दुनिया पर एक बार फिर एक खतरनाक वायरस का साया मंडराने लगा है. अफ्रीकी देश कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इसे 'इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' घोषित कर दिया है. डब्ल्यूएचओ ने साफ किया है कि फिलहाल यह स्थिति महामारी (Pandemic) के दायरे में नहीं आती है, लेकिन हालात बेहद गंभीर हैं और तुरंत कदम उठाने की जरूरत है.
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तेजी से पैर पसार रहा है संक्रमण
संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी से मिले आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार तक कांगो के इतुरी प्रांत में हालात सबसे ज्यादा खराब दिखे. यहां के तीन प्रमुख स्वास्थ्य क्षेत्रों बुनियादी, रवामपारा और मोंगब्वालू में अब तक 80 संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं. इसके अलावा 8 मामलों की लैब से पुष्टि हुई है, जबकि 246 संदिग्ध मरीज सामने आ चुके हैं. राहत की बात यह है कि इसकी वैक्सीन मौजूद है, लेकिन अभी तक इसका कोई पक्का इलाज नहीं मिल पाया है.
पड़ोसी देश युगांडा तक पहुंचा वायरस
इबोला का खतरा अब सिर्फ कांगो तक सीमित नहीं रहा. कांगो से यात्रा कर युगांडा पहुंचे दो लोगों में भी इस वायरस की पुष्टि हुई है. युगांडा की राजधानी कंपाला में 15 और 16 मई को ये दोनों मरीज मिले. हैरान करने वाली बात यह है कि इन दोनों मरीजों का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं था, जिससे साफ होता है कि संक्रमण अब तेजी से फैल रहा है.
कितना खतरनाक है इबोला वायरस?
इबोला एक बेहद दुर्लभ लेकिन जानलेवा बीमारी है. यह वायरस एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी से फैलता है. अगर कोई व्यक्ति संक्रमित मरीज के खून, पसीने, उल्टी या वीर्य जैसे शारीरिक तरल पदार्थों (बॉडी फ्लूइड्स) के सीधे संपर्क में आता है, तो वह भी इस बीमारी की चपेट में आ जाता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बीमारी में लापरवाही सीधे मौत का कारण बन सकती है.
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