पहले कांग्रेस अब बीजेपी को घेरने वाली 'महंगाई डायन खाए जात है' गाने की क्या है कहानी? जानिए शूटिंग से लेकर रिकॉर्डिंग तक की इनसाइड स्टोरी

Mehngai Dayain Song: पीपली लाइव का चर्चित गाना 'महंगाई डायन खाए जात है' एक बार फिर सोशल मीडिया और राजनीति के केंद्र में आ गया है. कभी कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए इस्तेमाल हुआ यह गाना अब महंगाई और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को लेकर बीजेपी सरकार पर तंज के रूप में वायरल हो रहा है. चर्चित चेहरा में जानें चर्चा में आए पूरी कहानी.

Raghubir Yadav
Raghubir Yadav

रूपक प्रियदर्शी

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2010 में जब मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे तब आमिर खान ने फिल्म बनाई थी-पीपली लाइव. रिलीज होते भयंकर वायरल हो गई क्योंकि इसने मीडिया के टीआरपी के खेल, चुनावी राजनीति, किसानों की आत्महत्या जैसे हार्ट हिटिंग टॉपिक पर बहुत तीखा व्यंग्य कसा था. तब देश में महंगाई को लेकर मनमोहन सरकार के लिए माहौल अच्छा नहीं था. फिल्म का गाना 'महंगाई डायन खाए जात है', तब की विपक्ष बीजेपी ने प्रोटेस्ट एंथम जैसा लपक लिया. संसद से लेकर सड़क तक रैलियों में गाने बजाए. सिर पर गैस सिलेंडर रखकर प्रोटेस्ट किया. सरकार ने सेंसरशिप से गाने का गला नहीं घोंटा, न महंगाई डायन का. 

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4 दिन में पेट्रोल-डीजल के दाम ताबड़तोड़ बढ़े तो अचानक सोशल मीडिया पर वही गाना बजने लगा. लोगों ने ऐसे पेश किया कि सत्ता तो बदली, लेकिन आम आदमी के हालात नहीं बदले है. 16 साल बाद इतिहास कुछ ऐसा पलटा कि केंद्र सरकार को घेरने के लिए सोशल मीडिया पर उन्हीं बीजेपी नेताओं के पुराने वीडियो, भाषणों की क्लिपिंग वायरल हो रही है जो आज सत्ता में हैं. 

जन-मन के गीत किसी पार्टी या सरकार के बंधक नहीं होते, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ आम आदमी आवाज बनते हैं. जो गाना 2010 में कांग्रेस को चिढाता था वही गाना आज 2026 में तेल, राशन, की महंगाई के बीच मोदी सरकार को भी चुभ रहा है. इसलिए चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानेंगे दर्द भरी आवाज में महंगाई डायन का सितम सुनने वाले एक्टर रघुबीर यादव की कहानी.

कैसे शुरू हुई महंगाई डायन की चर्चा?

महंगाई की आग में घी का काम किया उसी आमिर खान प्रोडक्शंस ने जो गांव से ढूंढकर लाई थी महंगाई डायन. पॉलिटिकली करेक्ट रहने वाले आमिर खान की फिल्म कंपनी के किए गए कांड के बाद कांड पे कांड हुए जा रहे हैं. आमिर खान प्रोडक्शंस वाले देश के हालात को लेकर इतने इमोशनल हुए कि 23 मई को सोशल मीडिया पेजेज पर पीपली लाइव का वो वीडियो शेयर कर दिया जिसमें रघुबीर यादव का गाना बज रहा था. स्क्रीन पर हर महीना उछले पेट्रोल जैसी लाइनें दिख रही थीं. कैप्शन में लिखा मारा- 'Hoping mehngai daiyan finally leaves us alone' यानी उम्मीद है कि महंगाई डायन आखिरकार हमारा पीछा छोड़ देगी. 

ये सारा कुछ सरकार के खिलाफ जा रहा था, फिर तो वही हुआ जो होना था. भारी ट्रोलिंग, विवाद, बॉयकॉट के डर से प्रोडक्शन हाउस तुरंत बैकफुट पर चली गई. वीडियो, ट्वीट यानी सारा कंटेंट डिलीट कर दिया गया लेकिन बात खत्म होने की बजाय शुरू हुई. डिजिटल स्पेस में बहस छिड़ी है कि क्या आमिर खान सरकार और ट्रोल आर्मी के दबाव में आकर डर गए? नरेंद्र मोदी के गुजरात सीएम रहते आमिर खान और बीजेपी के बीच टेंशन का पुराना अतीत रहा है. बीच में सब कुछ ठीक ठाक मान लिया गया था. अब अचानक आमिर खान प्रोडक्शंस ने सारे समीकरण पलट दिए.डिजिटल स्पेस में बहस तेज है क्या आमिर खान सरकार और ट्रोल आर्मी के दबाव में आकर डर गए? 

फिर से फंसे गए रघुबीर यादव?

आमिर खान की कंपनी ने पोस्ट डिलीट कर दिया था लेकिन तब तक महंगाई डायन सरकार के पीछे पड़ चुकी थी. महंगाई डायन की किस्मत कुछ ऐसी कि जब पहली बार फिल्म का गाना बजा तो उसे कांग्रेस के खिलाफ माना गया. जब दूसरी बार बज रहा है तो बीजेपी के खिलाफ माना जा रहा है. तब भी फिजूल में फंसे थे रघुबीर यादव, आज भी फंसे हैं.

रघुबीर यादव गांव से निकलकर वाया थियेटर, फिल्मों में बड़े मुकाम पाने वाले एक्टर हैं. कहा जाता है सच्चा थियेटर वही है जो जनता के पेट की भूख और दिल की हूक को पर्दे पर उतार दे, और रघुबीर यादव इसी थियेटर का जीता-जागता चेहरा हैं.

रघुबीर यादव की कहानी

रघुबीर यादव के जीवन का सफरनामा खुद में एक 'सस्टेनेबल मॉडल' है, जिसने कभी हार मानना नहीं सीखा. ऐसे एक्टर हैं जिनकी फिल्मोग्राफी एक्टिंग की पूरी पाठशाला मानी जाती है. मध्य प्रदेश के जबलपुर के पास रांझी गांव के एक किसान परिवार में जन्मे रघुबीर यादव को तो फिल्मों में आना ही नहीं था. पिता चाहते थे खेती करें या कोई सरकारी नौकरी कर ले लेकिन रघुबीर का दिल तो रामलीलाओं और भजन मंडली में बसता था. 

परिवार के प्रेशर से तंग आकर 15 साल की उम्र में घर से भाग गए. पहला ठिकाना ढूंढा पारसी थियेटर कंपनी में, जहां दिन के ढाई रुपये मिलते थे. इसी में टेंट लगाने, पर्दे खींचने से लेकर छोटे-मोटे रोल करने और गाने गाने तक का हर काम करना होता था. करीब 6 साल तक बंजारा थियेटर के साथ घूमने के बाद समझ आया कि अगर एक्टिंग में कुछ करना तो सीखना होगा. 

कैसा ब्रांड बने रघुबीर?

दिल्ली आकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया. 1977 में NSD से पास आउट होने के बाद 10 सालों तक घिसते रहे लेकिन मामला जमा नहीं. फिर 1985 में मैसी साहब फिल्म के फ्रांसिस मैसी के कैरेक्टर ने सब बदल दिया. बेमिसाल एक्टिंग ने अंतरराष्ट्रीय तहलका मचाया. फिर बारी आई घर-घर फेमस होने की. दूरदर्शन के मशहूर शो 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' ने घर-घर में ब्रैंड बना दिया. गांव का एक सीधा-साधा लड़का हिम्मत दिखाकर भारतीय सिनेा का सबसे सम्मानित मेथड एक्टर बन रहा था. 

फिर तो लाइन लगती रहीं. सलाम बॉम्बे, धारावी, रदाय, बैंडिट क्वीन, रुदाली, लगान, पीपली लाइव ने रघुबीर यादव को पैरेलल सिनेमा का स्टार बना दिया. इस स्टार ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो आज तक टूटा नहीं. 8-8 फिल्में ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुईं. लगान जैसी कॉमर्शियल फिल्म में लेकर आमिर खान ने रघुबीर यादव को बड़ा सम्मान दिया. ये सिलसिला पीपली लाइव तक जारी रही. पीपली लाइव के बाद लंबे समय तक साइलेंट रहे रघुबीर यादव ने ओटीटी सीरीज पंचायत से धमाकेदार वापसी की. 2004 की लापता लेडीज तीसरी फिल्म बनी जो उन्होंने आमिर खान के साथ की है. 

महंगाई डायन की पूरी कहानी

महंगाई डायन गाने की पूरी कहानी अनकन्वेंशनल है. गाने को किसी नामी बॉलीवुड गीतकार ने नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के गुना जिले के रहने वाले एक बेहद गरीब लोक कलाकार रघुवीर कर्मकार ने लिखा था. रघुवीर कर्मकार 'कमलापुरी' और 'भदवई' लोक मंडली के साथ घूम-घूमकर गाते थे और उन्होंने देश में सूखे, भुखमरी और गरीबी के वास्तविक हालातों को अपनी आंखों से देखकर इस गाने को कागज पर उतारा था. 

गीतकार और रघुबीर ने लिखा किसी सरकार के विरोध के लिए नहीं, बल्कि उस महिला के दर्द की कहानी बताई जिसका लाचार पति दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करके पैसे कमाता तो है, लेकिन महंगाई के कारण बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी भी नहीं जुटा पाता. गाने को गाया भी एक्टर रघुबीर यादव ने भदवई मंडली के लोक कलाकारों के साथ पीपली लाइव में एक्टिंग करते हुए सिंगिंग की. इस देश में गीतकार उतने याद नहीं किए जाते जितने सिंगर और एक्टर. इसीलिए महंगाई डायन रघुबीर यादव के साथ हमेशा के लिए चिपक चुका है.

रघुबीर यादव की लव-लाइफ जर्नी

महंगाई से तंग एक पत्नी के दर्द की कहानी सुनाकर हिट हुए रघुबीर यादव खुद पत्नी के मामले में जरा कमजोर निकले. NSD में रहते हुए मुलाकात डांसर पूर्णिमा खरगा से हुई जिनके साथ 1988 में शादी की. प्यार और समर्पण इतना गहरा कि पूर्णिमा ने रघुबीर का करियर बनाने और परिवार संभालने के लिए डांसिंग करियर छोड़ दिया. शादी के 7 साल बाद, यानी साल 1995 से चीजें खराब होने लगीं. पूर्णिमा ने रघुबीर पर एडल्ट्री के आरोप लगाकर साथ छोड़ दिया. तब से चल रहा तलाक का केस आज भी बड़े विवादों के साथ चल रहा है.

2010 में गुजारा भत्ता न देने के कारण उन्हें 7 दिनों की जेल हो गई. बाहर निकले तो 40 हजार हर महीने गुजारा भत्ता देने लगे. पूर्णिमा ने 10 करोड़ की एनिमनी मांगी जिसके लिए रघुबीर तैयार नहीं है. केस बांद्रा कोर्ट में आज भी चल रहा है. शादी तो टूट गई लेकिन रघुबीर यादव का प्यार से भरोसा नहीं उठा. पत्नी से अलग होने के बाद रघुबीर यादव का नाम टीवी एक्ट्रेस रोशनी अचरेजा से जुड़ा, जो एक्टर संजय मिश्रा की पूर्व पत्नी हैं. दावा है कि दोनों ने लंबे समय से लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हुए नए सिरे से परिवार बसाया है.

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