भारत ने अपना पहला 5.56 किलोमीटर लंबा फ्री-स्पेस क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) लिंक सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है. यह फील्ड ट्रायल 27 और 28 सितंबर 2026 की रात को गुजरात के गांधीनगर में संपन्न हुआ. प्रयोग में भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशंस एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (BISAG-N), आईआईटी गांधीनगर और डीप-टेक स्टार्टअप QNu Labs शामिल थे. ट्रायल में BISAG-N और आईआईटी गांधीनगर के बीच 5.56 किलोमीटर की खुली दूरी पर हवा के माध्यम से क्वांटम कुंजियां भेजी गईं.
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वायुमंडल की चुनौती और PAT सिस्टम
खुले वातावरण में लेजर बीम को स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि हवा, धूल, नमी या तापमान में मामूली बदलाव भी किरण को प्रभावित कर सकता है. इस चुनौती से निपटने के लिए QNu Labs के स्वदेशी पॉइंटिंग, एक्विजिशन एंड ट्रैकिंग (PAT) सिस्टम का उपयोग किया गया. इस सिस्टम ने 5.56 किलोमीटर दूर स्थित रिसीवर पर लेजर बीम को सटीकता से लॉक रखा. ट्रायल में क्वांटम बिट एरर रेट (QBER) 5 प्रतिशत से कम रहा और 230 से 260 बिट्स प्रति सेकंड की दर से सुरक्षित कुंजियां तैयार की गईं. इन कुंजियों का उपयोग टेस्ट संदेशों को एन्क्रिप्ट और डिक्रिप्ट करने में सफलतापूर्वक किया गया.
दो-परत हाइब्रिड क्वांटम आर्किटेक्चर
यह सिस्टम दो-परत वाला हाइब्रिड आर्किटेक्चर है. पहली परत QNu Labs का हार्डवेयर डिवाइस ‘Armos QKD’ है, जो फ्री-स्पेस ऑप्टिकल चैनल के माध्यम से क्वांटम कुंजियां भेजता है. दूसरी परत BISAG-N द्वारा विकसित ‘वैदिक कवच’ सॉफ्टवेयर है, जो पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और क्वांटम रैंडम नंबर जनरेशन पर आधारित है. इससे भौतिक लिंक अस्थायी रूप से बाधित होने पर भी सुरक्षा बनी रहती है.
क्वांटम फिजिक्स का नियम
क्वांटम फिजिक्स के अनुसार, अगर कोई इन फोटॉन्स को छूने या चुराने की कोशिश करता है तो उनकी अवस्था बदल जाती है. इससे हस्तक्षेप का तुरंत पता चल जाता है और डेटा प्रभावित होता है.
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
BISAG-N के महानिदेशक डॉ. विनय ठाकुर ने कहा कि वैदिक कवच को QNu Labs की QKD तकनीक के साथ एकीकृत करना व्यावहारिक क्वांटम-रेजिलिएंट संचार प्रणालियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. QNu Labs के सह-संस्थापक और सीईओ सुनील गुप्ता ने कहा कि 5.56 किलोमीटर का यह प्रदर्शन लंबी दूरी के क्वांटम-सुरक्षित नेटवर्क और भविष्य में सैटेलाइट-आधारित क्वांटम संचार का मार्ग प्रशस्त करता है. आईआईटी गांधीनगर के कोमोडोर मनीष त्रिपाठी (रिटायर्ड) ने कहा कि यह ट्रायल व्यावहारिक क्वांटम संचार तकनीकों के विकास के लिए मूल्यवान फील्ड वातावरण प्रदान करता है.
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