एक घर, एक छत के नीचे रहने वाले दो लोगों के दिल मिल सकते हैं, पर क्या उनकी दुनिया एकदम जुदा हो सकती है? आज बात एक ऐसे हाई-प्रोफाइल जोड़े की, जिनके रिश्ते में प्यार तो अटूट है, लेकिन विचारधारा की खाई इतनी गहरी कि पूरा देश दंग है. एक तरफ देश की ताकतवर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जो देश की अर्थव्यवस्था संभालती हैं तो दूसरी तरफ हैं उनके जीवनसाथी जाने-माने अर्थशास्त्री डॉ. परकला प्रभाकर, जो उसी सरकार पर लोकतंत्र की हत्या, चुनावी धांधली के संगीन इल्जाम लगाने में जरा भी संकोच नहीं करते.
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परकला और निर्मला के बीच रिश्ता पति-पत्नी का है लेकिन विचारधारा की दीवार इतनी ऊंची कि पूरा देश हैरान है. अक्सर पूछा जाने वाला सवाल है कि जब सरकार में पत्नी निर्मला का इतना रसूख है कि वो सरकार को घेरते क्यों है? ऐसा ही सवाल निर्मला के लिए भी कि जब सरकार और पार्टी पर उनके पति इतने गंभीर सवाल उठाते हैं तो वो ऐसा होने क्यों देती हैं. JNU की गलियों से शुरू हुई निर्मला सीतारामन और परकला प्रभाकर की ये प्रेम कहानी आज फिर चर्चा में है. ऐसा इसलिए कि परकला प्रभाकरन ने बीजेपी को 6 सेकंड के वोट घोटाले में लपेटा है. चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानिए परकला प्रभाकर की जिंदगी के वो पन्ने, जहां प्यार और विद्रोह एक साथ चलते हैं.
चुनाव में बीजेपी पर गड़बड़ी का आरोप
चुनावों में गड़बड़ियां हो रही हैं, बीजेपी चुनाव आयोग की मदद से ये सारी गड़बड़ियां करके चुनाव पे चुनाव जीतती जा रही है, ये आरोप अब नए नहीं रहे. बल्कि इतने पुराने हो गए हैं कि धीरे-धीरे चर्चाएं कम होने लगी हैं. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र में बीजेपी की सरप्राइज विक्ट्री ने चुनाव धांधली के आरोपों को मजबूत आवाज दी. राहुल गांधी ने सीरियल प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मोर्चा खोला लेकिन जीती हुई पार्टी से कोई कितना ही लड़ लेगा, तो ये सब चर्चा धीरे-धीरे दबती गई.
परकला प्रभाकर ने क्या लगाए आरोप?
आंध्र प्रदेश के चुनावों को लेकर तो कभी कोई विवाद हुआ भी नहीं लेकिन मशहूर इकोनॉमिस्ट और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर ने 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनावों में Unusual Voting Patterns को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. परकला प्रभाकर ने जिन चुनावों में धांधली के आरोप लगाए हैं वो चुनाव टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू ने लड़ा था. बीजेपी जूनियर पार्टनर बनकर लड़ी. सवाल चंद्रबाबू की नैचुरल जीत पर उठे हैं. परकला प्रभाकर ने दावा किया कि अगर लोकसभा चुनाव में गड़बड़ी नहीं की गई होती तो इंडिया गठबंधन को 316 सीटें आती.
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस और द वायर को दिए इंटरव्यू ने परकला प्रभाकर दावा किया कि आंध्र प्रदेश के करीब 3,500 बूथों पर मतदान रात 2 बजे तक जारी रहा. रात 8 बजे से सुबह 2 बजे के बीच कुल 52 लाख संदिग्ध वोट डाले गए. डेटा अनालिसिस करते हुए दावा किया कि हर 6 सेकंड में वोट पड़े. जबकि EVM मशीन को रिसेट होने में ही 14 सेकंड लगते हैं. उन्होंने दावा किया है फैक्ट्स के साथ जिसका जवाब फैक्ट्स के साथ चुनाव आयोग, टीडीपी या बीजेपी की ओर से आना बाकी है.
परकला प्रभाकर कौन हैं?
परकला कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक परिवार से हैं लेकिन कभी कांग्रेसी नहीं बने. परकला आंध्र प्रदेश के नरसापुरम के तेलुगू भाषी राजनीतिक और कांग्रेसी परिवार थे. मां परकला कालिकाम्बा, आंध्र प्रदेश में विधान सभा सदस्य थीं, पिता, परकला शेषावतारम, नरसपुरम से लंबे समय तक विधायक रहे और आंध्र की तीन-तीन सरकारों में मंत्री भी रहे. प्रभाकर ने विजयवाड़ा के आंध्र लोयोला कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद जेएनयू से फिलॉसफी में एमफिल की. वहीं पढते हुए निर्मला उनकी जिंदगी में आईं.
निर्मला और परकला की लव-स्टोरी
1980 के दशक में जेएनयू से निर्मला और परकला की प्रेम कहानी शुरू हुई. JNU में परकला प्रभाकर और निर्मला सीतारमण एक साथ पढ़ते थे. दोनों पढ़ने लिखने वाले छात्र थे. परकला पढाई के साथ वोकल भी थे. दोनों की विचारधारा अलग थी, लेकिन दिल मिल गए. फिर 1986 में दोनों ने शादी कर ली. जेएनयू से आगे भी पढ़ने के लिए दोनों लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स चले गए. परकला ने वहीं से पीएचडी भी की.
निर्मला सीतारामन का जन्म मदुरै के एक मिडिल क्लास तमिल परिवार में हुआ था. तिरुचिरापल्ली से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन करने के बाद एम.ए. और एम.फिल करने जेएनयू आईं. उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष और यादगार मोड़ तब आया जब वो शादी के बाद परकला के साथ लंदन चली गईं. वहां अपने पति की पढ़ाई में मदद करने और घर चलाने के लिए लंदन के हैबिटेट स्टोर में सेल्सगर्ल का काम किया. आगे उन्होंने पीडब्ल्यूसी (PwC) और बीबीसी (BBC) वर्ल्ड सर्विस के लिए भी काम किया लेकिन डेस्टनी को कुछ और मंजूर था.
निर्मला के पॉलिटिशियन बनने की कहानी
भारत लौटकर निर्मला फर्स्ट जेनरेशन की पॉलिटिशियन बनीं. तब उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की जब तमिलनाडु में पार्टी का कोई खास जनाधार था नहीं. परकला भी बीजेपी में आए लेकिन मन भटकता रहा. एक्टर चिरंजीवी ने आंध्र में प्रजा राज्यम पार्टी बनाई तो फाउंडर मेंबर की तरह जुड़े लेकिन मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी. लेकिन निर्मला टिकी रहीं और ग्रास रूट वर्कर से बढ़ते-बढ़ते पीएम मोदी की कोर टीम तक पहुंचीं और आज 9 बार देश का बजट पेश करने वाली वित्त मंत्री हैं.
परकला प्रभाकर और निर्मला सीतारमण का रिश्ता भारतीय राजनीति में पर्सनल लव एंड अफेक्शन के साथ वैचारिक विरोध की यूनिक केस स्टडी है. निर्मला ने कभी पति की पॉलिसीज को लेकर कभी कुछ नहीं कहा लेकिन प्रभाकर कह चुके हैं कि वैचारिक मतभेद गहरे हैं और वे अपनी पत्नी की सरकार की नीतियों के सबसे तीखे आलोचकों में से एक हैं, लेकिन वे अपने निजी और पारिवारिक जीवन को इन राजनीतिक विवादों से पूरी तरह अलग रखते हैं.
निर्मला और परकला का परिवार
निर्मला और परकला की एक संतान है बेटी वांगमयी. मां और पिता से अलग राह चुनी और जर्नलिस्ट बनी. दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से अंग्रेजी में बीए और शिकागो की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म की डिग्री के बाद कई अंग्रेजी मीडिया ऑर्गनाइजेशन के लिए काम किया. वांगमयी की 2023 में बहुत चर्चा में रही लेकिन इतने बड़े परिवार की बेटी की प्रतीक दोषी से शादी परकला और निर्मला ने बेहद सादगी से वीआईपी कल्चर से दूरी बनाकर की थी. कोई नेता नहीं, कोई मंत्री नहीं, केवल परिवार के लोग और करीबी दोस्त शादी में शामिल हुए. प्रतीक दोषी पीएमओ में काम करते हैं और पीएम मोदी की ए टीम के लो प्रोफाइल मेंबर माने जाते हैं.
परकला को क्यों गंभीरता से सुना जाता है?
परकला प्रभाकर अपने फील्ड के एक्सपर्ट हो सकते हैं लेकिन एक सच ये भी है कि उन्हें गौर से इसलिए भी सुना जाता है कि वो निर्मला सीतारामन के पति हैं. देश के पॉलिटिकल इश्यूज से लेकर इकोनॉमी तक परकला की नजर में सरकार फेल है. पति देश की वित्त मंत्री हो तो इसके एवज में वो वीआईपी फेवर भले न लेते हैं लेकिन वो देश के वीआईपी क्रिटिक हैं जिनके निशाने पर बीजेपी, पीएम मोदी, सरकार होती है. उनकी पत्नी जिस न्यू इंडिया की सबसे बड़ी प्रवक्ताओं में से हैं, प्रभाकर उसी के सबसे बड़े क्रिटिक माने जाते हैं. उनकी किताब 'The Crooked Timber of New India सत्ता के गलियारों में खलबली मचा चुकी है.
परकला प्रभाकर पीएम मोदी के सबसे मुखर आलोचकों में से एक हैं. वे मानते हैं कि मोदी के नेतृत्व में अर्थव्यवस्था बदहाली की स्थिति में पहुंच गई है और 'इलेक्टोरल बॉन्ड' को उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला बताया. मानकर चलते हैं कि अगर यही सरकार दोबारा आई, तो शायद देश में फिर कभी चुनाव न हों.
निर्मला और परकला का रिश्ता
लोगों के मन में अरसे से ये सवाल रहा है कि निर्मला सीतारामन से कैसे पटती होगी. घर में क्या बात होती होगी? उनकी लाइन क्लियर है कि वो अपने विचारों को व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर रखते हैं. आज वो एक ऐसे 'लोन वॉइस ऑफ डिसेंट बन गए हैं, जिसे न तो डराया जा सका है और न ही चुप कराया जा सका है. सत्ता के सबसे करीब रहकर भी सत्ता को आईना दिखाने का साहस. परकला प्रभाकर आज उस लोकतंत्र की आवाज हैं, जो मानता है कि असहमति ही देश की असली शक्ति है. क्रेडिट सरकार पार्टी और निर्मला का भी जिन पर बहुत सारी आवाजों को चुप कराने के आरोप लगते हैं लेकिन परकला प्रभाकर न तो ऐसे आवाजों की लिस्ट में आज तक नहीं आए.
परकला प्रभाकर की परवरिश कांग्रेसी माहौल में हुई लेकिन कभी कांग्रेस नहीं बने. उनके विचार राहुल गांधी से मिलते-जुलते हैं लेकिन राहुल और परकला कभी नहीं मिले. हालांकि वो राहुल गांधी के फैन हैं जो मानते हैं राहुल गांधी अकेले ऐसे साहसी नेता हैं जो प्रधानमंत्री मोदी को सीधे और निडरता से चुनौती देते हैं. उन्होंने राजनीति का स्वाद लिया लेकिन खुद को एक राजनीतिक कार्यकर्ता से कहीं ज्यादा पब्लिक इंटेलेक्चुअल और इकोनॉमिस्ट की ब्रैंडिग की. शायद पार्टी के अनुशासन में बंधने के बजाय स्वतंत्र रूप से अपनी राय रखना ही उनकी प्राथमिकता रही.
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