Assam Election: असम की राजनीति इन दिनों सिर्फ चुनावी मुद्दों तक सीमित नहीं है बल्कि एक निजी रिश्ते को लेकर भी खूब हलचल मची हुई है. कांग्रेस सांसद और लोकसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न अचानक राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई हैं. आरोप-प्रत्यारोप का दौर इतना तेज हो गया है कि इसमें ISI और RAW जैसी एजेंसियों का जिक्र भी होने लगा है.
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दरअसल, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गौरव गोगोई और उनकी पत्नी के पाकिस्तान से कथित संबंधों का मुद्दा उठाया. उन्होंने एक SIT रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि एलिजाबेथ के कुछ संपर्क पाकिस्तान में रहे हैं और यह मामला गंभीर हो सकता है. सरमा ने यह भी कहा कि असम के एक सांसद ने अपने पिता के मुख्यमंत्री रहते पाकिस्तान का दौरा किया था और इसकी जानकारी केंद्र को नहीं दी गई थी. हालांकि उन्होंने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा गौरव गोगोई की ओर माना गया.
पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश
इन आरोपों के बाद राज्य में राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है. कांग्रेस का कहना है कि चुनाव से पहले पार्टी की छवि खराब करने के लिए यह सब एक सोची-समझी रणनीति है. वहीं गौरव गोगोई ने भी पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को 'सी-ग्रेड फिल्म से भी खराब' बताया और आरोप लगाया कि यह सब उनके खिलाफ लगे जमीन से जुड़े आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश है.
अगर एलिजाबेथ कोलबर्न की बात करें, तो उनकी और गौरव की कहानी किसी फिल्मी लव स्टोरी से कम नहीं लगती. दोनों की मुलाकात 2010 में संयुक्त राष्ट्र सचिवालय में इंटर्नशिप के दौरान हुई थी. दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और आखिरकार 2013 में दोनों ने शादी कर ली. आज वे दो बच्चों के माता-पिता हैं.
कौन है एलिजाबेथ
गौरव एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं वे असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे हैं. ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय रिश्ते को लेकर शुरुआत में दोनों परिवारों में कुछ हिचक जरूर थी, लेकिन बाद में सबकी सहमति से शादी संपन्न हुई. एलिजाबेथ लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ी हैं और उन्होंने क्लाइमेट डेवलपमेंट एंड नॉलेज नेटवर्क (CDKN) के साथ 2011 से 2015 तक काम किया. काम के सिलसिले में उन्हें पाकिस्तान में भी रहना पड़ा था. इसी दौरान बने उनके पेशेवर संपर्कों को लेकर बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाए हैं और कुछ ने इन्हें खुफिया एजेंसी ISI से जोड़ने की बात तक कह दी.
फिलहाल एलिजाबेथ ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट से जुड़ी हैं और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर काम करती हैं. लेकिन उनके प्रोफेशनल बैकग्राउंड को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है. मुख्यमंत्री सरमा का कहना है कि राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए SIT गठित की थी और अब इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपने का फैसला लिया गया है.
उनका दावा है कि मामले की गहराई से जांच जरूरी है और एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर सकती हैं. उन्होंने यह आशंका भी जताई कि एलिजाबेथ की भारत में मौजूदगी सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय हो सकती है. दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब चुनाव करीब हों, तब ऐसे मुद्दे उछालना राजनीतिक फायदे के लिए किया जाता है. उनका कहना है कि इससे मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है.
पिछले साल भी लगाए थे ऐसे ही आरोप
यह विवाद नया नहीं है. पिछले साल भी हिमंत बिस्वा सरमा ने इसी तरह के आरोप लगाए थे और एलिजाबेथ की नागरिकता को लेकर सवाल उठाया था. उस समय गौरव गोगोई ने व्यंग्यात्मक अंदाज में खुद को RAW का एजेंट बता दिया था. 2015 में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के साथ उनकी एक तस्वीर भी साझा की गई थी, जिस पर काफी चर्चा हुई थी.
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर असम में कांग्रेस को जीत मिलती है, तो गौरव गोगोई मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार हो सकते हैं. ऐसे में उन पर लग रहे आरोप चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं. फिलहाल सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही साफ होगा. लेकिन इतना तय है कि असम की राजनीति में इस मुद्दे ने नया मोड़ ला दिया है- जहां निजी जिंदगी, पेशेवर इतिहास और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर सवाल एक साथ बहस का हिस्सा बन गए हैं.
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