पासपोर्ट, आधार और मतदाता पहचान पत्र नागरिकता का सबूत नहीं, जानिए कौन-से दस्तावेज साबित करते हैं सिटिजनशिप?

Citizenship Proof India: पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी को लेकर नागरिकता की बहस तेज हो गई है. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं है. जानिए भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कौन-से दस्तावेज मान्य हैं, जन्म प्रमाण पत्र की क्या भूमिका है और भारतीय नागरिकता कानून क्या कहता है.

Citizenship Proof India
भारत में नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज को लेकर चर्चाएं तेज!

सौरव कुमार

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देशभर में फिलहाल नागरिकता को लेकर नई बहस छिड़ गई है. इसके पीछे विदेश मंत्रालय द्वारा दिया गया एक ताजा बयान है. पासपोर्ट सेवा दिवस यानी 24 जून को विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है और इसे नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता है. वहीं इसके अलावा कई बार ये भी कहा जा चुका है कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है. ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर नागरिकता का असली प्रमाण पत्र क्या है? आइए विदेश मंत्रालय का बयान और नागरिकता से जुड़े कानून को विस्तार से समझते हैं.

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विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, जिसका काम यात्रा को आसान बनाना है. सिर्फ पासपोर्ट होना अपने आप में नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं बन जाता है. इसी के साथ यह बात भी साफ हो गई कि पासपोर्ट किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होता. यह भारत सरकार की संपत्ति माना जाता है, जिसे जरूरत पड़ने पर सरकार कभी भी वापस ले सकती है.

विदेश मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, साल 2025 में हमने 1.5 करोड़ पासपोर्ट और उससे जुड़ी कई सर्विस दी गई है, जिसमें अकेले पासपोर्टों की संख्या 1.39 करोड़ रही. साथ ही पासपोर्ट जारी करने में, पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर केवल 6 वर्किंग डे लगते हैं. पासपोर्ट सेवा केंद्र और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र में आवेदकों का औसत समय 45 मिनट से भी कम है.

आधार, वोटर आईडी कार्ड नहीं है नागरिकता का प्रमाण!

पहले ही चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड पहचान का प्रमाण पत्र है और ये नागरिकता साबित करने का दस्तावेज नहीं है. कोर्ट ने पहले स्पष्ट कर दिया था कि आधार अधिनियम, 2016 और प्रतिनिधित्व ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 के मुताबिक ये नागरिकता, जन्मतिथि या निवास प्रमाण नहीं है. इसके अलावा वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड होने से भी कोई भारतीय नागरिक नहीं बन जाता है.

क्या है नागरिकता का असली प्रमाण पत्र?

अब सवाल उठता है कि अगर ये सभी दस्तावेज नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है तो असली प्रमाण पत्र है क्या? तो बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जन्मे लोग बर्थ सर्टिफिकेट यानी जन्म प्रमाण पत्र के जरिए ये साबित कर सकते हैं कि उनका जन्म भारत में ही हुआ था और इस हिसाब से वो भारतीय नागरिक है. जन्म प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत, नगर पालिका या नगर निगम आदि से जारी किया जाता है और आप इसे प्रक्रिया को फॉलो कर बनवा सकते हैं.

साथ ही सरकार भारतीय लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र जारी नहीं करती है. जो विदेशी नागरिक भारत में नागरिकता लेते है, उन्हें ही सरकार की ओर से नागरिकता का प्रमाण पत्र दिया जाता है. ये प्रमाण पत्र कई आधार पर विदेशियों को दिए जाते हैं.

क्या है नागरिकता का कानून?

भारत में नागरिकता को लेकर एक कानून भी है. इस कानून के मुताबिक अगर किसी का जन्म 26 जनवरी 1950 से लेकर 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में हुआ है तो वह भारतीय नागरिक ही माना जाता है. वहीं अगर किसी का जन्म 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है तो भारतीय नागरिकता के लिए आपके माता या पिता किसी एक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है. इसके अलावा अगर किसी का जन्म 3 दिसंबर 2004 के बाद हुआ है तो इसके लिए नियम अलग और सख्त है. ऐसे स्थिति में नागरिकता तब ही मिलती है जब माता-पिता भारतीय हो या एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी ना हो.

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