देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्ष के 'INDIA' गठबंधन के सांसदों से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है. CJI ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने रविवार को ही नेताओं के पत्र का जवाब भेज दिया था और उसमें मुलाकात न कर पाने के कारणों की जानकारी दे दी थी.
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यह फैसला ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन के नेता सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं.
कोर्ट जाने के लिए सभी का स्वागत
मुलाकात के आवेदन को खारिज करने के साथ ही मुख्य न्यायाधीश ने देश के न्यायिक तंत्र की निष्पक्षता और सभी के लिए उसकी उपलब्धता को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का मंच हर नागरिक के लिए बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध है.
CJI सूर्यकांत ने कहा:
"सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे देश के हर नागरिक के लिए हमेशा खुले हैं. चाहे कोई आम व्यक्ति हो या जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि, किसी भी याचिकाकर्ता का स्वागत है. भारत के हर नागरिक को अदालत का रुख करने का अधिकार है, हम उनकी बात सुनेंगे और कानून के मुताबिक जो भी सही होगा, वह कदम उठाएंगे."
मुलाकात न करने के पीछे की वजह
CJI सूर्यकांत ने सार्वजनिक रूप से इनकार का कारण स्पष्ट नहीं किया है, हालांकि उनका कहना है कि सांसदों को भेजे गए पत्र में वजह विस्तार से बता दी गई है. उन्होंने इस पूरे प्रकरण को कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा मामला बताया.
वहीं, आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिन विषयों को लेकर विपक्षी दल CJI से मिलना चाहते हैं, वे पहले से ही सर्वोच्च अदालत के समक्ष विचाराधीन (Sub-judice) हैं. न्यायिक परंपराओं और नियमों के तहत विचाराधीन मामलों पर व्यक्तिगत मुलाकात में चर्चा नहीं की जाती, इसलिए इस आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया.
क्या है अगला कदम?
CJI द्वारा मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद भी विपक्ष अपनी रणनीति पर कायम है। INDIA ब्लॉक के नेता सोमवार को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक अपना विरोध मार्च निकालने वाले हैं. वहीं CJI के बयान से यह भी साफ है कि यदि विपक्षी दल अपने मुद्दों पर कानूनी राहत चाहते हैं, तो उन्हें औपचारिक याचिका के जरिए ही अदालत के सामने अपनी बात रखनी होगी.
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