कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि बजट सत्र में सरकार की ओर से लाया गया परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक विपक्षी एकजुटता के कारण संसद में पारित नहीं हो सका.
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जयराम रमेश के मुताबिक, सरकार को इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी. लेकिन विपक्षी दलों के फ्लोर मैनेजमेंट ने सरकार की रणनीति सफल नहीं होने दी. उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल को सरकार को इस मुद्दे पर बड़ा झटका लगा.
कांग्रेस समेत कई दल एकजुट हुए
जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी और डीएमके समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर साथ आए. उन्होंने कहा कि डीएमके के साथ कांग्रेस के रिश्तों में कुछ मुद्दों पर दूरी रही है, लेकिन परिसीमन के सवाल पर पार्टी विपक्ष के साथ खड़ी रही. उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों ने सदन में सरकार को जरूरी समर्थन नहीं मिलने दिया. इसका सीधा असर विधेयक के मतदान पर पड़ा.
17 अप्रैल को क्या हुआ?
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वें संशोधन) विधेयक पर मतदान हुआ था. इस दौरान कुल 528 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया.
विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया. इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट की जरूरत थी. इस तरह विधेयक जरूरी आंकड़े से 54 वोट पीछे रह गया और पारित नहीं हो सका.
तमिलनाडु के प्रस्ताव का भी जिक्र
जयराम रमेश ने तमिलनाडु विधानसभा में पारित प्रस्ताव का भी हवाला दिया. इसमें मांग की गई थी कि परिसीमन नहीं किया जाना चाहिए. लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बरकरार रखी जाए.
प्रस्ताव में राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव नहीं करने और मौजूदा लोकसभा सीटों पर ही महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की बात कही गई थी. जयराम रमेश ने कहा कि यही मांग कांग्रेस की भी प्रमुख मांगों में शामिल है.
'सरकार अब नैरेटिव मैनेजमेंट में लगी'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि विधेयक के पारित नहीं होने के बाद केंद्र सरकार अब अपनी रणनीतिक विफलता से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक, सरकार विपक्ष पर दोष डालने के लिए नैरेटिव तैयार कर रही है.
जयराम रमेश ने कहा कि वास्तविकता यह है कि सरकार को दो-तिहाई बहुमत की उम्मीद थी, लेकिन वह आंकड़ा हासिल नहीं कर पाई. 17 अप्रैल का मतदान इसी वजह से सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हुआ.
विपक्ष का तर्क है कि परिसीमन के कारण राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन पैदा हो सकता है. इसी वजह से विपक्ष मौजूदा 543 सीटों को बरकरार रखने और इन्हीं सीटों पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग कर रहा है.
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