Charchit Chehra: फूड माफियाओं पर ताबड़तोड़ छापेमारी से बने सोशल मीडिया हीरो, कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे जिनका 21 साल में 25 बार हुआ ट्रांसफर?

रूपक प्रियदर्शी

• 09:04 AM • 14 Aug 2026

Charchit Chehra IAS Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र के चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं. FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद उन्होंने मिलावटखोरों और फूड माफियाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की है. जानिए किसान परिवार से IAS बनने तक की उनकी पूरी कहानी, बार-बार ट्रांसफर की वजह, विवादों से भरा करियर और फूड माफियाओं के खिलाफ उनके मौजूदा अभियान की पूरी कहानी.

IAS Tukaram Mundhe News
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अगर सरकारी अफसर अच्छे से ईमानदारी से ड्यूटी करने लगे तो कोई सरकार खुश तो हो सकती है लेकिन उसकी खुशियां लंबे समय तक टिक नहीं सकती. अच्छा काम करने वाला अफसर ही एक दिन सरकार की लायबिलिटी बन जाता है क्योंकि उसके अच्छे काम से जो बड़े लोग परेशान होते हैं उनकी पहुंचे सीधे सरकार और पार्टी तक होती है. राजनीति इसी संतुलन का नाम है. सबको खुश, संतुष्ट रखने के लिए एक दिन उसी अफसर को अच्छे काम की मिलती है सजा. अफसर आईएएस टाइप हो तो ज्यादा से ज्यादा ट्रांसफर करके प्रताड़ित किया जा सकता है. 

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क्या महाराष्ट्र के वायरल और अचानक चर्चित चेहरा बने आईएएस तुकाराम मुंढे के साथ यही होने वाला है? ये सवाल इसलिए कि तुकाराम मुंढे ने काम ही ऐसा किया है ईमानदारी से ड्यूटी वाला जिसकी खूब वाहवाही हो रही है. इसका हश्र भोगते रहे हैं. कतई कोई गारंटी नहीं कि उन्हें सजा ही मिलेगी. कतई इसकी भी कोई गारंटी नहीं कि एक दिन ऐसा नहीं आएगा जब तुकाराम मुंढे का 26वां ट्रांसफर नहीं होगा. जीआर खैरनार, समीर वानखेड़े और खुद तुकाराम-महाराष्ट्र के ही ऐसे अफसरों की लंबी लिस्ट है. 

अजय देवगन ने सिंघम फिल्म में ईमानदारी से पुलिस की ड्यूटी की तो हर ईमानदार अफसर को जनता सिंघम पुकारने लगी. लोग बेकरार हैं ऐसे और बहुत सारे सिंघम्स को अपने बीच देखने के लिए. तुकाराम मुंढे भी एक सिंघम ही हैं जो पुलिस की वर्दी में तो नहीं, पैंट शर्ट पहनकर फूड माफिया की जान के पीछे पड़े हैं ताकि लोगों की जान सलामत रहे. चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानेंगे IAS तुकाराम मुंढे की पूरी कहानी.

FDA का कमिश्नर बनते ही एक्शन शुरू!

महाराष्ट्र में मिलावटखोरों के खिलाफ तुकाराम ने युद्ध छेड़ा है जिसकी चर्चा मुंबई से निकलकर सारे देश में हो रही है. महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर का पद संभालते ही मिलावटखोरों और फूड माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई (Massive Crackdown) शुरू कर दिया.

2-3 महीनों के भीतर उनकी टीम ने पूरे महाराष्ट्र में 1,100 से अधिक होटलों, रेस्टोरेंट्स और बड़े आउटलेट्स पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. अमेजन और ब्लिंकिट के गोदामों पर भी हाथ डाला. एक ग्राहक की शिकायत पर रिलायंस रिटेल के आउटलेट पर छापा मारकर कीड़े वाले 54 'काजू कतली' के डिब्बे जब्त किए. डोमिनोज के 4 बड़े आउटलेट्स के फूड लाइसेंस सस्पेंड किए. मैकडॉनल्ड्स सबवे केएफसी जैसे फूड चेन्स भी एक्शन की चपेट आ चुके.

प्राइवेट के साथ-साथ सरकारी कैंटींस पर भी रेड

ऐसे एक्शन से घटिया सप्लाई करने वाले माफियाओं को मिर्ची लगनी ही थी. बॉम्बे हाई कोर्ट में शिकायत हुई. कोर्ट ने सवाल उठाया कि एफडीए की मुहिम सिर्फ प्राइवेट वालों के लिए हैं या सरकारी कैंटींस की भी जांच होती है. तुकाराम और डेयरिंग हो गए. अगले ही दिन बॉम्बे हाई कोर्ट परिसर की तीन कैंटीनों पर रेड डाल दी. जांच में पता चला कि दो कैंटीन बिना FSSAI लाइसेंस के चल रहे थे. कोर्ट परिसर की दोनों कैंटींस पर फौरन ताला जड़ दिया. तीसरे के हिस्से में सावधानी बरतने का नोटिस आया. तुकाराम मुंढे ने सिस्टम को मैसेज दे दिया कि उनके लिए कोई वीवीआईपी या सरकारी ऑफिस कानून से ऊपर नहीं. 

हाईकोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने तुकाराम मुंढे के काम की तो तारीफ की, लेकिन आक्रामक और कार्य-प्रणाली संबंधी नियम-भंग (Procedural Violations) पर गंभीर आपत्ति जताई. कहा कि आपके पास नियमों को लागू करने की और तलवार चलाने की पूरी ताकत है, लेकिन समस्या यह है कि आप एक छोटे से मच्छर को मारने के लिए भी तलवार का इस्तेमाल कर रहे हैं. प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल सोच-समझकर और उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए. चाहे होटल-रेस्टोरेंट का मामला हो या कंपनियों का, आपका रवैया ऐसा है कि 'पहले गोली मारो, बाद में सवाल पूछो'.

21 साल के करियर में 25 बार ट्रांसफर, सोशल मीडिया पर बने हीरो!

तुकाराम मुंढे की रेड से करोड़ों रुपये का नकली पनीर, मिलावटी घी, गुटखा और एक्सपायर्ड फूड प्रोडक्ट्स जब्त हुआ. उन्होंने महाराष्ट्र में सिंथेटिक पनीर सीधे बैन कर दिया. कुछ महीनों में तुकाराम ने घटिया खाने को लेकर 235 एफआईआर और 350 से ज्यादा गिरफ्तारियां करके तहलका मचा दिया है. सोशल मीडिया पर तुकाराम एकदम हीरो बन गए हैं. 

तुकाराम मुंढे जो अब कर रहे हैं वैसा कुछ पहले भी कर चुके हैं और ढेर सारी पनिशमेंट भी भुगत चुके हैं. 21 साल के आईएएस करियर में 25 से ज्यादा बार ट्रांसफर हो चुका है. औसतन हर 9-10 महीने में उनका बोरिया-बिस्तर समेट दिया जाता है. नवी मुंबई, नागपुर, नासिक, सोलापुर और पुणे, जहां भी गए, नेताओं और माफियाओं से उनका सीधा टकराव हुआ. 

कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे!

मुंढे का उसूल नियमों से समझौता न करना, राजनीतिक दबाव के आगे न झुकना उनके दो दर्जन ट्रांसफर का कारण बनता आ रहा है. महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक जितेंद्र आव्हाड ने दावा किया कि इंटरनेशनल ड्रग लॉबी मुंढे के ट्रांसफर के लिए करोड़ों रुपये का फंड जुटा रही है. 

तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र की ही पैदाइश हैं. उनके कम से कम अपने राज्य के धंधों के गोरखधंधे का तो अच्छे से पता होगा. बीड जिले के सोना गांव के किसान परिवार में जन्म लेकर तुकाराम महाराष्ट्र में ही आईएएस अफसर बने. आगे बढ़ने के संघर्ष के साथ उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में एमए किया. यूजीसी-जेआरएफ की परीक्षा भी पास की. आईएएस बनने के लिए यूपीएससी की तैयारी में बहुत कुछ झोंक दिया. कई अटेम्ट में फेल होने के बाद 2005 में ऑल इंडिया रैंक 20 के साथ आईएएस बने. 

तुकाराम का विवादों से भरा करियर

तुकाराम मुंढे के करियर का हर पन्ना किसी न किसी बड़े विवाद और जनता के लिए किए गए कामों से भरा है. तुकाराम को वाटरमैन ऑफ महाराष्ट्र भी कहा जाता हैं. जब सोलापुर के कलेक्टर थे, तब उन्होंने 'जलयुक्त शिवार' योजना के तहत 300 से अधिक गांवों को पानी के टैंकरों के जाल से मुक्त कराया था. अवैध रेत खनन माफिया की रीढ़ तोड़ दी तो ट्रांसफर हुआ.  नवी मुंबई म्युनिसिपल कमिश्नर रहते हुए उन्होंने बिल्डरों से सरकारी जमीन मुक्त कराई तो सजा हुई. नगर निगम के भ्रष्टाचार को रोकने ओपन-डोर जनता दरबार शुरू किया तो सब पार्टियों ने अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया. स्वास्थ्य विभाग के कमिश्नर रहते हुए सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस तो ट्रांसफर हुआ. 

तुकाराम के समर्थन में आए परेश रावल?

तुकाराम नॉन स्टॉप अपनी ड्यूटी पर लगे हैं लेकिन उन पर नजर रखने वाले इस आशंका से डरे हैं कि क्या एक ईमानदार अफसर को अपना काम करने की आजादी मिलेगी या फिर सिस्टम उन्हें एक और ट्रांसफर का इनाम देगा? ऐसी आशंका से सहमे बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और पूर्व बीजेपी सांसद परेश रावल ने आईएएस तुकाराम मुंढे के समर्थन में सीधे महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से अपील कर दी है कि ट्रांसफर न करना, तुकाराम मुंढे की रक्षा करना मुख्यमंत्री का शासन धर्म होना चाहिए. बड़े बिजनेसमैन हर्ष गोयनका ने भी कहा कि जो अफसर रिश्वत ठुकराते हैं और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाते हैं, उन्हें सिस्टम में सुरक्षा मिलनी चाहिए. 

कुछ दिन पहले पुणे में आयोजित बड़े टॉक शो अनस्टॉपेबल तुकाराम में जब मंच पर पहुंचे, तो लोगों ने कई मिनटों तक उनके लिए तालियां बजाईं. भावुक कर देने वाले इस सम्मान पर मुंढे ने मुस्कुराते हुए कहा कि, 'लोग कहते हैं कि बार-बार होने वाले तबादलों से अधिकारी का मनोबल टूट जाता है, लेकिन मेरा मानना है कि जितने ज्यादा ट्रांसफर होंगे, मुझे समाज में उतने ही ज्यादा सकारात्मक बदलाव करने के मौके मिलेंगे. उन्हें अफसोस सिर्फ ये कहा कि 21 साल में 25 ट्रांसफर्स के कारण वो बच्चों को स्थिर बचपन नहीं दे सके. जान से मारने की धमकियों के कारण परिवार को पुलिस पहरे में रहना पड़ा.'

गजब की है तुकाराम की लोकप्रियता!

तुकाराम मुंढे की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल में उन पर लिखी गई एक जीवनी 'तुकाराम' रिलीज हुई. पत्रकार शफी पठान द्वारा लिखी गई इस किताब ने बाजार में आते ही तहलका मचा दिया और महज कुछ ही हफ्तों के भीतर 1 लाख से अधिक कॉपियां बिक गईं. किसी प्रशासनिक अधिकारी की जीवनी का इतनी बड़ी संख्या में बिकना भारतीय इतिहास में एक दुर्लभ रिकॉर्ड है.

सीएम फडणवीस के खास हैं तुकाराम?

तुकाराम मुंढे जैसे लोग किसी भी पार्टी की पसंद नहीं बनते. उन्होंने 21 साल में कांग्रेस-एनसीपी, शिवसेना-बीजेपी की सरकारों की प्रताड़ना झेली. हालांकि देवेंद्र फडणवीस को उनके समर्थकों में गिना जाता है. 2016 में जब नवी मुंबई नगर निगम में एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना ने मुंढे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया था, तब तत्कालीन सीएम फडणवीस ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर उस प्रस्ताव को खारिज कर मुंढे को कहर से बचाया था. 

तुकाराम सरकारी नौकर हैं. जो ड्यूटी सरकार ने देख रखी है वही तो कर रहे हैं. जनता जब वाहवाही कर रही है तब सीएम देवेंद्र फडणवीस पर मल्टी कॉर्नर प्रेशर बढ़ता जा रहा है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ रोकने वाले इस सिंघम अफसर को रक्षा, सुरक्षा, शक्ति देकर और फ्री-हैंड दिया जाए.

तुकाराम बीजेपी के असेट या लायबिलिटी?

जनता की नजरों में हीरो बन चुके आईएएस तुकाराम मुंढे बीजेपी सरकार के लिए दोधारी तलवार की तरह हैं. सरकार के लिए असेट तो साबित हो रहे क्योंकि मिलावटखोरों के खिलाफ पहली बार किसी ने इतना कड़क एक्शन लिया है. तुकाराम के कारण जनता के बीच सरकार की भ्रष्टाचार-मुक्त और जन-हितैषी छवि मजबूत हो रही है लेकिन राजनीतिक रूप से लायबिलिटी भी बनते जा रहे हैं. ताबड़तोड़ बड़े लोग, बड़े ब्रैंड्स को टारगेट करने से  सरकार के लिए तुकाराम मुंढे को संभालना प्रशासनिक से ज्यादा एक बड़ा राजनीतिक असमंजस बन चुका है.

IAS तुकाराम मुंढे के इस महा-अभियान में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का एंगल सबसे चौंकाने वाला साबित हुआ है. जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंढे की धड़ाधड़ छापेमारी पर सख्त टिप्पणी की तब एकनाथ शिंदे ने तुकाराम मुंढे की पीठ थपथपाते हुए फ्री हैंड का ऐलान किया. शिंदे ने मुंढे से कहा कि नकली पनीर और मिलावटी दूध बेचने वालों के खिलाफ सीधे मकोका यानी संगठित अपराध कानून के तहत सख्त केस दर्ज किए जाएं, गैर-जमानती धाराएं लगाई जाएं. कानूनी दांव-पेंचों से बचने के लिए शिंदे ने एफडीए (FDA) के लिए देश के नामी वकीलों की विशेष लीगल टीम (Special Legal Shield) भी बनवा रहे हैं. 

यह कड़वा सच है कि व्यवस्था में जब कोई अधिकारी बिना किसी भेदभाव के पूरी ताकत से कानून लागू करने लगता है, तो वह सिस्टम के शक्तिशाली चेहरों के लिए असहजता पैदा कर देता है. तुकाराम मुंढे के साथ भी अब तक यही होता आया है. तुकाराम भी अपनी भावी संभावनाओं के लिये तैयार होंगे. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? एक और ट्रांसफर? 

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