केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने की खबर सामने आने के बाद, इस पूरे आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार की भावनाएं कैमरों के सामने आईं. जैसे ही उनके माता-पिता को इस्तीफे की जानकारी मिली, वे भावुक हो गए और पत्रकारों के सवालों पर उनकी आंखें भर आईं.
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और बेटे की इस रणनीतिक लड़ाई के बाद सरकार के घुटने टेकने पर जब मीडियाकर्मियों ने उनके माता-पिता की प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो पहले तो वे बोल नहीं पाए. इमोशनल हो गए.
मां ने कहा- बेटे पर गर्व है, आज बहुत खुश हूं
अभिजीत दीपके की मां ने आज तक से खास बातचीत करते हुए कहा- 'आज बहुत खुशी हो रही है कि हमारे बच्चे आज फ्री हो गए हैं. अब मुझे अपने बेटे पर बहुत गर्व हो रहा है और गर्व से कहती हूं कि अभिजीत ने बहुत अच्छा काम किया है.'' साथ ही अभिजीत दीपके की मां ने डर और चिंताएं जाहिर करते हुए कहा- 'बीच में हमें बहुत डर लग रहा था कि कहीं उसे कुछ हो न जाए, कोई उसे मार न दे. हमें रात के 4-4 बजे तक नींद नहीं आती थी'
"आज हमने टीवी लगाया और देखा कि उसने कितना बड़ा काम कर दिया है. रिश्तेदार और सब लोग तनाव में थे कि अकेला लड़का क्या कर पाएगा, लेकिन उसने इतना बड़ा काम करके दिखाया.''
हमारी आंखों में खुशी के आंसू हैं- अनीता दीपके
अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने अपनी छलकती आंखों पर कहा- "आंखों में जो आंसू हैं, वे खुशी के आंसू हैं. मेरे बच्चे की आज जीत हुई है. उसने जो कष्ट सहे, खुले में मच्छरों के बीच सोया, थप्पड़ खाए, स्याही फेंकी गई, लेकिन आज उसकी मेहनत सफल हुई."
अमेरिका की नौकरी छोड़ दीपके ने चुना जोखिम भरा रास्ता
अभिजीत दीपके के माता-पिता पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताओं को बयां कर चुके हैं. उनका कहना था कि वे कभी नहीं चाहते थे कि उनका बेटा राजनीति के इस अनिश्चित और जोखिम भरे रास्ते पर चले. अभिजीत की मां ने भावुक होकर बताया था कि उन्होंने बेटे को अमेरिका में अपनी सुरक्षित और आरामदायक नौकरी न छोड़ने की सलाह दी थी, लेकिन अभिजीत ने देश के युवाओं और व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना.
मां ने बताया कि अभिजीत 6 जून से लगातार इस आंदोलन और तनाव में था. इस दौरान उसे नींद तक नसीब नहीं हुई और बीमारी (टाइफाइड व लो बीपी) से भी जूझना पड़ा. रातों की नींद उड़ी थी: "रात-रात भर 3-3 बजे तक हम सो नहीं पाते थे कि बच्चे का क्या होगा. आज जब परिणाम आया है तो लगता है कि उसकी मेहनत सफल हुई और कलेजे को ठंडक मिली है.''
ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां और घर छोड़ने की नौबत
पिता भगवान राम दीपके ने बेटे के सार्वजनिक जीवन से जुड़े खतरों और लगातार मिल रही धमकियों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी. परिवार का दावा है कि बीते दिनों में उन्हें भारी ऑनलाइन ट्रोलिंग और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा. हालात इतने बिगड़ गए थे कि परिवार को अपना घर तक छोड़ना पड़ा था. इन परिस्थितियों के चलते पूरा परिवार मानसिक तनाव में था और ठीक से सो भी नहीं पा रहा था.
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में क्या कहा?
उल्लेखनीय है कि देश भर में जारी आंदोलन और जंतर-मंतर के दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि यह फैसला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि देश के छात्रों का समय कानूनी पेचीदगियों में न उलझे और वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें.
उन्होंने यह भी लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें गहराई से दुखी किया है और वे नहीं चाहते कि इन परिस्थितियों का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी ताकत उठाए.
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