलेंटाइन डे पर ध्रुव ने जूली को शादी के लिए प्रपोज़ किया. करीब 7 साल के लंबे रिलेशनशिप के बाद, इस कपल ने 24 नवंबर 2021 को ऑस्ट्रिया के वियना में शादी की. 2022 में राजस्थान आकर दोनों ने पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों और सात फेरों के साथ दोबारा शादी रचाई. 2024 में दोनों ने पहले पहले बच्चे को जन्म दिया.
इंजीनियरिंग करने के बाद यूट्यूबर बने ध्रुव
आप जो पढ़ते हैं, जो करना चाहते हैं जरूरी नहीं कि वही आपकी डेस्टनी हो. ध्रुव राठी ने इंजीनियर बनने की डिग्री की लेकिन डेस्टनी उन्हें यूट्यूब की ऐसी दुनिया में ले आई जहां से कभी लौट नहीं पाए. यूट्यूबर बनने के बाद ध्रुव फोटोग्राफी टिप्स, ट्रैवल व्लॉग्स बनाने लगे लेकिन कलेजे की ठंडक के लिए इतना काफी नहीं था.
2014 के बाद भारत देश बदलने लगा था. मोदी सरकार, बीजेपी के कमान संभालने के साथ देश में अलग-अलग की बहस, विवादों ने जन्म दिया. ध्रुव राठी ने भारत की जमीन छोड़ी थी, भारत नहीं छोड़ा था. उन्होंने यूट्यूब पर करंट अफेयर्स यानी भारत की राजनीति पर वीडियो बनाने शुरू किए. फैक्ट-बेस्ड ब्लैकबोर्ड स्टाइल प्रेजेंटेशन से उनके वीडियो वायरल होने लगे. उस दौर से पहले भी यूट्यूब भारत में शुरू हो चुका था लेकिन राजनीतिक चर्चाओं का मंच नहीं बना था.
ध्रुव को क्यों कहा जाता है सरकार विरोधी?
न्यूज चैनलों पर डिबेट कल्चर ने जन्म लिया जिसने आगे चलकर चीख-चिल्लाहट का रुप ले लिया. उस दौर में ध्रुव इसलिए यूट्यूब ऑडियंस के बीच चल पड़े कि वो बिना चिल्लाए, स्क्रीन पर सरकारी डेटा, ग्राफिक्स और अखबारों की कतरनें दिखाकर देश की बातें समझा रहे थे. जटिल मुद्दों को सरल हिंदी में समझाने के इसी अंदाज ने उन्हें पहली बार देश के युवाओं के बीच सबसे चर्चित चेहरा बना दिया. आगे फिर कुछ जो हुआ जो ध्रुव राठी के एंबियंस या उनके स्कीम्स ऑफ थॉट में शामिल नहीं था.
बीते कुछ सालों में ध्रुव राठी मामूली यूट्यूबर से कहीं आगे निकल गए. उनकी ब्रैंडिंग भारत में 'एंटी-एस्टेब्लिशमेंट' यानी सरकार विरोधी होने लगी. ध्रुव राठी के चेहरा और आवाज ने उन्हें सरकार-बीजेपी विरोध का सबसे बड़े पोस्टर बॉय बना दिया. आगे सरकार बहुत कुछ ऐसा करती रही जिसके खिलाफ देश में खूब सारी बहस, गरमागर्मी हुई. ध्रुव राठी ने सरकार विरोध का नब्ज पकड़ लिया.
विपक्ष पर साधते हैं निशाना!
नोटबंदी, जीएसटी, इलेक्टोरल बॉन्ड और 'क्या भारत तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है? जैसे ताबड़तोड़ वीडियो पेश करके करोड़ों की व्यूअरशिप बटोरी. ध्रुव राठी आरोपों से घिरे कि पक्षपाती हैं, केवल पीएम मोदी, केंद्र सरकार और बीजेपी को निशाना बनाते हैं. ऐसा नहीं कि ध्रुव राहुल गांधी या कांग्रेस के कोई भक्त हों. उन्होंने अपनी पॉडकास्ट चर्चाओं में कई बार कांग्रेस की खुलकर आलोचना की. उसे Reactive पार्टी बताते हुए कहा विपक्ष हमेशा सत्तापक्ष की गलतियों का इंतजार करता है, जबकि उन्हें खुद की विकासऔर प्रगतिशील नीतियां लेकर जनता के बीच आना चाहिए.
क्यों सरकार नहीं कर पाई ध्रुव राठी को खामोश?
ध्रुव राठी को सपोर्ट वहां से मिलने लगा जिन्होंने मान लिया कि जो काम विपक्ष और मेन स्ट्रीम मीडिया को करना चाहिए था, वो ध्रुव अकेले अपने कैमरे, माइक के दम पर कर रहे हैं. विपक्ष से भी बड़ी पहुंच रखने के दावे के साथ ध्रुव आज देश के सबसे बड़े पॉलिटिकल कमेंटेटर बन चुके हैं. इस सरकार पर ये आरोप भी लगते हैं कि उनसे मीडिया का दमन किया लेकिन ध्रुव राठी सरकार के किसी चक्रव्यूह में नहीं फंस पाए.
ताकतवर सरकार चाहकर भी ध्रुव राठी को आसानी से खामोश क्यों नहीं कर पाई. ध्रुव राठी के अपने बनाए हुए कई सिक्योरिटी कवर हैं कि कोई उनकी आवाज दबा नहीं सकता. पहला कवच है भौगोलिक दूरी, वो जर्मनी में रहते हैं, जहां भारत की पुलिस या कानून उन पर शिकंजा नहीं कस सकते. दूसरा कवच है विदेशी टेक नीतियां, यूट्यूब और एक्स (X) जैसी अमेरिकी कंपनियां फ्रीडम ऑफ स्पीच को तवज्जो देती हैं, इसलिए सरकार पूरे चैनल को ब्लॉक नहीं करवा पाती.
और तीसरा सबसे बड़ा कवच है उनकी भाषा की चतुराई, वो अपने वीडियो में कभी भी गाली-गलौज या असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे उन पर हेट स्पीच या देशद्रोह का सीधा मुकदमा टिक सके. सरकार के ही आंकड़ों को सरकार के खिलाफ हथियार बनाते हैं, जिसकी काट सरकार नहीं निकाल पाई. चूंकि ध्रुव राठी जर्मन नागरिक हैं इसलिए उनके खिलाफ जांच की मांग हुई है. बीजेपी नेता और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भास्कर राव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर ये जांच की मांग की है कि क्या कोई विदेशी नागरिक भारत में राजनीतिक प्रदर्शनों में हिस्सा ले सकता है.
ध्रुव राठी की USP!
ध्रुव राठी की असली यूएसपी (USP) शांत रहकर, गहराई से रिसर्च कर डेटा प्रस्तुत करना है, जो आज की 'Gen-Z' पीढ़ी को सीधे कनेक्ट करता है. अपने कई चैनलों, पेड कोर्सेज, पॉडकास्ट और प्रीमियम स्पॉन्सरशिप के जरिए ध्रुव राठी करोड़ों रुपये की नेटवर्थ के मालिक हैं, जो उन्हें भारत के सबसे अमीर और सबसे प्रभावशाली डिजिटल क्रिएटर्स की फेहरिस्त में सबसे आगे खड़ा करती है.
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