Charchit Chehra: कौन हैं मेलिका बराहिमी जिसने खामेनेई के जलते पोस्टर से सिगरेट सुलगाकर ईरान में भड़का दी क्रांति?

Charchit Chehra: ईरान में जलते पोस्टर से सिगरेट सुलगाने वाली लड़की ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. कौन है यह रहस्यमयी चेहरा, मोर्टिशिया एडम्स या मेलिका बराहिमी? खामेनेई की तानाशाही को चुनौती देने वाली इस 34 सेकंड की वीडियो क्लिप ने ईरान में चल रही क्रांति को नया प्रतीक दे दिया है. जानिए इस बगावत की पूरी कहानी, पहचान का सच और ईरान में भड़कते विद्रोह का इतिहास.

Melika Barahimi news
मेलिका बराहिमी का वीडियो वायरल

अनुराधा तंवर

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Charchit Chehra Melika Barahimi: जब हुकूमत खौफ, डर को हथियार बनाकर जनता पर शासन करती है, जनता को सम्मानजनक जीवन देने में नाकाम होती है तो कभी न कभी कोई न कोई ऐसा दिन आता है जब डर, खौफ खत्म हो जाता है. जनता हुकूमत के खिलाफ सड़क पर उतर आती है. एक चिंगारी भड़कती है और हुकूमत को नेस्तनाबूत कर डालती है. नौजवानों और महिलाओं के हाथों में विद्रोह की कमान संभालने के बाद क्या होता है वो बांग्लादेश, श्रीलंका, वेनेजुएला के बाद अब ईरान में हो रहा है. 

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एक चिंगारी भड़की सिगरेट के कश से और पूरी दुनिया में कोहराम मच गया. 'Cigarette smoking is injurious to health' का प्रिंसिपल केवल भारत के लिए नहीं, पूरी दुनिया में लागू होता है. सिगरेट पीना सही नहीं ठहराया जा सकता. ईरान में महिलाओं को सिगरेट पीने की हर्गिज इजाजत नहीं है लेकिन ईरान की ही एक लड़की ने, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जलते हुए पोस्टर से सिगरेट क्या सुलगाई, पूरी दुनिया में सुलग उठी ईरान के हालात को लेकर. तानाशाही हुकूमत के खिलाफ बगावत की इस चिंगारी का 34 सेकंड का शॉर्ट वीडियो आने वाले बहुत सालों तक बगावत के सिंबल के तौर पर याद किया जाएगा. और याद की जाएगी वो लड़की जिसे कहा जा रहा है मोर्टिशिया एडम्स. इसीलिए चर्चित चेहरा शो का चेहरा मोर्टिशिया एडम्स बनी है. 

पहचान का रहस्य: एडम्स या मेलिका बराहिमी?

जलते पोस्टर से सिगरेट जलाकर बगावत की चिंगारी को शोला बना रही सचमुच मोर्टिशिया एडम्स है या नहीं, इसका कोई कन्फर्मेशन नहीं है. ऐसा इसलिए कि मोर्टिशिया एडम्स किसी ईरानी लड़की का नाम लगता नहीं. ये नाम इसलिए चर्चा में आया कि सोशल मीडिया पर पर इसी हैंडल से वो बागी लड़की पोस्ट करती है. लड़की मीडिया से बात रही है लेकिन अपनी असली पहचान बताए बिना ही. एक दावा ये भी कि असली नाम मेलिका बराहिमी (Melika Barahimi) है.

आखिर कौन है ये लड़की?

पूरी दुनिया में सिगरेट जलाने वाली लड़की की कुंडली सर्च हो रही है लेकिन फिलहाल जानकारी इतनी ही मिली कि 25 साल की  लड़की ईरान की ही रहने वाली है. लेकिन इन दिनों ईरान से बचकर कनाडा में रह रही है. वीडियो से ऐसा लग रहा है कि अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ चल रहे प्रोटेस्ट के बीच उसने सिंबॉलिक प्रोटेस्ट के लिए जलते पोस्टर से सिगरेट चलाई. फैक्ट चेक रिपोर्ट्स में दावा किया कि जब जलते हुए पोस्टर से सिगरेट जलाने का वीडियो कनाडा के Richmond Hill, ओंटेरियो में शूट किया गया. लड़की जहां खड़ी है वहां बर्फ बिखरी हुई है. ये वीडियो तब अपलोड हुआ जब ईरान में इंटरनेट शटडाउन नहीं हुआ था. अब हो चुका है. 

सजा-ए-मौत के कानून को चुनौती

एक तो लड़की ईरान की, उस पर से सिगरेट स्मोकिंग. सोशल मीडिया में वायरल वीडियो जिसमें उसने हिजाब नहीं पहना, बाल खुले रखे, ऑफ सोल्डर ब्लैक ड्रेस पहने, ईरान के सर्वेसर्वा खामेनेई को पोस्टर जला रही वो भी लाइटर से सिगरेट जलाने के लिए कि ईरानी कानून के खिलाफ एकदम खिलाफ है और सजा ए मौत के लायक है. सिगरेट जलाने के बाद उसने जलता पोस्टर नीचे फेंक दिया. आग से हाथ ताप ली. गनीमत है उसने खामेनेई का जलता पोस्टर कुचला नहीं. क्या किया, क्यों किया और क्या हश्र हो सकता है, ये जानते हुए भी एडम्स ने कर दिया. इतना कुछ काफी है ये बताने और समझाने के लिए कि खामेनई की हुकूमत से मोर्टिशिया एडम्स या मेलिका बराहिमी के अंदर कितना बड़ा ज्वालामुखी दहक रहा होगा. 

"मुझे माफ कर दो, मां ईरान"

सोशल मीडिया पर जलते पोस्टर से सिगरेट जलाने का वीडियो प्रोटेस्ट होने के बाद एडम्स ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि, हर बार मैं सड़क पर थी. इस बार मैं नहीं हो पाई. मुझे माफ कर दो, मां ईरान. इस पोस्ट का इशारा कि पहले वो ईरान में रहकर क्रांति का हिस्सा बनी. इस बार बाहर कर अपना काम कर रही है. उसने ईरान के उन क्रांतिकारी नौजवानों और लड़कियों से मांगी खामेनेई  सरकार की गोलियों का सामना कर रहे हैं लेकिन ईरानी कानून तोड़ने के लिए जेल जा चुकी एडम्स खुद इस बार ईरान में नहीं है.

पहले भी खामनेई को लेकर हो चुका विरोध

ईरान में खामेनई के पोस्टर पहली बार नहीं जले. जलते पोस्टर से सिगरेट भी पहली बार नहीं सुलगाई गई. पिछले साल एक लड़के ओमिद सरलक ने ऐसी गुस्ताखी की थी. कुछ घंटे बाद ही उसकी लाश उसी की कार में मिली. अपने बायो में Radical feminist लिखने वाली एडम्स ने मीडिया इंटरव्यू में कहा कि, मैं दुनिया का ध्यान ईरान की ओर दिलाना चाहती थी जहां नौजवान लड़के-लड़कियां हुकूमत की गोलियां खा रहे हैं. मैं अपनो दोस्तों से दूर हूं लेकिन मेरा दिल, मेरी आत्मा उनके के साथ है. खामेनेई को सुप्रीम लीडर नहीं कहूंगी, ये मेरे लिए बेइज्जती की बात है, वो ईरान का तानाशाह है. उसे जाना होगा. इस्लामी गणराज्य का खात्मे होना चाहिए. ईरान में जो हो रहा है वो जेन जी प्रोटेस्ट नहीं. हर वर्ग के लोग तानाशाही के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. 

ईरान में बगावत की कहानी

ईरान में खामेनेई की हुकूमत के खिलाफ बगावत पहली बार नहीं हुई. 2019 में भी बड़े लेवल पर आंदोलन ने सिर उठाया था. तब खामेनेई दबाने, कुचलने में कामयाब रहे. तब भी ये लड़की अरेस्ट हुई थी. ईरान में लड़कियों के लिए हिजाब पहनना मस्ट है. एडम्स की भी हिजाब के खिलाफ जंग रही है. मीडिया इंटरव्यू में उसने बताया कि उसे हिजाब से चिढ़ थी. इसी कारण ईरान की पुलिस में घर में छापा मारकर गिरफ्तार किया था. तब परिवार पेरोल पर उसे बाहर निकलवाया पाया. उसके बाद उसने ईरान छोड़ दिया. ईरान से तुर्की होते हुए वीजा लेकर कनाडा में रहने लगी. 

नवंबर 2024 में एक और लड़की ने ईरानी हुकूमत को ललकारा जब उसने हिजाब के खिलाफ विरोध जताने के लिए तेहरान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड रिसर्च कैंपस में इनरवियर छोड़कर सारे कपड़े उतार दिए थे. उसे भी हिजाब नहीं पहनने पर हुकूमत की नाराजगी झेलनी पड़ रही थी. 

सितंबर 2022 में 22 साल की महसा अमीनी को हिजाब कानून के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया. इतना टार्चर किया कि उसकी मौत हो गई. तब से ईरान में हिजाब के खिलाफ जबरदस्त प्रोटेस्ट होते जा रहे हैं. एडम्स मानती हैं कि ईरान में हिजाब पहनने का कानून महिलाओं, लड़कियों के मानवाधिकार के खिलाफ है और इसके लिए खामेनेई जिम्मेदार हैं.

ईरान में 1979 जैसी क्रांति

ईरान में क्रांति 28 दिसंबर से शुरू हुई. पहले तो इकोनॉमी, महंगाई, बेरोजगारी से जोड़ा गया. शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां दुकानदारों ने हड़ताल की थी. फिर देखते-देखते लड़ाई इस्लामिक रिपब्लिक और अली खामेनेई के खिलाफ हो गई. Death to Khamenei और Pahlavi will return' जैसे नारे गूंज रहे हैं. मुहिम चल रही है कि ईरान के आखिरी शाह के बेटे रजा पहलवी की वापसी हो. 1979 में भी ईरान में बड़ी क्रांति हुई थी. तब खामेनेई ने राजा के खिलाफ बगावत करके ईरान की बागडोर संभाली थी.

अब वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि आज भी क्रांति हो रही है जिसकी तुलना 1979 की क्रांति से की जा रही है.  इंटरनेशनल मीडिया का दावा है कि पिछले 17 दिनों में 12 हजार से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. जबकि रायटर्स का दावा 2 हजार से ज्यादा मौतों का है. गार्ड्स को सीधे गोली मारने के ऑर्डर मिले हुए हैं. ईरान में भड़कते शोलों को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भी हवा दे रहे हैं. प्रदर्शनकारियों से कह चुके हैं कि चिंता मत करो. मदद पहुंच रही है. खामेनेई अड़े है कि ईरान झुकेगा नहीं.

यहां देखें वीडियो

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