Charchit Chehra: कौन हैं IPS विश्वास नांगरे पाटिल? नागपुर के नए पुलिस कमिश्नर बनते ही क्यों शुरू हुआ 'सफ्रॉन शैडो' का विवाद

IPS Vishwas Nangare Patil Biography: IPS विश्वास नांगरे पाटिल को नागपुर का नया पुलिस कमिश्नर बनाए जाने के बाद उनका पुराना वीडियो वायरल हो गया है, जिससे 'सफ्रॉन शैडो' विवाद तेज हो गया है. जानिए कौन हैं विश्वास नांगरे पाटिल, 26/11 मुंबई हमलों में उनकी बहादुरी की कहानी, विपक्ष के आरोप, राज ठाकरे की प्रतिक्रिया, वायरल वीडियो का पूरा मामला और उनके प्रेरणादायक जीवन का सफर.

IPS Vishwas Nangare Patil
IPS Vishwas Nangare Patil

रूपक प्रियदर्शी

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नागपुर के नए पुलिस कमिश्नर बने IPS विश्वास नांगरे पाटिल विवादों के घेरे में आ गए हैं. महाराष्ट्र कैडर के 1997 बैच के जांबाज आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल को जैसे ही नागपुर का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया, वैसे ही उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस वीडियो के सामने आते ही गैर-बीजेपी और गैर-संघी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों का पारा हाई हो गया है और उनके शानदार करियर पर सवाल उठाए जाने लगे हैं. चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानिए कौन हैं विश्वास नांगरे पाटिल और क्यों घिरे विवादों में. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.

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क्या है पूरा विवाद और क्यों खड़े हो रहे हैं सवाल

विश्वास नांगरे पाटिल की नागपुर में जॉइनिंग से ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनका एक 45 सेकंड का वीडियो तेजी से वायरल हुआ. यह वीडियो सकल हिंदू समाज के एक हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम का है, जिसमें आईपीएस पाटिल मंच से भाषण दे रहे हैं. अपने इस संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवकों के अनुशासन की तारीफ की और संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार की जमकर सराहना की.

नागपुर को आरएसएस का मुख्यालय माना जाता है और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नागपुर से ही आते हैं. ऐसे में पाटिल को नागपुर की कमान मिलते ही विपक्ष ने उन पर संघ का 'भक्त' होने का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है.

विपक्ष का हमला और राज ठाकरे की तीखी प्रतिक्रिया

इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर सर्विस रूल्स (सेवा नियमों) का उल्लंघन करार दिया है. वहीं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है. राज ठाकरे का कहना है कि एक आईपीएस अधिकारी देश के संविधान की कसम खाता है, किसी संगठन की नहीं.

उन्होंने मांग की है कि अगर विश्वास नांगरे पाटिल को संघ का अनुशासन और उनकी विचारधारा इतनी ही पसंद आ रही है, तो उन्हें तुरंत अपनी पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे देना चाहिए और अपनी वर्दी उतार देनी चाहिए. ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पुलिस की नौकरी छोड़कर नागपुर में संघ मुख्यालय (रेशमी बाग) चले जाना चाहिए और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहिए.

26/11 मुंबई हमले के रियल लाइफ 'सिंघम'

इस महाविवाद के बीच देश विश्वास नांगरे पाटिल के उस जांबाज अतीत को भी याद कर रहा है, जिसके लिए वे जाने जाते हैं. साल 2008 में जब 26 नवंबर को पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई को लहूलुहान किया था, तब पाटिल दक्षिण मुंबई के जोन-1 के डीसीपी थे. जैसे ही उन्हें ताज होटल के भीतर आतंकियों के घुसने और अंधाधुंध कत्लेआम की खबर मिली, उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकेट, अतिरिक्त पुलिस फोर्स या एनएसजी (NSG) कमांडो का इंतजार किए बिना अपनी जान की बाजी लगा दी. 

वे महज अपनी 9 एमएम (9mm) की सर्विस पिस्तौल और एक छोटी सी पुलिस टीम को लेकर सीधे ताज होटल के भीतर घुस गए. होटल की छठी मंजिल पर उनका सामना एके-47 से लैस दो खूंखार आतंकियों से हुआ, जिन्होंने उन पर ग्रेनेड फेंके और भारी फायरिंग की. इस हमले में पाटिल के ठीक बगल में खड़े उनके बॉडीगार्ड अमित खेताड़े शहीद हो गए, लेकिन पाटिल पीछे नहीं हटे. पाटिल की चलाई एक गोली एक आतंकी के पैर में जा लगी, जिससे आतंकी पीछे हटने को मजबूर हुए और ताज के हेरिटेज विंग में फंसे सैकड़ों मेहमानों को सुरक्षित निकालने का रास्ता साफ हो गया. इस अदम्य साहस के लिए उन्हें राष्ट्रपति के सर्वोच्च पुलिस मेडल 'फॉर गैलेंट्री' से सम्मानित किया गया था.

टीचर के ताने ने बदल दी थी किस्मत

विश्वास नांगरे पाटिल का जीवन किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह प्रेरणादायक है. महाराष्ट्र के सांगली जिले के कोखुड़ गांव में जन्मे विश्वास के पिता एक पहलवान और गांव के सरपंच थे, जो चाहते थे कि बेटा भी अखाड़े में उतरे. बचपन में विश्वास का मन पढ़ाई में नहीं लगता था, जिसके बाद स्कूल के एक टीचर ने उन्हें ताना मारते हुए कहा था कि तुम सिर्फ गोबर उठाने और गधे चराने के ही लायक हो, जिंदगी में कभी पढ़-लिखकर कुछ नहीं बन पाओगे. 

12 साल की उम्र में लगे इस ताने ने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया. उन्होंने गांव का स्कूल छोड़ दिया और इंग्लिश मीडियम स्कूल में दाखिला लेकर कड़ी मेहनत की और दसवीं में 88% अंक हासिल किए. इसके बाद कोल्हापुर के शिवाजी विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद वे बिना किसी कोचिंग के, सेल्फ स्टडी और माइक्रो नोट्स के दम पर अपने पहले ही प्रयास में मराठी मीडियम से यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास कर महज 25 साल की उम्र में आईपीएस अधिकारी बन गए. नौकरी में आने के बाद भी उनका पढ़ाई से लगाव खत्म नहीं हुआ और उन्होंने एमए, एलएलबी के साथ-साथ पुलिस मैनेजमेंट में एमबीए की डिग्री भी हासिल की.

युवाओं के पोस्टर बॉय और सोशल मीडिया के किंग

विश्वास नांगरे पाटिल सोशल मीडिया पर एक मेगा इन्फ्लुएंसर हैं और महाराष्ट्र के युवाओं के बीच सबसे बड़े पोस्टर बॉय माने जाते हैं. इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर उनकी रोबीली मूंछें, फिटनेस के धांसू वीडियो और युवाओं को जोश से भर देने वाले मोटिवेशनल भाषण मिनटों में वायरल हो जाते हैं. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उन्होंने अपने संघर्षों पर आधारित दो किताबें भी लिखी हैं, जिनमें 'मन में है विश्वास' और 'कर हर मैदान फतेह' शामिल हैं, जो सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. 

उनके इसी कड़क अंदाज और लुक से प्रेरित होकर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी ने अपनी फिल्म 'सूर्यवंशी' में अक्षय कुमार का डीसीपी वीर सूर्यवंशी वाला किरदार गढ़ा था. इसके अलावा 26/11 के हमलों पर बनी इंटरनेशनल फिल्म 'होटल मुंबई' और रामगोपाल वर्मा की फिल्म 'द अटैक ऑफ 26/11' में भी उनके इसी जांबाज किरदार की असली कहानी दिखाई गई है.

कैसा है सिंघम कॉप का पारिवारिक चेहरा

बाहर से बेहद कड़क और खतरनाक दिखने वाले इस आईपीएस अधिकारी का पारिवारिक पहलू बेहद सॉफ्ट और दिलचस्प है. उनकी पत्नी का नाम रूपाली नांगरे पाटिल है और उनके दो बच्चे हैं जिसमें बेटी जानवी नांगरे पाटिल, जिन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है, और बेटा रणवीर नांगरे पाटिल. एक मराठी टॉक शो 'चला हवा येऊ द्या' में उनके परिवार ने पाटिल के कई सीक्रेट्स खोले थे. 

उनकी पत्नी रूपाली ने बताया था कि बाहर सिंघम दिखने वाले पाटिल घर आते ही एकदम सॉफ्ट हो जाते हैं और बाहर तनी रहने वाली उनकी मूंछें घर में नीचे हो जाती हैं. वहीं उनकी बेटी जानवी ने बताया था कि पापा बाहर चाहे जितने सीरियस दिखें, घर पर वे बेहद खराब और सेंसलेस जोक्स मारते हैं और बच्चों को हमेशा याद दिलाते रहते हैं कि तुम्हें मोबाइल के कारण सब आसानी से मिल गया, हमारे जमाने में ऐसा कुछ नहीं था. बहरहाल, जमीन से उठकर देश का एक बड़ा कॉप बनने वाले विश्वास नांगरे पाटिल आज अपने एक भाषण के कारण राजनीति की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा से गुजर रहे हैं.

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