न पानी का फिल्टर चला, न बाथरूम में पानी मिला, ऊपर से एक्सपायर्ड मसाले! स्कूल का ये हाल देख भड़के दिपके

न्यूज तक डेस्क

• 02:20 PM • 30 Aug 2026

हिंगोली के औंढा स्थित सरकारी स्कूल में छात्रों के भोजन के लिए एक्सपायर हो चुके मसाले मिलने का दावा किया गया है. CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने पानी के खराब फिल्टर, बाथरूम में पानी की कमी और 87 छात्रों के लिए सिर्फ दो कमरे होने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने सरकार से जवाबदेही की मांग की.

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महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में एक सरकारी स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने औंढा स्थित सरकारी स्कूल का दौरा कर छात्रों को दिए जाने वाले भोजन की सामग्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि स्कूल में खाने के लिए ऐसे मसालों के पैकेट मिले, जिनकी एक्सपायरी करीब छह महीने पहले हो चुकी थी.

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दिपके ने यह दौरा "स्कूल ठीक करो" अभियान के तहत किया. शनिवार को अपने गृह जिले हिंगोली पहुंचे दिपके ने स्कूल में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया. इसी दौरान उन्होंने भोजन के लिए रखे मसालों के कुछ पैकेट मीडिया को दिखाए.

फरवरी में एक्सपायर हो चुके थे पैकेट

अभिजीत दिपके का दावा है कि स्कूल में मिले मसालों के पैकेट फरवरी में ही एक्सपायर हो चुके थे. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अगस्त खत्म होने वाला है और सितंबर शुरू होने जा रहा है, तो आखिर इतने पुराने पैकेट अब तक क्यों इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

उन्होंने इस मामले पर सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा. दिपके ने सवाल किया कि अगर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ऐसा खाना दिया जा रहा है, तो क्या मंत्रियों के बच्चों के लिए भी इसी तरह की सामग्री इस्तेमाल की जाएगी.

"गरीब परिवारों के बच्चों के साथ ऐसा क्यों?"

दिपके ने आरोप लगाया कि स्कूल में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं और इसी वजह से उनकी सुविधाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्होंने बच्चों को एक्सपायर हो चुके खाद्य पदार्थ दिए जाने पर नाराजगी जताई.

उन्होंने कहा कि बच्चों के भोजन की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिलना उनकी बुनियादी जरूरत है.

खराब फिल्टर, बोरवेल का पानी पीने को मजबूर छात्र

स्कूल के निरीक्षण के दौरान दिपके ने पानी की व्यवस्था भी देखी. उन्होंने स्कूल में लगे पानी के फिल्टर की स्थिति पर सवाल उठाया. उनका दावा है कि फिल्टर काम नहीं कर रहा है. ऐसे में छात्र बोरवेल का पानी पीने के लिए मजबूर हैं.

दिपके ने स्कूल की पानी की टंकी की भी जांच की और उसमें मौजूद पानी को देखा. उन्होंने इस मामले में संबंधित क्षेत्र के अधिकारी से फोन पर बातचीत भी की.

बाथरूम में पानी की कमी का भी आरोप

स्कूल के शौचालयों की स्थिति को लेकर भी दिपके ने सवाल उठाए. उनका कहना है कि बाथरूम में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है. उन्होंने स्कूल में बच्चों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी को गंभीर समस्या बताया.

दिपके ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ बेहद खराब व्यवहार किया जा रहा है. उन्होंने यहां तक कहा कि बच्चों के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जा रहा है.

87 छात्रों के लिए सिर्फ दो कमरे

स्कूल की इमारत और कक्षाओं की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. दिपके के अनुसार, स्कूल में कुल 87 छात्र हैं, लेकिन उनके लिए सिर्फ दो कमरे उपलब्ध हैं. वहीं स्कूल में चार कक्षाएं स्वीकृत हैं.

इस स्थिति को लेकर उन्होंने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाया. उनका कहना है कि सिर्फ स्कूल खोल देना पर्याप्त नहीं है. वहां बच्चों के लिए सुरक्षित पानी, स्वच्छ शौचालय, पर्याप्त कमरे और बेहतर भोजन जैसी जरूरी सुविधाएं भी होनी चाहिए.

15 अगस्त से शुरू किया "School Thik Karo" अभियान

अभिजीत दिपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाने के लिए 15 अगस्त से "School Thik Karo" अभियान शुरू किया था. इस अभियान का उद्देश्य स्कूलों में मौजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने लाना और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करना है.

औंढा के सरकारी स्कूल के दौरे के दौरान सामने आए खाद्य सामग्री, पानी, बाथरूम और कक्षाओं से जुड़े मुद्दों को भी इसी अभियान का हिस्सा बताया गया है.

 

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