CJP का बड़ा ऐलान: देश के सभी शिक्षा मंत्रियों को लिखा पत्र, 5 सितंबर को इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक प्रोटेस्ट मार्च

न्यूज तक डेस्क

• 09:12 AM • 25 Aug 2026

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, बजट आवंटन और 10 लाख रिक्त शिक्षक पदों की स्थिति पर एक महीने के भीतर सार्वजनिक जवाब मांगा है.

सौरभ दास
सौरभ दास
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और युवा कार्यकर्ताओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संगठन ने देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र भेजकर स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और बजट आवंटन को लेकर कड़े सवाल पूछे हैं. 

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इसके साथ ही, मांगें पूरी न होने से नाराज युवाओं ने 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) को दिल्ली में इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक एक विशाल प्रोटेस्ट मार्च निकालने का बड़ा ऐलान किया है. 

शिक्षा मंत्रियों से पूछे गए कड़े सवाल

CJP के प्रतिनिधि के अनुसार, सरकार और जनता के बीच लगातार संवाद बना रहना चाहिए. इसी उद्देश्य से सभी शिक्षा मंत्रियों को पत्र भेजा गया है, जिसमें पूछा गया है कि:

  • राज्यों में सरकारी स्कूलों के रखरखाव और रेनोवेशन का क्या बजट तय किया गया है? 
  • कितने स्कूलों का रेनोवेशन हुआ है और कितने अभी भी जर्जर हालत में हैं? 
  • स्कूलों में खेल-कूद की सुविधाएं और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों नहीं हैं?
  • देश भर में खाली पड़े लगभग 10 लाख शिक्षकों के पदों को भरने के लिए क्या रोडमैप है?

संगठन ने सभी शिक्षा मंत्रियों को एक महीने के भीतर अपने-अपने राज्यों के सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति पर जवाब देने को कहा है. 

'स्कूल ठीक करो' अभियान और वीडियोग्राफी बैन पर तीखी प्रतिक्रिया

नेताओं ने कहा कि 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत जब युवा और छात्र स्कूलों का जायजा ले रहे हैं, तो कई राज्य सरकारें वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी पर बैन लगा रही हैं या एफआईआर दर्ज करा रही हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी बचकानी हरकतों और मुकदमों से युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. नेताओं ने सांसदों और विधायकों से अपील की कि वे भी युवाओं के साथ जाकर अपने क्षेत्रों के स्कूलों का ऑडिट करें. 

5 सितंबर को क्यों हो रहा है प्रोटेस्ट मार्च?

CJP के प्रतिनिधियों का कहना है कि 25 जुलाई को सरकार के साथ हुई सहमति के बाद देशव्यापी आंदोलन को सद्भावना (Good Faith) के तहत स्थगित किया गया था. उस समय कैबिनेट मंत्रियों के साथ हुए समझौते के तहत दो प्रमुख मांगें थीं:

  • नीट (NEET) पेपर लीक और विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं.
  • नीट पेपर लीक मामले के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए. 

हालांकि, एक महीने बाद भी सरकार ने इन वादों को पूरा नहीं किया है. युवाओं का आरोप है कि सरकार उनके साथ विश्वासघात कर रही है. इसी के विरोध में 5 सितंबर को इंडिया गेट पर सभी युवा, छात्र और संगठन एकजुट होंगे और वहां से पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे. 

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