Operation Sindhoor: देश के लिए जान न्योछावर करने वाले जवानों के सम्मान को लेकर इस समय एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया और राजनीति में आरोप लग रहे थे कि सरकार ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में शहीद हुए छह जवानों की शहादत को एक साल तक देश से छिपाकर रखा. अब इन आरोपों पर रक्षा मंत्रालय ने खुलकर जवाब दिया है. मंत्रालय ने साफ कहा है कि इन वीर जवानों की शहादत को बिल्कुल नहीं छिपाया गया, बल्कि देश ने सबसे पहले मौके पर ही उन्हें नमन किया था और उनका नाम हमेशा आदर के साथ लिया जाएगा.
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क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई. उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों की कुर्बानी को एक साल तक देश से छिपाया और उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया. उनके इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई, जिसे देखते हुए रक्षा मंत्रालय को आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा.
मंत्रालय ने तारीखों के साथ दिया जवाब
बिना किसी का नाम लिए रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में गलत दावे किए जा रहे हैं. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 11 मई 2025 को ही सेना के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन जवानों की शहादत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी थी.
इसके बाद, 14 अगस्त 2025 को एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के जरिए इन वीरों को वीरता पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी. यही नहीं, सेना के सोशल मीडिया हैंडल पर भी उनकी बहादुरी की कहानियां साझा की गई थीं.
समारोहों में दिया जा चुका है सम्मान
मंत्रालय ने आगे जानकारी दी कि इसी साल 15 जनवरी को जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीदों के परिवारों को सेना मेडल सौंपे थे. वहीं, वायुसेना प्रमुख ने भी 8 अक्टूबर 2025 को एक विशेष कार्यक्रम में शहीद परिवार को सम्मानित किया था.
नेशनल वॉर मेमोरियल पर लिखे हैं नाम
इन छह जांबाजों के नाम दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल की दीवारों पर हमेशा के लिए दर्ज किए जा चुके हैं. शहीदों में सेना के सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं.
आपको बता दें कि पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था, जिसमें इन जवानों ने देश के लिए अपनी जान न्योछावर की थी. मंत्रालय ने कहा कि मेमोरियल पर नाम दर्ज करने की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसका पूरी गंभीरता से पालन किया गया. ऐसे मामलों पर राजनीति करना और विवाद खड़े करना बेहद अफसोसजनक है, क्योंकि इससे शहीद परिवारों की भावनाएं आहत होती हैं.
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