तमिलनाडु के सलेम में एक श्मशान घाट पर एक मासूम बच्ची का अंतिम संस्कार किया जा रहा था. करीब 150 किलोमीटर दूर कोयंबटूर के पुलिस मुख्यालय में कैमरों की फ्लैश लाइट चमक रही थी. टेबल पर सजे टीवी माइक के पीछे बैठी थीं राज्य की सबसे तेज तर्रार IPS अधिकारियों में शुमार, आईजी आर. वी. रम्या भारती और और दो सीनियर पुलिस अफसर, कोयंबटूर रेंज के डीआईजी और कोयंबटूर के एसपी पवन कुमार रेड्डी. मौका था पुलिस की हीरोगीरी बताने-समझाने का और रम्या भारती का ये हक बनता था. 10 साल की मासूम बच्ची के अपहरण, बलात्कार और हत्या के आरोपी दरिंदों को महज 24 घंटे में सलाखों के पीछे पहुंचाने की कामयाबी हासिल की थी. लेकिन, इसी बीच कैमरों ने कुछ ऐसा कैद कर लिया जिसने इस पूरी कानूनी जीत को पल भर में मानवीय संवेदना की हार में बदल दिया.
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प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से ठीक पहले कैमरों ने कुछ ऐसा रिकॉर्ड कर लिया, जिसने पुलिस की इस बड़ी कामयाबी को पल भर में नेशनल कंट्रोवर्सी में बदल दिया. अफसरों की हंसी ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीति तक गुस्से से भर दिया. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में आज जानेंगे इसी महिला आईपीएस अफसर की कहानी जो देखते-देखते बन गई कुख्यात पुलिस अफसर.
वायरल हो रहा वीडियो
कहानी एक बेहद काबिल महिला आईपीएस अधिकारी की ड्यूटी और परसेप्शन के बीच की वो पतली लकीर की है, जहां 24 घंटे की शानदार कानूनी कामयाबी पर चंद सेकंड की एक गैर-इरादतन मुस्कान भारी पड़ गई. यही तो है इंटरनेट के वायरल एज का दस्तूर. सोशल मीडिया के दौर में, पुलिस की वो 24 घंटे की कड़ी मेहनत, वो तफ्तीश और वो कामयाबी एक तरफ छूट गई और इंटरनेट पर तैरने लगी तो सिर्फ वो 4 सेकंड की हंसी-मुस्कान.
पुलिस महकमे के लिए ये एक 'डिजिटल एक्सीडेंट था, जहां ब्रीफिंग से पहले की एक सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया को बच्ची से रेप की घटना से जोड़कर पेश कर दिया गया. फैक्ट-चेक हुआ तो पता चला कि कुछ सेकंड की अनौपचारिक बातचीत के वीडियो को रील/शॉर्ट्स फॉर्मैट में एडिट कर ऐसे पेश किया गया जैसे रम्या और उनके अफसर रेप के केस पर ही हंस रहे हैं.
कौन है आईजी आर.वी. रम्या भारती?
विवाद के सेंटर में हैं आईजी आर. वी. रम्या भारती. तमिलनाडु में महिला सुरक्षा की ब्रैंड एंबेसडर ही सवालों के घेरे में है यानी कहानी का सबसे दिलचस्प विरोधाभास खुद आईजी रम्या भारती की अपनी प्रोफाइल है. पूरे करियर में बाल और महिला सुरक्षा के लिए लड़ती रही, आज सोशल मीडिया की एक क्लिप ने उसी अफसर को 'असंवेदनशील' के कटघरे में खड़ा कर दिया है. चेन्नई में पोस्टिंग के दौरान रम्या भारती ने वुमन सिक्योरिटी का मैसेज देने और ग्राउंड पर रियल्टी चेक करने के लिए कुछ ऐसा कदम उठाया कि उनका महकमा और सीएम स्टालिन तक दंग रह गए. रात 2 बजे साइकिल चलाते हुए पेट्रोलिंग पर निकल पड़ीं. जब उनकी तस्वीरें वायरल हुई तो सीएम स्टालिन भी तारीफ किए बिना नहीं रह पाए.
विवादों से परे, रम्या तमिलनाडु कैडर की 2008 बैच की बेहद 'क्रैक कॉप' और तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी हैं. वो देश के उन टैलेंटेड सिविल सर्विसेज अफसरों में शामिल हैं जो महज 21-22 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनीं. आईपीएस बनने से पहले सोशियोलॉजी में ग्रेजुएशन किया और साइबर फोरेंसिक में एमएससी की. रम्या भारती को ड्रग माफियाओं और महिला अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के लिए जाना जाता है.
काफी प्रभावशाली रहा करियर!
चेन्नई में पोस्टिंग के दौरान उनके पहल से शुरू अच्चमिल्लई यानी निडर महिला सुरक्षा विंग के लिए उन्हें सीएम का स्पेशनल मेडल भी मिला. मदुरै, कोयंबटूर की एसपी और चेन्नई की जॉइंट कमिश्नर रह चुकी रम्या तमिलनाडु पुलिस की काबिल और 18 साल की एक्सपीरियंस पुलिस अफसर मानी जाती हैं. सेंट्रल डेप्यूटेशन के दौरान रम्या केंद्र सरकार के सिविल एविएशन ब्यूरो में डिप्टी डायरेक्टर जनरल रहीं और देश की एविएशन सिक्योरिटी की निगरानी की. अप्रैल 2026 में वापस तमिलनाडु लौटीं और वेस्ट जोन की पहली महिला आईजी बनीं. वेस्ट जोन की आईजी रम्या भारती के अंडर कोयंबटूर, ईरोड, धर्मपुरी समेत 8 जिले आते हैं. आईजी के नीचे थ्री-टायर सीनियर ऑफिसर सिस्टम काम करता है. 2 डीआईजी, 8 एसपी, 40 से अधिक ज्यादा DSP/ASP और 150 से ज्यादा पुलिस इंस्पेक्टर रम्या भारती को सलाम ठोकते हैं.
कोलकाता में डीसीपी भी रही रम्या
रम्या भारती का होम कैडर तो तमिलनाडु है लेकिन इंटर कैडर डेप्युटेशन पर उनकी पोस्टिंग बंगाल में भी रही. अगस्त 2019 में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने रम्या भारती को व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों के आधार पर विशेष मंजूरी दी थी. उन्होंने तमिलनाडु से बाहर ट्रांसफर की मांग की थी, जिसे स्वीकार करते हुए उन्हें 3 साल के लिए पश्चिम बंगाल भेजा गया था. वहां रम्या कोलकाता में डीसीपी रहीं. फिर तीन साल पूरे होने से पहले मूल कैडर तमिलनाडु लौट गईं. ये पता नहीं चला कि तमिलनाडु से बंगाल जाने के पर्सनल फैमिली कारण क्या थे. उन्होंने अपने फैमिली लाइफ को एकदम पर्सनल रखा. ज्यादा कुछ पता है नहीं.
क्या है विवाद की पूरी कहानी?
कहानी की शुरुआत 21 मई को कोयंबटूर के सुलूर इलाके से हुई. एक 10 साल की मासूम बच्ची अचानक गायब हुई. जब शव मिली तो इंसानियत कांप उठी. रेप के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. तमिलनाडु के नए-नए सीएम बने थलापति विजय की सरकार के लिए ये बड़ा धब्बा था. आईजी रम्या भारती ने तुरंत कमान संभाली. बच्ची को तो बचा नहीं पाईं लेकिन 5 स्पेशल टीमें बनाकर 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से सुराग जुटाकर रिकॉर्ड 24 घंटे में दो मुख्य आरोपियों कार्तिक और मोहन राज को दबोच लिया.
पुलिस की कामयाबी बड़ी थी, लेकिन जैसे ही प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर आया, जनता का गुस्सा फूट पड़ा. दरअसल, मीडिया ब्रीफिंग शुरू होने से ठीक पहले आईजी रम्या भारती और उनके साथी अधिकारी आपस में कुछ बात करते हुए मुस्कुराते और हंसते नजर आए थे. एक तरफ एक मासूम की दर्दनाक मौत का मातम था, और दूसरी तरफ सीनियर पुलिस अफसरों वो भी एक महिला अफसर की हंसी-इंटरनेट पर लोग एकदम टूट पड़े. कहना शुरू किया- प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठहाके लगाना, नाखून चबाना-घिसना कितना असंवेदनशील है.
वायरल वीडियो की असल सच्चाई क्या?
इतना बड़ा कांड हुआ तो वायरल वीडियो का सच जानने के लिए पोस्टमार्टम शुरू हुआ. पता चला कि जब पुलिस वाले हंसी मजाक कर रहे थे तब तक औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू भी नहीं हुई थी. हंसी किसी अनौपचारिक बात पर थी और उसे 'आउट ऑफ कॉन्टेक्स्ट' फैलाया गया, लेकिन तब तक इंटरनेट पर रम्या भारती के खिलाफ आग भड़क चुकी थी. पीड़ित परिवार ने ये तो माना कि पुलिस ने आरोपियों को पकड़कर अपना काम तो किया, लेकिन इतनी बड़ी ट्रेजेडी के बाद अफसरों की बॉडी लैंग्वेज में जो सीरियसनस होनी चाहिए थी, वो गायब थी. वही जख्म पर नमक रगड़ने जैसा साबित हुआ.
सोशल मीडिया पर मचा है बवाल
4 सेकंड की क्लिप सोशल मीडिया के लिए काफी थी. #JusticeForSulurVictim और #SuspendCoimbatorePolice जैसे हैशटैग आज तक ट्रेंड कर रहे हैं. यूजर्स 4 सेकंड की क्लिप शेयर करते हुए लिख रहे हैं, "क्या एक मासूम की मौत इन अफसरों के लिए सिर्फ एक रूटीन केस है? लांछन जब लगा तो पूरे पुलिस महकमा भी एक्टिव हुआ. आईजी रम्या भारती के समर्थन में पुलिस के लोग और समर्थक दलीलें पेश कर रहे हैं कि 24 घंटे बिना सोए अपराधियों को पकड़ने वाली टीम की मेहनत को सिर्फ 4 सेकंड की एक अनौपचारिक मुस्कान के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता. रम्या ने खुद चुप्पी तोड़ी तो स्थिति संभलनी शुरू हुई.
सीएम विजय ने दिए निर्देश
सीएम सी. जोसेफ विजय ने भी वायरल वीडियो देखा होगा. चाहते तो फौरन सस्पेंड करते या ट्रांसफर करते या कुछ और करके सजा देते. उन्होंने ठंडे दिमाग से काम लिया. रेप के मामले को नाकाबिले माफी मानते हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाने का आदेश दिया. अधिकारियों के वायरल वीडियो से उपजे विवाद पर सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कि पुलिस अधिकारी संवेदनशील मामलों में मीडिया के सामने अपने आचरण और मर्यादा का विशेष ध्यान रखें. सरकार अपराधियों पर तो सख्त है ही, साथ ही जनता के बीच पुलिस की छवि को लेकर भी बेहद गंभीर है.
यह कहानी अब सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री या अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है. यह डिजिटल युग की वो नई चुनौती है, जो खाकी वर्दी से यह मांग करती है कि उन्हें न सिर्फ क्राइम सीन पर परफेक्ट होना होगा, बल्कि सोशल मीडिया के कैमरों के सामने भी अपनी हर एक सांस और हर एक मुस्कान पर पहरा बिठाना होगा. क्योंकि आज के दौर में जनता के लिए 'परसेप्शन ही रियलिटी' यानी जो दिखता है, वही सच मान लिया जाता है.
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