जैसे हर सेकंड घड़ी की टिकटिक समय बदल देती है वैसे ही बदलती रही राघव चड्ढा की जिंदगी. लंदन जैसे शानदार शहर में इंटरनेशनल ऑडिट करने वाला दिल्ली का एक पंजाबी लड़का अचानक अपने शहर लौटकर आता है. दिल्ली की धूल भरी गलियों में इंकलाब के नारे लगाने लगता है और फिर उसकी जिंदगी हमेशा के लिए एकदम पलट जाती है. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में आज जानेंगे राघव चड्ढा के लाइफ से जुड़ी पूरी कहानी.
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राघव की अरसे से चर्चा इसलिए हो रही थी कि संसद में बैठा ऐसा यंग पॉलिटिशियन जिसने आउट ऑफ बॉक्स जाकर मैंगो मैन के हित में आवाज उठाता है. दूसरी चर्चा इसलिए ये कि आम आदमी का ये नौजवान नेता अपनी ही पार्टी में बागी मान लिया गया. फिर पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए संसद में उसकी आवाज साइलेंट कर दी.
22 की उम्र में बन गए थे CA लेकिन...
राघव चड्ढा का बचपन दिल्ली की गलियों में बीता, जहां उन्होंने मॉडर्न स्कूल से स्कूलिंग की. करियर के तौर पर उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) जैसा कठिन रास्ता चुना. दिल्ली यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) का एक्जाम पास करके सिर्फ 22 साल की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बन गए. नौकरी करने लंदन गए. डेलॉइट (Deloitte) और ग्रांट थॉर्नटन (Grant Thornton) जैसी दुनिया की दिग्गज MNC के साथ काम किया लेकिन डेस्टनी को कुछ और मंजूर था.
केजरीवाल और राघव चड्ढा की मुलाकात
राघव चड्ढा और अरविंद केजरीवाल की पहली मुलाकात 2012 की बात है. तब अरविंद केजरीवाल अन्ना हजारे के साथ एंटी करप्शन मूवमेंट के बड़ा चेहरा बने थे. उनकी राजनीतिक पारी शुरू हो रही थी और उस दौर में कई बड़े चर्चित चेहरा केजरीवाल से जुड़े और टूटे भी. लंदन में करियर CA राघव अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचे थे. केजरीवाल राघव के टैलेंट से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने महज 24 साल के लड़के को दिल्ली लोकपाल बिल का ड्राफ्ट तैयार करने में लगा दिया. वहीं से दोनों के बीच एक गहरा विश्वास कायम हुआ और राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के फाउंडर मेंबर बनकर केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद दोस्त, सहयोगी और स्ट्रैटजिस्ट बन गए.
राघव ने ऑडिट अकाउंट पढ़ा ही था और राजनीति केजरीवाल की संगत में सीखें. धीरे-धीरे आप के राजनीतिक मामलों में भी राघव की एक्सपर्ट ओपिनियन मैटर करने लगी. बड़ा पॉलिटिकल टेस्ट हुआ पंजाब के 2022 के चुनाव में जहां उन्होंने सह प्रभारी बनकर पार्टी के लिए काम किया. आप की प्रचंड जीत का क्रेडिट राघव के हिस्से भी आया. इनाम में केजरीवाल ने सिर्फ 33 साल में राघव को राज्यसभा भेज दिया. यंग ब्राइट राघव हर फ्रंट पर खुद को साबित करते रहे. उनकी ब्रैंडिंग ऐसे नेता की बनी जो ट्रेडिशनल पॉलिटिक्स से अलग कुछ सोच और कर रहा था.
क्यों आई राघव और केजरीवाल में दूरी?
चीजें खराब होने लगी जब केजरीवाल का ग्राफ गिरना शुरू हुआ. उन्हें शराब घोटाले में जेल जाना पड़ा. दिल्ली में चुनाव हारे. जब जेल से छूटे तब केजरीवाल के आसपास सब थे. बस राघव नहीं थे. वहीं से केजरीवाल और राघव की दूरियों की खबरों ने जोर पकड़ना शुरू किया. महसूस किया जाने लगा कि राघव ने मुश्किल समय में केजरीवाल का बचाव नहीं किया. पार्टी और लीडर की बजाय संसद में पर्सनल ब्रैंडिंग बनाने में जुटे थे. केजरीवाल से दूरी को बीजेपी से नजदीकी के तौर पर देखा जाने लगा. संसद में उनके जनहित वाले भाषण और उन भाषणों पर सरकार की ओर से फौरी एक्शन से राघव के लिए आप में मुश्किलें खड़ी की. माना जा रहा है कि राज्यसभा में डिप्टी लीडर का पद वापस लिया जाना सजा की तरह है.
आम आदमी के लिए राघव बने 'हीरो'
संसद में राघव चड्ढा ने अपनी 'आम आदमी' वाली छवि को तब और मजबूत किया जब उन्होंने बड़े राजनीतिक भाषणों के बजाय आम जनता की रोजमर्रा की परेशानियों को जोरदार तरीके से उठाना शुरू किया. उनके भाषणों के वीडियो अक्सर वायरल होते हैं, जिनमें उन्होंने मोबाइल रिचार्ज की 28 दिन की वैधता पर सवाल उठाते हैं. एयरपोर्ट पर महंगे चाय, समोसे से लेकर गिग वर्कर्स, पैटर्निटी लीव जैसे मुद्दे उठाकर हीरो बने. आम आदमी को उठाते-उठाते न जाने कब आम आदमी पार्टी के खिलाफ माने जाने लगे.
राघव से मुलाकात के पहले टूट चुकी थी परिणीति
राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की लव स्टोरी कहानी किसी फेयरीटेल की तरह है, जिसकी शुरुआत सात समंदर पार लंदन में हुई थी. राघव चड्ढा से मिलने से पहले परिणीति चोपड़ा की पर्सनल लाइफ में बड़े अप्स डाउंस आते रहे. एक्ट्रेस के तौर पर शुरू हुआ करियर ज्यादा तेजी से आगे नहीं बढ़ा. उन्होंने कभी किसी के साथ रिश्तों पर मुहर नहीं लगाई, लेकिन उनके कुछ अफेयर और ब्रेकअप के किस्से चर्चित रहे.
परिणीति का सबसे लंबा और चर्चित रिश्ता निर्देशक मनीष शर्मा के साथ माना जाता है, जिन्होंने उनकी डेब्यू फिल्म 'लेडीज वर्सेस रिकी बहल' और 'शुद्ध देसी रोमांस' का निर्देशन किया था. खबरों के मुताबिक, दोनों लगभग 3-4 साल तक साथ थे और 2014-2016 के आसपास उनका ब्रेकअप हो गया.
परिणीति ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वे एक बहुत ही 'बुरे ब्रेकअप' से गुजरी थीं, जिसने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था. उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का सबसे खराब दौर बताया, जब वे लगातार रोती रहती थीं, खाना-पीना छोड़ दिया था और अकेलेपन (डिप्रेशन) का शिकार हो गई थीं. उन्होंने कभी नहीं बताया कि किसके आने और किसके जाने से उनकी लाइफ डिप्रेशन तक पहुंच गई.
मनीष के बाद परिणीति का नाम चरित देसाई के साथ जुड़ा, जो करण जौहर की फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर रहे हैं. दोनों की मुलाकात 2016 के 'ड्रीम टीम टूर' के दौरान हुई थी. चरित को प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास की शादी के कार्यक्रमों में भी परिणीति के साथ देखा गया था, जिससे उनके रिश्ते की अफवाहों को हवा मिली. ये भी रिश्ता आगे नहीं बढ़ा.
राघव और परिणीति की लव-स्टोरी
हार्ट ब्रेक के दौर से गुजर रहीं परिणिति की लाइफ में एंट्री हुई इंडियन पॉलिटिशियन राघव चड्ढा की. वो भी तब जबकि परिणिति कहती रहीं कि कभी नेता से शादी नहीं करनी. दोनों की पहली मुलाकात लंदन में एक अवॉर्ड फंक्शन (India UK Achievers Honours) के दौरान हुई थी. परिणीति को एंटरटेनमेंट और राघव को पॉलिटिक्स के लिए सम्मानित किया गया था. परिणीति के भाई शिवांग ने दोनों को इंट्रोड्यूस कराया. फिर दोनों मिलने लगे.
परिणीति उस समय राघव के राजनीतिक कद से अनजान थीं. ब्रेकफास्ट के बाद उन्होंने होटल जाकर गूगल पर सर्च किया, राघव चड्ढा की उम्र क्या है? क्या वे शादीशुदा हैं?'. जब सब 'चेक' हुआ, तो उनकी बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और दोनों एक दूसरे के लिए सीरियस हो गए. इनका रिश्ता तब और गहरा हुआ जब परिणीति पंजाब में फिल्म 'अमर सिंह चमकीला' की शूटिंग कर रही थीं. राघव अक्सर उनसे मिलने सेट पर जाते थे. वे अपनी सुरक्षा छोड़कर छुप-छुपकर खेतों और दोस्तों के फार्महाउस पर मिलते थे. कुछ महीनों की डेटिंग के बाद, 13 मई 2023 को दिल्ली में उनकी सगाई हुई और 24 सितंबर 2023 को उदयपुर के 'द लीला पैलेस' में उन्होंने शाही अंदाज में शादी की. अक्टूबर 2025 में इस जोड़े के जीवन में एक नया मोड़ आया जब उनके बेटे नीर का जन्म हुआ.
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