Dharmendra pradhan resignation: कॉकरोचों के आगे झुकी सरकार! शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

न्यूज तक

25 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 25 2026 2:49 PM)

देशभर में जारी छात्र आंदोलन और नीट परीक्षा विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में उन्होंने परीक्षा सुधार, सीबीआई जांच और जंतर-मंतर के हालात का जिक्र करते हुए त्यागपत्र देने की वजहें विस्तार से बताई हैं.

Dharmendra Pradhan
Dharmendra Pradhan (file photo)
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Dharmendra pradhan resignation: देशभर में जारी छात्र आंदोलन और नीट-यूजी परीक्षा को लेकर बने तनाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है. सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी तरह के राजनीतिक या सामाजिक विवाद से बहुत ऊपर है.

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धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि वे चार दशकों से भी अधिक समय से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा प्रणाली के सुधार से जुड़े रहे हैं. उनका मानना है कि एक मजबूत और समावेशी शिक्षा व्यवस्था ही किसी देश की असली ताकत होती है. वे भारत के युवाओं की आकांक्षाओं और सपनों का हमेशा सम्मान करते आए हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश सेवा का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया.

नीट परीक्षा में धांधली, सीबीआई जांच और सीबीटी मोड

शिक्षा मंत्री ने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी सामने आई थी. सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला सीबीआई को सौंपा, परीक्षा रद्द की और नई तारीख का ऐलान किया. इसके साथ ही यह भी फैसला लिया गया कि अगले साल से यह परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी.

20 लाख से अधिक छात्रों के लिए सुचारू व्यवस्था

परीक्षा के आयोजन को लेकर सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों का भविष्य सुरक्षित करना था. इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने मिलकर काम किया. छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से इस पूरी स्थिति की जिम्मेदारी ली.

16 जुलाई के परिणाम और बाधा डालने की कोशिश

16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के नतीजों को उन्होंने संतोषजनक बताया, जिसमें गरीब परिवारों के बच्चों को भी सफलता मिली. हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भटकाने और प्रक्रिया में रुकावट डालने का प्रयास किया, जिससे उनका मन काफी आहत हुआ.

जंतर-मंतर के हालात और इस्तीफा देने का मुख्य कारण

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से वे दुखी हैं. जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बने माहौल का फायदा राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठा सकें, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया. वे चाहते हैं कि बच्चे कानूनी उलझनों में फंसे बिना अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें. इसी सोच के साथ उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेजा है. अंत में उन्होंने प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से देश और ओडिशा की जनता की सेवा करते रहने का संकल्प दोहराया.