'नमाज का बहाना और पीछे से...' फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित ने बताई कॉकपिट के हमले की पूरी इनसाइड स्टोरी

न्यूज तक डेस्क

04 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 4 2026 9:10 AM)

फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि ओमानी को-पायलट नमाज पढ़ने के लिए सीट से उठा और कुछ मिनट बाद पीछे से कुल्हाड़ी से हमला कर दिया. गंभीर चोट के बावजूद स्मित ने दो बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की.

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फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मछार ने 30 सितंबर को विमान के कॉकपिट में हुए हमले की पूरी कहानी बताई है. उन्होंने बताया कि ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी अपनी सीट से नमाज पढ़ने के लिए उठा था. स्मित को लगा कि वह उनके पीछे नमाज पढ़ रहा है. सम्मान के चलते उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. करीब चार से पांच मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे जोरदार वार हुआ.

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हमले के लिए जिस कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया गया, वह विमान में आपात स्थिति के लिए रखी गई थी. अचानक हुए हमले से स्मित की आंखों के सामने धुंधला छा गया. इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की. पहली बार दरवाजा खुला, लेकिन को-पायलट ने उसे फिर बंद कर दिया. स्मित फर्श पर गिर गए. इसके बाद उन्होंने दोबारा उठकर दरवाजा खोलने की कोशिश की और इस बार कामयाब रहे. दरवाजा खुलते ही बाहर मौजूद लोग कॉकपिट में दाखिल हुए और हमलावर को काबू कर लिया.

पहली चोट के बाद समझ नहीं आया कि हुआ क्या

स्मित ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बताया कि विमान सामान्य रूप से उड़ रहा था. इसी दौरान को-पायलट अपनी सीट से उठा और नमाज पढ़ने लगा. उन्हें इसमें कुछ असामान्य नहीं लगा. उन्होंने जानबूझकर पीछे नहीं देखा.

करीब चार से पांच मिनट बाद उनके सिर के पीछे अचानक जोरदार चोट लगी. पहला वार इतना अचानक था कि उन्हें तुरंत समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है. उन्हें लगा कि शायद विमान किसी चीज से टकरा गया है या कोई बड़ी गड़बड़ी हुई है. दूसरा वार होने के बाद उन्हें पता चला कि उनके पीछे मौजूद व्यक्ति ही उन पर हमला कर रहा है.

इसके बाद दोनों के बीच संघर्ष शुरू हो गया. हमले के कारण स्मित की नजर धुंधली हो गई थी. इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे की ओर जा रहा है.

पहली कोशिश में बंद हुआ कॉकपिट का दरवाजा

गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे. उन्होंने दरवाजा खोला, लेकिन को-पायलट ने उसे फिर बंद कर दिया. इसके बाद स्मित फर्श पर गिर गए.

हालात बेहद गंभीर थे. इसके बावजूद उन्होंने दोबारा कोशिश करने का फैसला किया. स्मित को एहसास था कि उनके पास शायद सिर्फ एक और मौका है. उन्होंने पूरी ताकत जुटाई और फिर दरवाजे तक पहुंचे.

दूसरी बार उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. बाहर मौजूद लोग अंदर आने के लिए तैयार थे. दरवाजा खुलते ही वे कॉकपिट में दाखिल हुए और हमलावर को काबू कर लिया.

दरवाजा खोलने के तरीके पर भी कैप्टन ने दी जानकारी

बातचीत के दौरान कॉकपिट के दरवाजे को लेकर भी जानकारी सामने आई. नेतन्याहू ने बातचीत में 'पिन खींचने' का जिक्र किया था. इस पर स्मित ने स्पष्ट किया कि दरवाजे में ऐसा कोई पिन नहीं था.

उन्होंने बताया कि कॉकपिट के अंदर से एक नॉब घुमाकर दरवाजा खोला जा सकता था. वहीं बाहर से अंदर आने के लिए एक कोड डालना पड़ता था. बाहर मौजूद लोग कोड डालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमलावर दरवाजा खुलने नहीं दे रहा था. ऐसे में स्मित के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस नॉब तक पहुंचना थी. जब उनका हाथ नॉब तक पहुंचा तो उन्होंने उसे थोड़ा घुमाया और दरवाजा खोल दिया.

विमान में सवार थे 174 लोग

30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी. विमान में 174 लोग सवार थे. इनमें ज्यादातर इजरायली थे. उड़ान के दौरान ओमानी को-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया. हमले के बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा और हाईजैक जैसी आपात स्थिति पैदा हो गई.

यात्रियों और अन्य पायलटों की मदद से हमलावर को काबू किया गया. इसके बाद विमान पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया गया. विमान को उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबूक की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी सुरक्षित लैंडिंग हुई.

इस मामले की जांच संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इजरायल के अधिकारी कर रहे हैं. नेतन्याहू ने ओमानी को-पायलट को लेकर कहा है कि वह 'इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित' हुआ था. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारी हमले की परिस्थितियों, इसके मकसद और किसी संभावित साजिश या आतंकी कनेक्शन की जांच कर रहे हैं.

पीएम मोदी से भी की थी बातचीत

हमले में घायल कैप्टन स्मित को सऊदी अरब से संयुक्त अरब अमीरात ले जाया गया है. वह वहां अपनी चोटों से उबर रहे हैं. 3 अक्टूबर को स्मित ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की और उन्हें कॉकपिट में हुई घटना के बारे में विस्तार से बताया.

इससे एक दिन पहले 2 अक्टूबर को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की थी. पीएम मोदी से बातचीत के दौरान स्मित ने बताया था कि गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने खुद को दोबारा खड़ा करने का फैसला किया, क्योंकि विमान में मौजूद लोगों की जान खतरे में थी.

उन्होंने बताया था कि वह कॉकपिट के फर्श पर घायल हालत में पड़े थे. उसी समय उन्हें एहसास हुआ कि अगर वह दोबारा नहीं उठे तो यात्रियों की जान जा सकती है. स्मित ने कहा था कि वह अपनी जिंदगी के लिए लड़ रहे थे, लेकिन साथ ही उन्होंने तय किया कि वह दूसरे लोगों को मरने नहीं देंगे.

17 साल से उड़ा रहे हैं विमान, संकट में लिया हनुमान चालीसा का सहारा

स्मित ने पीएम मोदी से बातचीत में यह भी बताया था कि उन्हें विमान उड़ाते हुए 17 साल हो चुके हैं. उन्होंने कहा था कि आंखें बंद होने के बावजूद वह विमान की स्थिति को महसूस कर सकते हैं. मुश्किल वक्त में उन्होंने अपनी आस्था से भी हिम्मत ली. संकट के दौरान उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया. स्मित ने बताया था कि भगवान हनुमान से उन्हें साहस मिला.

नेतन्याहू ने स्मित को बताया हीरो

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना की है. उन्होंने स्मित को 'इजरायल, भारत और दुनिया का हीरो' बताया. नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मछार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित भी किया है.

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