Charchit Chehra: ज्ञानेश कुमार पर निशाना था, फिर बीच में कैसे आ गईं डॉ. सीमा खन्ना? जानिए आखिर कौन हैं वो

रूपक प्रियदर्शी

• 12:06 PM • 15 Oct 2026

Charchit Chehra Seema Khanna: डॉ. सीमा खन्ना कौन हैं और ECINET विवाद में उनका नाम कैसे आया? जानिए चुनाव आयोग की IT प्रमुख पर विपक्ष के आरोप, वोटर लिस्ट में बदलाव के दावे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद की पूरी कहानी.

Seema Khanna Biography
चुनाव आयोग में डायरेक्टर जनरल (आईटी) सीमा खन्ना आई चर्चा में
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राजनीति के मैदान में अब तक सारे निशाने, सारे तीर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर साधे जा रहे थे. विपक्ष हर मंच से सीधे ज्ञानेश कुमार को घेर रहा था. लेकिन अचानक इस पूरे राजनीतिक चक्रव्यूह में एक ऐसा नाम सामने आया है जिसके बाद दिल्ली से लेकर देहरादून तक भूचाल मचा है. कहानी है डॉ. सीमा खन्ना की. देश की चर्चित चेहरा बनी हैं सीमा खन्ना, जो कि चुनाव आयोग में डायरेक्टर जनरल (आईटी) हैं. 

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चुनाव आयोग के जिस ऐप ECINET से 13 करोड़ प्लस वोटर्स के नाम काटे-छांटे जाने के आरोप लग रहे हैं, वो ऐप सीमा खन्ना के फिंगर प्रिंट से चलता है. एक सरकारी अफसर अचानक देश की राजनीति के सेंटर में आ गई हैं लेकिन अभी इस सवाल का जवाब नहीं कि सीमा खन्ना सचमुच इस पूरे खेल की विलेन हैं, या फिर चुनाव आयोग के भीतर छिड़ी भयंकर अंदरूनी जंग और पावर स्ट्रगल की विक्टिम? क्या सीमा खन्ना के नाम और सामने आए खेल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए कवच बन रहे हैं? सीमा खन्ना इस स्थिति में पहुंच गई हैं कि उन पर देहरादून के पहाड़ों में छिपने या भगोड़े होने जैसे के आरोप लगाए जा रहे हैं. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.

2025 में डेपुटेशन पर लाया गया था चुनाव आयोग!

डॉ. सीमा खन्ना पर लगे आरोप सीरियस से सिवियर स्टेज में आ चुके हैं. वो भी जबकि कोई नेता नहीं या आईएएस नहीं. बल्कि बस सीनियर सरकारी अफसर और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट हैं. चुनाव आयोग में डायरेक्टर जनरल (IT) हैं. इस नाते चुनाव आयोग के ऐप ECINET की चीफ हैं. 2025 में उन्हें नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) से डेपुटेशन पर चुनाव आयोग में लाया गया था. ठीक उसी साल ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त का चार्ज संभाला था. तब उन्हें भी पता नहीं होगा कि जो टेक्नालॉजी उनकी ताकत थी, वही उनके करियर का सबसे बड़ा राजनीतिक तूफान बन जाएगी.

कौन हैं सीमा खन्ना?

डॉ. सीमा खन्ना के बचपन, शुरुआती स्कूलिंग और परिवार का कोई भी निजी या डिटेल पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है. जो जानकारी मिलती है उसके मुताबिक डॉ. सीमा खन्ना स्ट्रॉन्ग एजुकेशन बैकग्राउंड से आती हैं. आईटी से इतना प्यार कि उन्होंने बीटेक, एमटेक के बाद पीएचडी भी की. 

सरकार में सीमा खन्ना की पोस्टिंग करीब 25 साल पहले भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) में शामिल हुईं. उनके पास नेटवर्क, साइबर सिक्योरिटी, डायरेक्टरी सर्विसेज और डेटा सेंटर ऑपरेशंस का 25 साल से भी ज्यादा का व्यापक अनुभव है. एनआईसी में काम करते हुए डिप्टी डायरेक्टर जनरल (DDG) और National Knowledge Network की ऑपरेशंस डायरेक्टर जैसे बेहद शक्तिशाली और जिम्मेदार पदों पर पहुंचीं. एनआईसी में ही रहते हुए उन्होंने देश के सबसे बड़े कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप आरोग्य सेतु को डिजाइन, डेवलप करने वाले कोर टीम में रहीं. कुल मिलाकर सीमा खन्ना आम सरकारी अधिकारी हैं जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर सरकार के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करती रहीं. 

राहुल गांधी ने बिना नाम लिया साधा निशाना!

चुनाव आयोग में पोस्टिंग ही सीमा खन्ना के लिए लाइफ चेंजिंग साबित हुआ. आज राहुल गांधी सीमा खन्ना का जिक्र कर रहे हैं. चल रहा हंगामा और बड़ा हुआ जब इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'देहरादून में छिपी महिला' का जिक्र किया. हालांकि राहुल गांधी ने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन विपक्ष के हमलों की क्रोनोलॉजी बताती है कि उनका इशारा सीमा खन्ना की तरफ ही था, जिन पर विपक्ष 'वोट चोरी के लिए डिजिटल सिस्टम बदलने' के गंभीर आरोप लगा रहा है. राहुल गांधी ने खुलकर सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के अपने कमिश्नरों की चेतावनियों के बावजूद ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव करने और स्थानीय अधिकारियों के कानूनी अधिकार सीमित करने के निर्देश किसने दिए थे?

कैसे शुरू हुई सीमा खन्ना की चर्चा?

इलेक्शन कमीशन के अंदर से उठ रहे सवालों ने इस नाम को एक मिस्ट्री बना दिया है. सीमा खन्ना की कहानी तब सामने नहीं आई जब तक सारे आरोप ज्ञानेश कुमार पर लग रहे थे. सीमा खन्ना लाइमलाइट में आईं इंडियन एक्सप्रेस के विस्फोटक खुलासे से. इंडियन एक्सप्रेस की ही रिपोर्ट ने सबसे पहले डॉ. सीमा खन्ना का नाम और उनकी टीम से किए जा रहे 'डिजिटल सेंट्रलाइजेशन' के खेल को उजागर किया, जिसे बाद में विपक्ष ने लपक लिया और जो आज राहुल गांधी के 'देहरादून सीक्रेट' वाले बड़े सियासी हमले का आधार बन चुका है. हालांकि जो भागे होते हैं उनका मोहल्ला इतनी आसानी से पता नहीं चलता.

रिपोर्ट में सीमा खन्ना के बारे में क्या किया गया दावा?

रिपोर्ट ने चुनाव आयोग के सबसे सुरक्षित लॉकर को तोड़कर वो फाइलें बाहर निकाल दीं, जो अब तक दबाकर रखी गई थीं. रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो मौजूदा चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं. इसी मीडिया इन्वेस्टिगेशन ने देश को बताया कि कैसे गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सीमा खन्ना को भेजी गई 8 चिट्ठियों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और 97 योग्य नागरिकों का वोटिंग अधिकार सॉफ्टवेयर की बंदिशों की वजह से छीन लिया गया. 

क्या है सीमा खन्ना पर आरोप?

चुनाव आयोग के पास स्टाफ का अपना कोई बहुत बड़ा स्थायी कैडर या विशाल फौज नहीं होता. दिल्ली वाले मुख्यालय में करीब 550 लोग काम करते हैं. यही छोटा सा परमानेंट स्टाफ दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी मशीनरी को कंट्रोल करता है. चुनाव आयोग की डायरेक्टर जनरल (IT) की हेड होने के नाते उनके जिम्मे देश के करीब 100 करोड़ मतदाताओं के पूरे डेटा को संभालने और करेक्ट करने का जिम्मा था. 

चुनाव आयोग के करीब 40 अलग-अलग ऐप्स और पोर्टलों को एक ही जगह समेटकर उन्होंने जनवरी 2026 में विवादित ECINET ऐप और ERONet सॉफ्टवेयर लॉन्च किया, जिसने उन्हें इस बड़े राजनीतिक और आंतरिक विवाद के केंद्र में ला खड़ा किया है. तब दावा था कि ट्रांसपरेंसी आएगी. अब विपक्ष का आरोप है कि  सॉफ्टवेयर के जरिए 'सेंट्रलाइजेशन ऑफ डेटा' यानी पूरे देश की वोटर लिस्ट का रिमोट कंट्रोल दिल्ली के एक बंद कमरे में ला दिया गया. 

बड़े सारे आरोप ज्ञानेश कुमार पर लगे. सीमा खन्ना पर माइक्रो आरोप लगे कि उन्होंने ही ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले चुनाव अधिकारियों EROs के कानूनी अधिकार छीन लिए. पहले वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने का अधिकार स्थानीय अधिकारियों के पास होता था, लेकिन ईसीआईनेट के आने के बाद इसका पूरा कंट्रोल दिल्ली में बैठे आईटी विभाग और सीमा खन्ना की टीम के हाथों में सेंट्रलाइज्ड हो गया. इसका बड़ा सबूत बना गोवा के 97 वोटर्स के नाम काटने का विवाद. 

विपक्ष और सिविल सोसाइटी (CJP) का आरोप है कि सीमा खन्ना के साफ्टवेयर  के जरिए  ड्राफ्ट रोल से करीब 13 करोड़ वोटरों के नाम डिलीट या हेरफेर किए गए. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि 1 अक्टूबर 2025 के बाद के ECINet के सभी सर्वर लॉग्स, एडमिन क्रेडेंशियल्स और डेटाबेस चेंज हिस्ट्री की SIT जांच कराई जाए.

निशाने पर ज्ञानेश कुमार तो सीमा खन्ना बीच में कैसे आईं?

अब आते हैं उस सबसे बड़े सवाल पर कि क्या ज्ञानेश कुमार पर निशाना था और सीमा खन्ना बीच में आ गईं? इनसाइड स्टोरी ये है कि यह सिर्फ विपक्ष की लड़ाई नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग के अंदर छिड़ा हुआ गृहयुद्ध भी है. चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बकायदा कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखकर चुनाव आयोग के ऐप ईसीआईनेट की शिकायत कैबिनेट सचिव से की थी. दोनों का ऐतराज था कि सीमा खन्ना की आईटी विभाग की फाइलें नियमों के मुताबिक सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संजय कुमार के जरिए रूट नहीं हो रही थीं, बल्कि सीधे टॉप लेवल पर जा रही थीं.

चुनाव आयोग पर लगे तमाम आरोप सही दिख रहे हैं, सही साबित नहीं हुए हैं. ज्ञानेश कुमार बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहे थे, ये भी आरोप हैं. सीमा खन्ना ECINET के जरिए जो कर रही थी वो भी आरोप हैं. ये साबित होना बाकी है कि क्या वो जो रही थी वो ज्ञानेश कुमार के आदेश या सहमति से कर रही थी या उनका सिस्टम अलग चल रहा था जिसके बारे में तीन चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं थी. मीडिया रिपोर्ट से ये इशारा मिला कि कम से कम विवेक जोशी और एसएस संधू की तो सहमति नहीं थी. इसीलिए ये सवाल है कि कहीं सीमा खन्ना सरकारी कर्मचारी होने के नाते चुनाव आयोग के अंदरूनी पावर-स्ट्रगल का शिकार होकर विलेन तो नहीं बन गईं? नाम लेकर सीमा खन्ना के बचाव में चुनाव आयोग ने आजतक कुछ नहीं कहा है लेकिन आरोपों को खारिज करते कहा कि सभी फैसले आपसी सहमति से होते हैं और नया डिजिटल ढांचा पूरी तरह पारदर्शी है. खुद सीमा खन्ना भी चुप हैं.

क्या सीमा खन्ना का होगा इस्तीफा?

जब तक यह नया सॉफ्टवेयर चल रहा था, यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए एक तकनीकी कवच बना हुआ था. कोई भी सवाल उठता, तो उसे 'तकनीकी अपग्रेड' का नाम दे दिया जाता लेकिन जैसे ही जमीनी स्तर पर शिकायतें बढ़ीं, सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा और दोनों चुनाव आयुक्तों ने बगावत की, तो पासा पलट गया. सोशल मीडिया पर ऐसी भी अटकलें चलने लगी हैं कि सीमा खन्ना का इस्तीफा लिया जा रहा है या उन्हें पद छोड़ने को कह दिया गया है, ताकि जनता के बीच चुनाव आयोग की इमेज बची रहे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कोई आंच न आए. सचमुच कहीं कुछ ऐसा हो रहा तो सीमा खन्ना चुनाव आयोग की परफेक्ट Fall Gal यानी बलि का बकरा बन सकती हैं. 

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